छत्तीसगढ़ के लोकगीत | Chhattisgarh ke Lokgeet | Chhattisgarh folk song

छत्तीसगढ़ के लोकगीत | Chhattisgarh ke Lokgeet | Chhattisgarh folk song

  • लोक कलाएं संस्कृति की संवाहक होती है।
  • लोक कलाओं में किसी घटना के माध्यम से इतिहास व संस्कृति के दर्शन होते है ।
  • लोक कलाएँ लोक मानस की मूल भावनाओं को प्रदर्शित करता है।
  • संगीत शिखर पुरुष विष्णु कृष्ण जोशी को कहते है।
  • लोक संस्कृति की जागरण का प्रतीक > चंदैनी गोंदा है।

गीतों का वर्गीकरण

क्र  अवसर  गीत 
1. धर्म व पूजा गीत गौरी गीत, माता सेवा गीत, भोजली के गीत, नागपंचमी के गीत, जवांरा गीत, धनकुल के गीत।
2. ऋतुओं से संबंधित गीत फाग गीत, सवनाही गीत, बारहमासी गीत ।
3. संस्कारों से संबंधित गीत बिहाव गीत, सोहर गीत, पठौनी गीत।
4. उत्सव के गीत राऊत नाचा के दोहे, सुआ गीत, छेर छेरा गीत ।
5. मनोरंजन के गीत करमा गीत, नचौरी गीत, डंडा गीत, ददरिया गीत, बाँस गीत, देवार गीत।
6. लोरियों व बच्चों के गीत खेल गीत बइठे गीत फुगड़ी, खड़े फुगड़ी, खुडुवा, डांडी पौठा गीत
7. अन्य स्फुट गीत भजन व पंथी लोकगीत तथा समनामियों व कबीरपंथियों के पद

ददरिया गीत:-

  • इसे छत्तीसगढ़ी लोक गीतों का राजा कहते है।
  • यह श्रृंगार प्रधान लोक गीत है।
  • यह एक प्रेम गीत है (दर्द गीत नहीं)
  • वर्षा ऋतु में सवाल-जवाब शैली में गाया जाता है।
  • इसे छ.ग. की कावाली भी कहते है।
  • यह चार प्रकार से होता है ।
  • 1. सातहो ददरिया > गायक-केदार यादव
  • 2. ठाड़ ददरिया > गायक-लक्ष्मण मस्तुरिया
  • 3. गड़वा ददरिया > गायक-दिलीप षडंगी
  • 4. सामान्य ददरिया > गायक-मिथलेश साहू

पंथी गीत :-

  • यह पंथी नृत्य पर विस्तार से पढ़े।
  • प्रमुख कलाकार स्व. देवदास बंजारे (BSP में कार्यरत थे)
  • आरंग के पास सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी।
  • पंथी गीत व पंथी नृत्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाया।

सुआ गीत :-

  • बस्तर के गोड़ जनजाति में अधिक प्रसिद्ध है।
  • अधिक जानकारी के लिए सुआ नृत्य को पढ़े।

भरथरी गीत :-

  • यह राजस्थान की लोक गाथा पर आधारित होता है।
  • राजा भरथरी व रानी पिंगला के वियोग गाथा पर आधारित होता है।
  • श्रृंगार रस की प्रधानता होती है।
  • प्रमुख गायिक स्व. सुरुज बांई खाण्डे (बिलासपुर SECL) में कार्यरत थी।
  • वाइप यंत्र सारंगी या एकतारा।

ढोलामारू गीत :-

  • यह राजस्थान की लोक गाथा पर आधारित है।
  • इसमें ढोला व मारू के प्रेम गाथा पर आधारित है।
  • गायक 1. स्व. सुरूजबाई खाण्डे  2. जगन्नाथ कुम्हार

बाँस गीत :-

  • यह यादव जाति में प्रचलित है।
  • यह करूण गाथा पर आधारित होता है।
  • यह मोरध्वज व ताम्रध्वज की जीवन चरित्र पर आधारित होता है।
  • वाद्य यंत्र > बाँस की बांसुरी
  • गायक 1. केजु राम यादव (खेरागढ़)  2. नकुल यादव (धमतरी)

चंदैनी गीत :-

  • यह यादव जाति में प्रचलित है।
  • लोरिक चंदा के प्रेम पर आधारित होता है।
  • गायक > 1. चिंतादास

सोहर गीत :-

  • पुत्र जन्म के उपलक्ष्य में महिलाओं द्वारा गाया जाता है।

बरूआ गीत :-

  • उपनयन संस्कार के समय गाया जाता है।

सधौरी गीत :-

  • नई बहू के पहली बार गर्भवती होने के सातवें माह मायके वाले सात प्रकार का व्यंजन खिलाते है और सधौरी गीत गाते हैं।

लोरी गीत :-

  • माताओं द्वारा बच्चों को सुलाने के लिए गाया जाता है।

सान्ध्य गीत :-

  • कुंवारी कन्याओं द्वारा सांध्य काल में सामूहिक रूप से गाया जाता है।

सेवा गीत :-

  • नवरात्रि के समय देवी पूजा के लिए गाया जाता है।

जंवारा गीत :-

  • जंवारा निकालने के समय गाया जाता है।

भोजली गीत :-

  • सावन माह में महिलाओं द्वारा गाया जाता है।
  • “अहो देवी गंगा” भोजली गीत है।

नगमत गीत :-

  • नागपंचमी के अवसर पर गाया जाता है।

मांझी गीत :-

  • यह जशपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में गाया जाता है।

भड़ौनी गीत :-

  • विवाह में दुल्हे के सालियों द्वारा गाया जाता है।

दहकी / फाग गीत :-

  • यह होली में गाया जाता है।

सवनाही गीत :-

  • यह वर्षा ऋतु में गाया जाता है।

गोपल्ला गीत :-

  • यह कल्चुरी वंश से पालतु पशु गाय पर आधारित होती है।

पंडवानी गीत :-

  • पण्डवानी का अर्थ – पाण्डवों की वाणी
  • पाण्डओं की कथा पर छत्तीसगढ़ी रूप में गायन शैली है।
  • छ.ग. की पण्डवानी सबल सिंह चौहान द्वारा रचित छत्तीसगढ़ी महाभारत पर आधारित है।
  • इसमें तीन पात्र होते है :- 1. गायक 2. रागी 3. वादक
  • वाद्य यंत्र > तम्बूरा
  • पण्डवानी दो प्रकार से होता है। 1. कापालिक 2. वेदमती

कपालिक गीत :-

  • यह सबसे प्राचीन गीत है।

  • इसमें सिर्फ कथात्मक होता है।
  • यह देवार जाति में अधिक प्रचलित है।
  • गायक > 1. ऋतु वर्मा 2. ऊषा बाई 3. शांति बाई

वेदमती गीत :-

  • यह दासकाठी पर आधारित होता है। इसमें गायन व नृत्य दोनों
  • इसमें मुख्य नायक भीम व नायिका द्रौपती है।
  • गायक:-
  • 1. तीजन बाई (घुमकर गाती है)।
  • 2. स्व. झाडूराम देवांगन (बैठकर गाते थे)
  • 3. पुनाराम निपाद(खड़े होकर गाते हैं।)
  • 4. रेवाराम साहू (विश्व में ख्याति प्राप्त नहीं है)


छत्तीसगढ़ का विवाह गीत

तीन दिन की शादी को तीन तेलिया शादी कहते है।

पांच दिन की शादी को पांच तेलिया शादी कहते है।

चुलमाटी गीत :- 

  • सुवासिने चूल्हा बनाने के लिए मिट्टी लाते समय गायी जाती है।

तेलचघी गीत :-

  • वर व कन्या को हल्दी लगाते समय गाया जाता है।

बारात गीत :-

  • बारात प्रस्थान के समय सुवासिने गीत गाती है।

बारात स्वागत गीत :-

  • कन्या पक्ष की सुवासिनों द्वारा गीत गायी जाती है।

टीकावन गीत :-

  • कन्या पक्ष द्वारा टीकावन गीत गाते है।

भांवर गीत :-

  • वर-वधु द्वारा फेरा लगाते समय गाया जाता है।

विदाई गीत :-

  • कन्या की विदाई के समय यह गीत गाया जाता है।

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