छत्तीसगढ़ में पशुपालन | Chhattisgarh me Pashupalan

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छत्तीसगढ़ में पशुपालन Chhattisgarh me Pashupalan

छत्तीसगढ़ में पशुओ की संख्या

पशुओ की संख्या :- 1.50 करोड़ 

  1. गाय :- 98.13 लाख 
  2. बकरी :- 32.25 लाख 
  3. भैस :- 13.90 लाख 
  4. सुवर :- 4.39 लाख 
  5. भेड़ :- 1.68 लाख

छत्तीसगढ़ प्रजनन केंद्र 

पशु प्रजनन केंद्र 
  1. अंजोरा ( दुर्ग ) सबसे बड़ा
  2. सरकंडा बिलासपुर
  3. पकरिया पेंड्रा बिलासपुर
  4. चंद्रखुरी रायपुर
बकरी प्रजनन केंद्र 
  1. पकरिया पेंड्रा बिलासपुर
  2. सरोरा रायपुर
  3. रामपुर ( ठाठापुर ) कवर्धा
सुवर प्रजनन केंद्र 
  1. सकोला सरगुजा
  2. परचनपाल बस्तर
  3. कुनकुरी जशपुर
पशु वीर्य संग्रहालय 
  1. राजनांदगाव
  2. रायगढ़
  3. बिलासपुर
  4. रायपुर
  5. दुर्ग ( सबसे बड़ा )
  6. अंबिकापुर
  7. जगदलपुर
तरल नेत्रजन 
  1. रायगढ़
  2. बिलासपुर
  3. दुर्ग
  4. रायपुर
  5. अंबिकापुर
  6. जगदलपुर
कुकुट पालन प्रक्षेत्र 
  1. रायगढ़
  2. बिलासपुर
  3. दुर्ग
  4. जगदलपुर
  5. बैकुंठपुर
  6. सरगुजा
  7. दंतेवाड़ा
राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ 
  • रायपुर (1983)
  • ब्रांड :- साँची
  • 2011 :- देवभोग
दूध  प्रौधोगिक महाविद्यालय रायपुर ( 1983 )
कामधेनु विश्वविद्यालय अंजोरा , दुर्ग (2012)
सबसे बड़ा पशुबज़ार भैंसथान , रायपुर
प्राचीन पशुबज़ार रतनपुर , बिलासपुर


क्या आप जानते है ?

गौं वंशीय क्रम 

  1. गाय 
  2. बकरी 
  3. भैस 
  4. भेड़ 


पशु उत्पादन 

उत्पादन प्रति व्यक्ति खपत 
दूध132 ग्राम प्रतिदिन
अंडा ( इसमें शाकाहारी  लोगो को भी गिना गया है लेकिन वो नहीं खाते है )57 अंडा प्रतिवर्ष
मांस ( इसमें शाकाहारी  लोगो को भी गिना गया है लेकिन वो नहीं खाते है )1.50 KM  प्रतिवर्ष


पशु पालन के लिए कदम 

पशु चिकित्सालय341
पशु औषधालय829
पशु चल चिकित्सालय27
रोग अनुसन्धान  केंद्र18
कृत्रिम गर्भाधान केंद्र248
मोटर साइकिल यूनिट20
एम्बुलेटरी यूनिट10
हिमीकृत वीर्य गर्भाधान251

 

पशु संगणना 2019 के अनुसार प्रदेश में 1.59 करोड़ पशुधन तथा 1.87 करोड़ कुक्कुट एवं बतख पक्षीधन है। पशुपालन विभाग की प्रमुख योजनाएँ एवं दायित्व का स्वरूप है- पशु स्वास्थ्य रक्षा, टीकाकरण कार्य, शिविर, पशु रोग अनुसंधान कार्य, पशु माता महामारी, पशु नस्ल सुधार, पशु प्रजनन प्रक्षेत्र

राज्य में पशु उत्पाद उपलब्धता

  • वर्ष 2020-21 के सर्वेक्षण अनुसार राज्य में प्रतिव्यक्ति प्रतिदिन 154 ग्राम दूध की उपलब्धता, प्रतिव्यक्ति वार्षिक 60 अण्डे तथा प्रतिव्यक्ति वार्षिक मांस की उपलब्धता 1.505 कि.ग्रा. होना पाया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य संवर्ग की योजनाएँ

कुक्कुट विकास

  • राज्य में कुक्कुट पालन एक पारंपरिक व्यवसाय है। कुक्कुट पालन को प्रोत्साहित करने तथा बी.पी.एल. आदिवासी परिवारों के आय में वृद्धि करने हेतु अनुसूचित जनजाति आदिवासी उप योजनांतर्गत आदिवासी परिवारों को कुक्कुट इकाईयों का वितरण किया जाता है।

सूकर पालन योजना

  • अनुसूचित जनजाति वर्ग के सूकर पालकों को नस्ल सुधार हेतु मिडिल व्हाईट यार्कशायर /उन्नत नस्ल का सूकरत्रयी इकाई (1 नर +2 मादा सूकर) तथा अनुसूचित जाति वर्ग के सूकर पालकों को नर सूकर हेतु इकाई लागत का 90% अनुदान प्रदाय के किया जाता है, जो कि अधिकतम क्रमश: ₹9000 एवं ₹3500 तक देय होता हैं।
  • वर्ष 2021-22 से नर सूकर योजना बंद कर दी गई है।

बकरी पालन योजना

  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में स्थानीय बकरियों के नस्ल सुधार हेतु उन्नत नस्ल के ग्रेडेड नस्ल का बकरा विशेष घटक योजनांतर्गत अनूसूचित जाति वर्ग के एवं आदिवासी उपयोजनांतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को अनुदान पर प्रजनन योग्य बकरों का वितरण किया जाता है।

उन्नत नस्ल के साँडों का वितरण

  • सुदूर अंचलों में स्थानीय गौवंशीय पशुओं की नस्ल सुधार हेतु आदिवासी उपयोजना एवं अनुसूचित जाति तथा सामान्य योजना अंतर्गत, शत प्रतिशत अनुदान पर साँडों का वितरण किया जाता है।

उन्नत मादा वत्स पालन योजना

  • इस योजना का लाभ सभी वर्ग के हितग्राहियों को दिया जाता है, ताकि उन्नत नस्ल के वत्सपालन में अभिरूचि उत्पन्न हो।
  • योजना के तहत इकाई लागत रू. 19500 में से सामान्य वर्ग के हितग्राहियों के लिए रू. 15000 एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के हितग्राहियों के लिए रू.18000 का शासकीय अनुदान तथा पशु आहार हेतु अलग से अनुदान दिया जाता है।

राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना

  • योजनांतर्गत राज्य में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की बढ़ती हुई मांग के देखते हुए आपूर्ति सुनिश्चित करने डेयरी इकाई की स्थापना को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  • राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 2 दुधारू पशुओं की इकाई लागत राशि रूपये 1.40 लाख पर सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियों को 50% एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के हितग्राहियों को 66.6% राशि का अनुदान प्रावधानित है।
  • योजनांतर्गत हितग्राही द्वारा इकाई को बैंक ऋण के माध्यम से (बैंक लिंकेज) या स्वयं की पूंजी (स्ववित्तीय) से क्रियान्वित किया जा सकेगा।

पशुधन मित्र योजना

  • पशुधन मित्र (गौसेवक / प्राईवेट कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता/मैत्री) को जीवकोपार्जन एवं कार्य में रूचि की निरंतरता बनाने हेतु पशुओं में टीकाकरण शिविर आयोजन में भाग लेने हेतु प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।

ग्रामोत्थान योजना

आरंभ : वर्ष 2006-07 से
पंजीकृत चरवाहे : अब तक कुल 15,709

उद्देश्य : पशु नस्ल सुधार द्वारा कृषकों की आमदनी में वृद्धि करना – कृषि कार्यों के लिये उन्नत नस्ल के सक्षम पशुओं का विकास – पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान हेतु सूचना तंत्र का सुदृढ़ीकरण -चरवाहों को पशुपालन विभाग से जोड़ना

सहायता : 15 रु. प्रति कृत्रिम गर्भाधान के लिए चरवाहे को 15 रू. प्रति बंधियाकरण में सहयोग पर चरवाहों को देय है।

केन्द्र सरकार प्रवर्तित प्रमुख योजनाएं

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना :

  • यह योजना केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग द्वारा ‘अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता’ अंतर्गत संचालित है। वर्ष 2018-19 से RKVY – RAFTAAR – Remunerative Approaches for Agriculture and Allied sector Rejuvenation नाम से योजना का संचालन हो रहा है।

नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM ) :

  • वर्ष 2020-21 में इस योजना के अन्तर्गत पशुपालकों को व्यावसायिक बकरी पालन हेतु बकरी इकाईयों का वितरण, बकरियों के लिए कृमीनाशक दवापान एवं मिनरल मिक्चर का वितरण, 02 दिवसीय पशु मेला आयोजन, चारा बीज वितरण, पावर ड्रिवन चॉफ कटर वितरण एवं चारागाह विकास कार्य स्वीकृत किये गए।

लाईवस्टाक हेल्थ एण्ड डिसीस कंट्रोल (LH&DC)

  • पशु रोग नियंत्रण (ASCAD) Assistance to States for Control of Animals diseases केन्द्र प्रवर्तित योजनांतर्गत पशुओं में प्रमुख रोगों के विरूद्ध रोग-प्रतिबंधात्मक टीकाकरण, शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार, विभागीय अमला का प्रशिक्षण/कार्यशाला आयोजन, संक्रामक बीमारी के रोकथाम हेतु आवश्यक प्रचार-प्रसार एवं जिलों में संचालित प्रयोगशाला का उन्नयन/सुदृढ़ीकरण किया जाता है।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन

  • योजनांतर्गत ग्राम झालम जिला बेमेतरा में संस्थागत गोकुल ग्राम की स्थापना हेतु छ ग. राज्य गौ सेवा आयोग को राशि प्रदाय किया गया है।

 राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम

  • राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) अब तक का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है, को पैर एवं मुंह की बीमारी (एफएमडी) तथा ब्रुसेलोसिस को वर्ष 2030 तक नियंत्रित करने और अंततः उन्मूलन के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय ब्रुसलोसिस नियंत्रण कार्यक्रम (NCPB )– योजनांतर्गत 4-8 माह उम्र के मादा वत्स (बछिया/पड़िया) को ब्रुसलोसिस रोग से बचाने हेतु रोग प्रतिबंधात्मक टीकाकरण कार्य किया जाता है।
  • मुंहपका खुरपका रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP-FMD)– एफ. एम. डी. मुक्त भारत अभियान के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2019-20 से इसकी शुरूआत की गई, जिसके तहत एफ. एम. डी. रोग की रोकथाम हेतु प्रत्येक 6 माह के अंतराल में गौवंशीय, भैंसवंशीय पशुओं में सघन टीकाकरण कार्य किया जाता है।
  • PPR नियंत्रण कार्यक्रम (PPR-CP)– बकरियों में पी. पी. आर नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश के बकरियों को पी.पी.आर रोग के विरूद्ध टीकाकरण किया जाता है।

पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ)

  • आरंभ : 2020 में
  • कोष राशि : 15,000 करोड़ रूपये
  • उद्देश्य : डेयरी एवं मांस प्रसंस्करण के लिए बुनियादी ढांचे की स्थापना और पशु चारा संयंत्रों की स्थापना में निवेश की सुविधा प्रदान करता है।
  • सहायता का स्वरूप : 3% ब्याज अनुदान और कुल उधार के 25% तक क्रेडिट गारंटी

विविध तथ्य –

  • राज्य में पशुओं में उन्नत प्रजनन सुविधा हेतु कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र की संख्या 22, हिमीकृत वीर्य कृत्रिम गर्भाधान उपकेन्द्र की संख्या 248, पशु चिकित्सालय 341, पशु औषधालय 829 कार्यरत हैं।
  • प्रदेश में दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, रायपुर में एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय, अंजोरा, दुर्ग में,
  • औसतन सबसे अधिक समय तक दूध देने वाली भैंस- जाफराबादी
  • सबसे अधिक दूध देने वाली भैंस – मुर्रा
  • सर्वाधिक वसायुक्त दूध देने वाली भैंस- भदावरी
  • बरबरी भारत में सर्वाधिक दूध देने वाली बकरी की नस्ल है।

राज्य में पशुधन संबंधी संस्थाएं

पशु चिकित्सालय-341
पशु औषधालय-829
चलित पशु चिकित्सा इकाई–27
पशु रोग अनुसंधान प्रयोगशाला–22
कत्रिम गर्भाधान केन्द्र–248
एम्बुलेट्री क्लीनिक–08
मोटर सायकल यूनिट–20
मुख्य ग्राम खण्ड–10
मुख्य ग्राम खण्ड इकाई-99

सुराजी गांव योजना – नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी

  • प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी सुराजी गांव योजना के अन्तर्गत नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना का क्रियान्वयन विभिन्न विभागों जैसे- पंचायत एवं ग्रामीण विकास, – कृषि, पशुधन विकास, उद्यानिकी, ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी आदि के समन्वय से किया जा रहा है। उक्त योजना के गरुवा घटक अंतर्गत समस्त जिलों में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में ग्राम पंचायत स्तर पर गोचर भूमि आरक्षित कर गौठान एवं चारागाह का वृहद निर्माण किया जा रहा है।
  • योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के गौवंशीय-भैंसवंशीय पशुधन को गौठानो के माध्यम से एक स्थान पर छाया, शुद्ध पेयजल, सूखा एवं हरा चारा उपलब्ध कराना है, जिससे खुले में घूम रहे पशुओं से किसानो की फसलों को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके साथ ही पशुओं को मूलभूत सुविधा के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी उपलब्ध कराया जा सके।
  • गौठानो में सी. पी. टी. एवं तार फेंसिंग कर आरक्षित भूमि को घेरा कर पशुओं के लिए स्थान सुरक्षित किया गया है, जहां डे-केयर सेन्टर के रूप में ग्राम के पशुओं को चरवाहा के माध्यम से प्रातः कालीन गौठानो में लाया जाना है तथा संध्या होने पर पुन: पशु मालिक के घर वापस किया जाना है।
  • विभागीय अमलों द्वारा गौठान में आने वाले पशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे प्राथमिक उपचार, समयबद्ध प्रतिरोधात्मक टीकाकरण के साथ-साथ कृत्रिम गर्भाधान, प्राकृतिक गर्भाधान हेतु सांड वितरण, बंधियाकरण, कृमिनाशक दवापान, कीटनाशक छिड़काव आदि सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही है।
  • उक्त योजना से ग्रामीण स्तर पर पशुओं के रख रखाव एवं हरा चारा उत्पादन की अधोसंरचना विकास किया जा रहा है।
  • वर्तमान में योजनांतर्गत 10,418 गौठानों को स्वीकृति प्रदाय की गयी है जिसमें से 7,356 गौठानों का पूर्ण निर्माण किया गया है।

गोधन न्याय योजना

प्रारंभ : 20 जुलाई 2020 को (हरेली उत्सव के दिन से)

उद्देश्य :

  • पशु पालकों की आय में वृद्धि पशुधन की चराई पर रोक
  • जैविक खाद को बढ़ावा, रासायनिक खाद में कमी
  • रबी तथा खरीफ फसल सुरक्षा एवं द्विफसलीय क्षेत्र विस्तार
  • स्थानीय स्तर पर जैविक खाद की उपलब्धता
  • स्व-सहायता समूहों को रोजगार उर्वरता सुधार

प्रावधान/लाभ :

  • सुराजी गाँव योजनांतर्गत गौठान निर्माण
  • रू. 2 प्रति कि.ग्रा. अर्द्धठोस गोबर, खरीदी गौठान समिति द्वारा
  • रू. 10 प्रति कि.ग्रा. की दर से वर्मी कम्पोस्ट का विपणन (भुगतान 15 दिवस में)
  • गोधन न्याय योजना के तहत अब तक 63.89 लाख क्विंटल गोबर का क्रय किया जा चुका है वहीं पशुपालकों को 127 करोड़ 79 लाख रूपये का भुगतान किया गया है।

 पशु आहार

  • बढ़ती हुई दूध की आवश्यकता की पूर्ति के लिए दो चीजें आवश्यक हैं, एक अच्छी नस्ल के पशु एवं दूसरा पौष्टिक आहार.
  • पशु आहार के मुख्यतया दो प्रकार है
    1. चारा
    2. पशु दाना

चारा

  • पशुओं के आहार में चारे का होना अत्यन्त आवश्यक है। दूधारू पशुओं मे रूमेन के सुचारू रूप से काम करने एवं दूध में सामान्य वसा प्रतिशत बनाये रखने में चारे का विशेष महत्व है। दूधारू पशुओं से अधिक उत्पादन के लिए चारा अधिक से अधिक मात्रा मे खिलाना चाहिए। नमी के आधार पर दो प्रकार के चारे होते हैं- सूखा चारा और हरा चारा।

1.सूखा चारा

सूखा चारा में जल की मात्रा 15% से कम रहता है। सूखे चारे में हरे चारे की अपेक्षा कम पोषक तत्व होते हैं। यह दो तरह से बनाया जाता है

1.सूखी घास– दलहनी सूखी घास बरसीम, दलहनी सूखी घास – नेपियर हे
2.भूसा– अनाज का भूसा -गेहूं व जौ का भूसा, दलहनी भूसा- अरहर, उड़द, मूंग भूसा

2.हरा चारा

  • हरा पौष्टिक चारे के अभाव में दुग्ध व्यवसाय लाभकारी नहीं हो सकता। हरे पौष्टिक चारे के बिना अच्छी नस्ल के पशु का उत्पादन भी कम हो जाता है।
  • पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य एवं अधिक दूध उत्पादन के लिए हरा चारा आवश्यक है।
  • हरा चार पौष्टिक तत्वों से भरपूर, स्वादिष्ट, पाचक एवं दानों की अपेक्षा सस्ता होता है और इसे अनुपयोगी जमीन मे आसानी से उगाया जा सकता है।
  • हरे चारे से पोषक तत्व पशुओं को आसानी से मिल जाते है।
  • हरे चारे में विटामिन की मात्रा भी अधिक होती है।
  • हरा चारा में जल की मात्रा 15% से लेकर 80% तक हो सकता है।
  • हरा चारा में रेशा कम, प्रोटीन अधिक होता है।
  • इसमें सभी दलहनीय एवं गैर दलहनीय चारा, घास, पेड़ के पत्ते आदि आते हैं।
    बिना उगाए चारागाह – पेड़ों की पत्तियां – पीपल, बेल, गूलर, सूबबूल झाड़ियां – झरबेरी, पीपल, बेल, बबूल
    उगाए हुए-दलहनी- सोयाबीन, लोबिया , वर्मिस , लड्यूसन , गुवार अदलहानी- धन , गेहू , जाई , ज्वर , घास म मक्का , नेपियर , गिनी ,पैरा घास, जौ

3.पशु दाना 

  • दाना वह मिश्रण है जिसमें दो या अधिक भोज्य पदार्थ होते हैं और पोषक तत्व भी चारे की अपेक्षा अधिक होते हैं। ये विभिन्न सुपाच्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
  • इसमें रेशा की मात्रा 18% से कम होती है।

पशु दाना के घटक

  • मक्का/ज्वार/ बाजरा
  • खली- सरसों, सोयाबीन, अलसी / कपास धान का चोकर/कोढ़ा / कनकी
  • चना, अरहर, मसूर, चने का छिलका, उड़द, मूंग
  • मूंगफली/सोयाबीन खली
  • खनिज मिश्रण
  • नमक
  • यूरिया

संतुलित पशु दाना में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख घटक

विभिन्न पोषक तत्वों की प्रचुरता के आधार पर दाना मिश्रण में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख अवयव को हम इन्हें निम्नलिखित भागों में बाँट सकते हैं-

प्रोटीन का स्रोत– विभिन्न प्रकार की खली जैसे, मूँगफली की खली, बिनौली की खली, सोयाबीन की खली, सरसों की खली, सूर्यमुखी की खली, अलसी की खली, मछली का चूर्ण, मीट चूर्ण, ब्लड चूर्ण आदि।

ऊर्जा के स्रोत– मुख्यतया सभी आनाज जैसे गेहूँ, मक्का, बाजरा, जौ, जई, चावल की पॉलिश, ग्वार एवं शीरा आदि ।

फसलों के अन्य उत्पाद – गेहूँ की चोकर, चने की चूरी, चने का छिलका, अरहर की चूरी एवं चावल की चुनी इत्यादि ।

खनिज मिश्रण- मिनरल मिक्सचर, हर्बल पोषक तत्व, डाई कैल्सियम फॉस्फेट, कैलसाइट पाउडर, साधारण नमक, विटामिन्स ए तथा डी-3। इनसे हमें कैल्शियम फॉसफोरस, ताम्बा, लोहा, जस्ता आदि कई महत्वपूर्ण खनिज प्राप्त होते हैं।

वृद्धि दायी आहार– प्रोबायोटिक, प्रीबायोटिक एवं हार्मोन आदि।

पशुओं को कौन कौन से रोग होते हैं ? 

1.विषाणु जनित रोग

  • मुंह व खुर की बीमारी– सूक्ष्म विषाणु (वायरस) से पैदा होने वाली बीमारी को कई नामों से जाना जाता है जैसे कि खरेडू, मुँह पका खुर पका, चपका, खुरपा आदि। यह अत्यंत संक्रामक रोग है जो कि गाय, भैंस, भेड़, ऊंट, सुअर आदि पशुओं में होता है। विदेशी व संकर नस्ल रोग की गायों में यह बीमारी अधिक गम्भीर रूप से पायी जाती है। इस रोग का कोई निश्चित उपचार नहीं है लक्षणों के आधार पर •बीमारी की गम्भीरता को कम करने के लिए पशु का उपचार किया जाता है।
  • पशु प्लेग (रिन्डरपेस्ट):- संक्रामक रोग, जुगाली करने वाले लगभग सभी पशुओं को होता है। इनमें पशु को तीव्र दस्त या पेचिस लग जाते हैं। पशु की 3-9 दिनों में मृत्यु हो जाती है। भारत सरकार सरकार द्वारा लागू की गयी रिन्डरपेस्ट इरेडीकेशन परियोजना के कारण अब यह बीमारी देश में लगभग समाप्त हो चुकी है।
  • रेबीज: पशुओं में पागलपन का रोग, इस रोग को पैदा करने वाले सूक्ष्म विषाणु रोगग्रस्त कुत्ते, बिल्ली, बंदर, गीदड़, लोमड़ी या नेवले के काटने से स्वस्थ पशु के शरीर में प्रवेश करते हैं। रोग ग्रस्त पशु की लार में यह विषाणु बहुतायत में होता है। एक बार लक्षण पैदा हो जाने के बाद इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। लक्षण पैदा हो जाने के पहले टीका लगवाना चाहिए।

2.जीवाणु जनित रोग

  • लंगड़ा बुखार (ब्लैक क्वार्टर) या एक टंगिया रोग: – जीवाणुओं से फैलने वाला यह रोग गाय व भैंसों दोनों को होता है लेकिन गोपशुओं में यह बीमारी अधिक देखी जाती है टांगों के ऊपरी भाग में भारी सूजन आ जाती हैं जिससे पशु लंगड़ा कर चलने लगता है या फिर बैठ जाता है।
  • गलघोंटू रोग (एच.एस)– गाय व भैंसों में होने वाला एक बहुत ही घातक तथा संक्रामक रोग है। यह भैंसों में अधिक पाया जाता है।
  • बुसिल्लोसिस (पशुओं का छूतदार गर्भपात):- जीवाणु जनित इस रोग में गोपशुओं तथा भैसों में गर्भावस्था के अन्तिम त्रैमास में गर्भपात हो जाता है।
  • क्षय रोग (TB): जीवाणु जनित इस रोग मानव एवं पशुओं दोनों में घातक, यह फेफड़ों को प्रभावित करता है।

3.रक्त प्रोटोजोआ जनित रोग

  • बबेसिओसिस अथवा टिक फीवर (पशुओं के पेशाब में खून आना) : बबेसिया प्रजाति के प्रोटोजोआ पशुओं के रक्त में चिचडियों के माध्यम से प्रवेश के जाते हैं तथा वे रक्त की लाल रक्त कोशिकाओं में जाकर अपनी संख्या बढ़ने लगते हैं जिसके फलस्वरूप लाल रक्त कोशिकायें नष्ट होने लगती हैं।

4.बाह्य तथा अंतः परजीवी जनित रोग

  • पशुओं के शरीर पर जुएं, चिचड़ी तथा पिस्सुओं का प्रकोपः पशुओं के शरीर पर बाह्य परजीवी जैसे कि जुएं, पिस्सु या चिचड़ी आदि प्रकोप
  • पशुओं में अंतःपरजीवी प्रकोप : पशुओं की पाचन नली में भी अनेक प्रकार के परजीवी पाए जाते हैं जिन्हें अंत:परजीवी कहते हैं हैं। ये पशु के पेट, आंतों, यकृत उसके खून व खुराक पर निर्वाह करते हैं, जिससे पशु कमजोर हो जाते हैं।

पशुओ मे विभिन्न रोग एवं उनके करके

रोगकारकप्रभावित पशु
खुरपका और मुहपकावायरससभी पालतू पशु
पोकनीवायरसगाय , भैस, भेड़, सुवर
गलघोटूजीवाणुगाय , भैस
गिल्टी  रोग (Anthrax)जीवाणुगाय , भैस, भेड़, बकरी , घोडा
लंगड़ा बुखारजीवाणुगाय , भैस
थनैला रोग(mastitis)जीवाणुसभी पालतू पशुओ का थान प्रभावित
निमोनियाजीवाणु गाय , भैस, भेड़, बकरी
चेचकवायरस गाय , भैस, भेड़, बकरी
क्षय रोगजीवाणु गाय , भैस, भेड़, बकरी
मिल्क फीचरकैल्शियम की कमीगाय में
जान रोगजीवाणु गाय , भैस, भेड़, बकरी , सुवर
संक्रमण गर्भपातजीवाणु गाय , भैस, सुवर , बकरी
अफारा रोग (Tympany)दूषित आहारजुगाली करने वाले पशु

मत्सय पालन

  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है।
  • भारत का वैश्विक उत्पादन में 7.56% हिस्सा है।
  • यह देश के GDP में लगभग 1.24% का योगदान देता है।
  • वित्त वर्ष 2020-21 में लगभग 145 लाख टन रिकॉर्ड मछली उत्पादन हुआ।
  • रोजगार के मामले में, विशेष रूप से उपेक्षित तथा कमजोर समुदायों के लिए यह क्षेत्र भारत में 2.8 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका की पूर्ति करता है।

छत्तीसगढ़ में –

  • राज्य के उपलब्ध 1.92 लाख हेक्टे. जल क्षेत्र में से 1.8 लाख हेक्टेयर (94.38%) जलक्षेत्र मछली पालन हेतु विकसित किया जा चुका है।
  • राज्य के समस्त स्रोतों से वर्ष 2020-21 में 5,77,365 मिट्रिक टन मत्स्य उत्पादन किया गया जो पिछले साल से 7.34% अधिक था।
  • वर्ष 2021-22 में सिंतबर तक 3,20,126 मिट्रिक टन मत्स्य उत्पादन किया गया।
    • छत्तीसगढ़ के 1.48 लाख हेक्टेयर में मछली पालन किया जाता है ।
    • छत्तिसगर में मछवारों की संख्या :- 44111 लोग है ।
    • छत्तीसगढ़ में मछुवा समितियों की संख्या – 1326 है ।
    • तालाब व नहर को 10 साल के लिए सर्कार लीज ( किराया ) पर देती है , मछुवारे समितियों लेती   है ।
    • बंद ऋतू में मछुवारो को 900 रु  मासिक आर्थिक सहायता दिया जाता है ।
    • भारत में मछली उत्पादन में छत्तीसगढ़ का स्थान 8  वा है ।
    • मछली पालन विकास धमतरी में 1975 से चल रहा है । विश्व बैंक के सहयोग से ।
    • गाम्ब्राजिया मछली :- मच्छर के लार्वा को कहती है
    • कैट फिश ( Cat Fish ) मछली को हिंदी में मांगुर मछली कहते है तो वही इसे छत्तीसगढ़ी में मोंगरी मछली कहते हिअ .

    नोट :- यह संरक्षित ( मार नहीं सकते है ) मछली है ।

मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा

  • कृषि का दर्जा मिलने से अब वे सहकारी समितियों के माध्यम से 10% ब्याज पर ऋऋण प्राप्त कर सकेंगे।
  • किसानों की तरह ही मत्स्य पालकों और मछुआरों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा।
  • केज कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा।
  • मत्स्य पालन के लिए अब पानी के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
  • मुफ्त में बिजली भी।

अनुदान

  • तालाब निर्माण के लिए
  • सामान्य वर्ग के मत्स्य कृषकों को 4.4 लाख
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ महिला वर्ग – 6.6 लाख

बीमा

  • बीमित मत्स्य कृषकों की मृत्यु पर 5 लाख रू. तक देने का प्रावधान है।
  • बीमार होने पर अस्पताल में ईलाज हेतु 25000 रू. तक का प्रावधान।

रोजगार सृजन

  • मत्स्य कृषकों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए वर्ष 2020-21 में 318 लाख मानव दिवसों का सृजन किया गया।
  • वर्ष 2021-22 में माह दिसंबर 2021 तक 352 लाख मानव दिवसों का रोजगार सृजन किया गया।

GSDP में कृषि एवं सम्बन्ध क्षेत्रो का योगदान 

फसल क्षेत्र का सकल राज्य उत्पाद में योगदान ( स्थिर भाव 2011-12)

विवरण 2018-192019-20(P)2020-21(Q)2021-22(A)
योगदान (लाख रु)2279945230903324881632586429
वृद्धि (प्रतिशत)14.311.287.663.95
गलदप में योगदान (%)10.219.8810.7810.09

पशुधन क्षेत्र का सकल राज्य घरेलु उत्पाद में भागीदार का विवरण ( स्थिर भाव 2019-22)

विवरण 2018-192019-20(P)2020-21(Q)2021-22(A)
योगदान (लाख रु)380986416141407918417187
वृद्धि (प्रतिशत)21.629.23-1.982.27
गलदप में योगदान (%)1.711.781.771.63

मछली उद्योग का सकल राज्य घरेलु उत्पाद में भागीदार का विवरण ( स्थिर भाव 2019-22)

विवरण 2018-192019-20(P)2020-21(Q)2021-22(A)
योगदान (लाख रु)454659503807540782582335
वृद्धि (प्रतिशत)6.8810.087.347.68
गलदप में योगदान (%)2.052.162.342.27

ध्यान दे :

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आजीविका

1.अर्थव्यस्था में कृषि की भूमिकाक्लिक करे
2.हरित क्रांतिक्लिक करे
3.कृषि में यंत्रीकरणक्लिक करे
4.कृषि सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारियाक्लिक करे
5.कृषि सम्बंधित महत्वपूर्ण योजनाएक्लिक करे
6.राज्य के जैविक ब्रांडक्लिक करे
7.शवेत क्रांतिक्लिक करे
8.राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशनक्लिक करे
9.दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहानक्लिक करे
10.दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौसल योजनाक्लिक करे
11.आजीविका एवं ग्रामोद्योगक्लिक करे
12.ग्रामोद्योग विकास के लिए छत्तीसगढ़ शासन के प्रयत्नक्लिक करे
13.संस्थागत विकास- Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
15.आजीविका हेतु परियोजना प्रबंध सहकारिता एवं बैंकक्लिक करे
16.राज्य में सहकारिताक्लिक करे
17.सहकारी विपरणक्लिक करे
18.भारत में बैंकिंगक्लिक करे
19.सहकारी बैंको की संरचनाक्लिक करे
20.बाजारक्लिक करे
21.पशु धन उत्पाद तथा प्रबंधक्लिक करे
22.छत्तीसगढ़ में पशु पालनक्लिक करे
23.पशु आहारक्लिक करे
24.पशुओ में रोग-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
25.मतस्य पालनक्लिक करे

 

ग्रामीण विकास की फ्लैगशिप योजनाओ की जानकारी

1.महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजनाक्लिक करे
2.महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की विशेषताएंक्लिक करे
3.सुराजी गांव योजनाक्लिक करे
4.स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजनाक्लिक करे
5.इंदिरा आवास योजना-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
6.प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)क्लिक करे
7.प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनाक्लिक करे
8.मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजनाक्लिक करे
9.मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजनाक्लिक करे
10.श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशनक्लिक करे
11.अटल खेतिहर मजदूर बीमा योजनाक्लिक करे
12.आम  आदमी बिमा योजनाक्लिक करे
12.स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण)क्लिक करे
13.सांसद आदर्श ग्राम योजनाक्लिक करे
14.विधायक आदर्श ग्राम योजनाक्लिक करे
17.पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग की योजनाएक्लिक करे
19.निशक्त जनो के लिए योजनाएक्लिक करे
20..सामाजिक अंकेक्षण-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
21.ग्रामीण विकास योजनाए एवं बैंकक्लिक करे
22.सूचना का अधिकार अधिनियम 2005क्लिक करे
21.जलग्रहण प्रबंधन : उद्देश्य एवं योजनाएक्लिक करे
22.छत्तीसगढ़ में जलग्रहण प्रबंधनक्लिक करे
23.नीरांचल राष्ट्रीय वाटरशेड परियोजनाक्लिक करे

 

पंचायतरी राज व्यवस्था 

1.पंचायती राज व्यवस्थाक्लिक करे
2.73 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 : सार-संक्षेपक्लिक करे
 3.73 वाँ संविधान संशोधन के प्रावधानक्लिक करे
4.छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियमक्लिक करे
5.छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
6.ग्राम सभा से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
6.अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के लिए विशिष्ट उपबंध  से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
7.पंचायत की स्थापना से सम्बंधित प्रश्न -Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
8.पंचायतों के कामकाज -संचालन तथा सम्मिलन की प्रक्रिया से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
10.ग्राम पंचायत के कार्य से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
11.पंचायतों की स्थापना, बजट तथा लेखा से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
12.कराधान और दावों की वसूली से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
13.पंचायतो पर निर्वाचन का संचालन नियंत्रण एवं उपविधियाँ से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
16.शास्तियाँ-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
17.14 वा वित्त आयोग से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
18.15 वाँ वित्त आयोग क्या थाक्लिक करे

 

छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान  

1.छत्तीसगढ़ नामकरणक्लिक करे
2.छत्तीसगढ़ के 36 गढ़क्लिक करे
3.छत्तीसगढ़ राज्य का गठनक्लिक करे
4.छत्तीसगढ़ की भगौलिक स्थिति , क्षेत्र एवं विस्तारक्लिक करे
5.छत्तीसगढ़ का विधायिकाक्लिक करे
6.छत्तीसगढ़  में अब तक के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्रीक्लिक करे
7.छत्तीसगढ़ की न्यायपालिकाक्लिक करे
8.छत्तीसगढ़ के राज्य के प्रतिकक्लिक करे
9.छत्तीसगढ़ के जिलों की सूचिक्लिक करे
10.छत्तीसगढ़ का भूगोलक्लिक करे
11.छत्तीसगढ़ की मिट्टियाक्लिक करे
12.छत्तीसगढ़ की जलवायुक्लिक करे
13.छत्तीसगढ़ का अपवाह तंत्रक्लिक करे
14.छत्तीसगढ़ की परियोजनाएंक्लिक करे
15.छत्तीसगढ़ के जलप्रपातक्लिक करे
16.छत्तीसगढ़ में कृषि सम्बंधित जानकारियाक्लिक करे
17.छत्तीसगढ़ में खनिजक्लिक करे
18.छत्तीसगढ़ में ऊर्जा संसाधनक्लिक करे
19.छत्तीसगढ़ के उद्योगक्लिक करे
20.छत्तीसगढ़ के औधोगिक विकास पार्कक्लिक करे
21.छत्तीसगढ़ के परिवहनक्लिक करे
22.छत्तीसगढ़ की जनगणनाक्लिक करे
23.छत्तीसगढ़ की जनजातियाँक्लिक करे
24.छत्तीसगढ़ के किले महल एवं पर्यटन स्थलक्लिक करे
25.छत्तीसगढ़ के तीज त्यौहारक्लिक करे
26.छत्तीसगढ़ के प्रमुख मेले एवं तिथिक्लिक करे
27.छत्तीसगढ़ के लोक महोत्सवक्लिक करे
28.छत्तीसगढ़ के प्रमुख व्यंजनक्लिक करे
29.छत्तीसगढ़ का लोक नृत्यक्लिक करे 
30.छत्तीसगढ़ का लोक नाट्यक्लिक करे 
31.छत्तीसगढ़ का लोकगीतक्लिक करे
32.छत्तीसगढ़ के लोक खेलक्लिक करे
33.छत्तीसगढ़ का चित्रकलाक्लीक करे 
31.छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्पक्लिक करे
32.छत्तीसगढ़ के आभूषणक्लिक करे
33.छत्तीसगढ़ के प्रमुख चित्रकार एवं शिल्पकारक्लिक करे
34.छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहासक्लिक करे
35.छत्तीसगढ़ का मध्यकालीन इतिहासक्लिक करे
36.छत्तीसगढ़ का आधुनिक इतिहासक्लिक करे
39.छत्तीसगढ़ के आदिवासी विद्रोहक्लिक करे
40.छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलनक्लिक करे
41.छत्तीसगढ़ के असहयोग आंदोलनक्लिक करे
42.छत्तीसगढ़ में  सविनय अवज्ञा आंदोलनक्लिक करे
43.छत्तीसगढ़ में शिक्षाक्लिक करे
44.छत्तीसगढ़ में प्रथमक्लिक करे

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Rajveer Singh
Rajveer Singh

Hello my subscribers my name is Rajveer Singh and I am 30year old and yes I am a student, and I have completed the Bachlore in arts, as well as Masters in arts and yes I am a currently a Internet blogger and a techminded boy and preparing for PSC in chhattisgarh ,India. I am the man who want to spread the knowledge of whole chhattisgarh to all the Chhattisgarh people.

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