आजीविका एवं ग्रामोद्योग | Ajivika avm Gramodhyog

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आजीविका एवं ग्रामोद्योग | Ajivika avm Gramodhyog

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आवश्यकता महत्व 

भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था में जहां पूंजी का अभाव और अत्यधिक बेरोजगारी है, वहां लघु और कुटीर उद्योग, आर्थिक-सामाजिक और राजनीतिक सभी पहलुओं से विकास की आधारशिला हैं. इसके निम्नलिखित महत्व है:-

  • रोजगार सृजन बेकारी एवं गरीबी दूर करने हेतु, ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार हेतु,
  • स्थानीय संसाधनों का दोहन कृषि, खनिज, वन आदि से गाँवों में भरपूर कच्चा माल उपलब्ध है.
  • प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, धन के विकेन्द्रीकरण में सहायक
  • कृषि पर जनसंख्या का दबाव कम करने एवं पलायन को रोकने में सहायक
  • विदेशी मुद्रा प्राप्ति में सहायक व्यक्तित्व एवं कला के विकास में सहायक
  • कम तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता, शीघ्र उत्पादन, औद्योगिक समस्याओं से मुक्ति
  • ग्रामीणों को आर्थिक लाभ, सामाजिक न्याय व राष्ट्रीय विकास में भागीदारी हेतु
  • ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्राप्ति हेतु

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय

  • भारत में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय ग्रामीण उद्योगों द्वारा आजीविका उपलब्ध कराता है।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के अनुसार ग्रामोद्योग में छः भिन्न-भिन्न क्षेत्र शामिल हैं जो निम्नलिखित हैं:

1.कृषि आधारित और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (एबीएफपीआई)

  • ग्रामीण तेल उद्योग
  • सुगंधित तेल
  • शहद और मधुमक्खी पालन
  • पॉम गुड़ और अन्य पॉम उत्पाद
  • फल और सब्जी प्रसंस्करण उद्योग
  • दाल एवं सब्जी प्रसंस्करण उद्योग
  • स्पाईसिस एवं मसाले प्रसंस्करण उद्योग
  • गुड़ और खांडसारी उद्योग
  • लघु वनोपज का संग्रहण
  • बांस, केन और रीड उद्योग
  • जैविक (ऑरगेनिक) डाईंग उद्योग
  • औषधीय पौधों का संग्रहण और प्रसंस्करण उद्योग

2. खनिज आधारित उद्योग (एमबीआई)

  • हस्तनिर्मित पॉटरी, ग्लेज्ड, सिरैमिक पॉटरी, आवास सज्जा पॉटरी
  • आदि पत्थरों की कटाई एवं पॉलिश उद्योग
  • सिरैमिक टाईल उद्योग
  • ग्रेनाईट की कटाई, पॉलिश, पत्थर नक्कशी,
  • ब्रास मैटल और अन्य मैटल क्राफ्ट उद्योग

3. स्वास्थ्य और सौंदर्य उद्योग (डब्ल्यूसीआई)

  • साबुन और तेल समेत स्वास्थ्य और सौंदर्य उद्योग
  • सुगंधित तेल और खुशबू उद्योग
  • कॉस्मैटिक और सौंदर्य उत्पाद उद्योग
  • हेयर आयल और शैंपू, टॉयलेटरिज़ उद्योग तथा मूर्तिकला, आदि
  • नहाने का साबुन उद्योग
  • अगरबत्ती उद्योग

4.हस्तनिर्मित कागज, चमड़ा और प्लास्टिक उद्योग (एचएमपीएलपीआई) 

  • हस्तनिर्मित कागज़ और कागज़ उत्पाद उद्योग
  • पेपर कन्वर्जुन उद्योग
  • चमड़ा उद्योग
  • प्लास्टिक उद्योग
  • कयर उद्योग से इतर प्राकृतिक फाईबर

5.ग्रामीण इंजीनियरिंग और नवीन प्रौद्योगिकी उद्योग (रेंटी)

  • बायो-गैस, गैर-परम्परागत ऊर्जा, जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट उद्योग
  • बढ़ईगिरी और लौहारी उद्योग
  • कृषि उपकरण और औज़ार उद्योग विद्युत और इलैक्ट्रॉनिक उत्पाद उद्योग
  • ड्राइ डेयरी
  • घरेलू घात्विक बरतन और सामग्री विनिर्माण उद्योग

6. सेवा उद्योग

  • लघु व्यवसाय
  • इलैक्ट्रिक्ल और इलैक्ट्रोनिक वस्तुओं का अनुरक्षण और सर्विसिंग
  • फार्म एग्रीगेटर (प्री और पोस्ट फार्मिंग)

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग

  • खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (के. वी. आई. सी.) का गठन वर्ष 1956 में पारित संसद के एक अधिनियम के तहत किया गया था।
  • भारत का खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग MSME मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में

उद्देश्य: आयोग ने मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यापक उद्देश्य निर्धारित किया है:

  • रोजगार प्रदान करने का सामाजिक उद्देश्य.
  • बिक्री योग्य वस्तुओं का उत्पादन करने का आर्थिक उद्देश्य, और
  • जनता में आत्मनिर्भरता एवं सुदृढ़ ग्राम स्वराज की भावना पैदा करना

कार्य:

  • ग्रामीण विकास में लगे अन्य अभिकरणों से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और अन्य ग्रामोद्योग के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाते हुए इसे संबंधित, संगठित तथा कार्यान्वित करना।
  • कारीगरों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन
  • उत्पादकों की आपूर्ति हेतु कच्चा माल एवं औजारों के संग्रह उत्पादों के विपणन हेतु सुविधा इस हेतु विपणन अभिकरणों से संपर्क भी करना
  • उत्पादन तकनीकी एवं औजारों में अनुसंधान को प्रोत्साहन
  • संस्थाओं तथा व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना
  • तकनीकी सूचना के माध्यम से मार्गदर्शन करना।
  • उत्पादों की वास्तविकता एवं गुणवत्ता मानक सुनिश्चित करना।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के दायरे में आने वाले ग्राम उद्योग

खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग ने ग्रामीण उद्योग 7 वृहत वर्गों में वर्गीकृत है, ये हैं

  1. खनिज आधारित उद्योग मिट्टी के बर्तन, चूना पत्थर आधारित उद्योगा।
  2. कृषि आधारित एवं खाद्य उद्योग दालें और अनाज प्रसंस्करण उद्योग,गुड़और खांडसारी उद्योग, पामगुड़ उद्योग, फल व सब्जी प्रसंस्करण उद्योग, ग्रामीण तेल उद्योग
  3. पॉलीमर एवं रसायन आधारित उद्योग: चमड़ा उद्योग, अखाद्य तेल और साबुन उद्योग,दियासलाई उद्योग, प्लास्टिक उद्योग
  4. वन आधारित उद्योग : औषधीय पौधे उद्योग, मधुमक्खी पालन उद्योग, लघु वन आधारित उद्योग
  5. हस्त निर्मित कागज और फाइबर उद्योग- हाथ से बने कागज उद्योग, फाइबर उद्योग
  6. ग्रामीण इंजीनियरिंग और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग- गैर पारंपरिक ऊर्जा, बढ़ईगीरी और लोहार, इलेक्ट्रानिक्स
  7. सेवा उद्योग

ग्रामोद्योग की समस्याएं

  • कच्चे माल की समस्या
  • अविकसित एवं अकुशल तकनीक
  • वित्त की समस्या
  • विपणन, विज्ञापन एवं बाजार की समस्या
  • बड़े उद्योगों से प्रतिस्पर्धा
  • सूचना व परामर्शदात्री संस्थाओं का अभाव
  • परिवहन सुविधाओं का अभाव
  • कुशल प्रशासनिक व्यवस्था का अभाव
  • ऊंचे कर

ग्रामोद्योग के विकास के लिए सरकारी प्रयास 

  • 1947-48 कॉटेज इण्डस्ट्री बोर्ड की स्थापना
  • 1954-लघु उद्योग विकास संगठन
  • 1955-राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम
  • 1957-खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग
  • खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) की स्थापना 1956 के अधिनियम के अंतर्गत की गई थी। यह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन आता है।
  • सिड्बी SIDBI- 2 अप्रैल 1990 को भारतीय औद्योगिक विकास बैंक की सहयोगी संस्था के रूप में लघु उद्योगों की आर्थिक सहायता के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक स्थापित किया गया, मुख्यालय लखनऊ में है।
  • राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (NSICL) सार्वजनिक क्षेत्र का एक उद्यम है, जिसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा देश में उद्यमों के विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
  • छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का गठन, छत्तीसगढ़ राज्य में खादी तथा विभिन्न ग्रामोद्योगों के विकास के लिए दिनांक 20.07.2001 के आदेश से किया गया।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

ग्रामोद्योग इकाई स्थापित करने के लिये रूपये 25.00 लाख तक लागत की परियोजनायें स्वीकार होती है

उद्देश्य : उद्यमिता एवं ग्रामोद्योग को बढ़ावा देना, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना

परियोजना आकार : विनिर्माण क्षेत्र के लिए रू. 25 लाख अधिकतम और सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख।

निजी अंशदान : 10% सामान्य वर्ग के पुरुष हितग्राही को देना होता है, तथा 5% SC/ST/OBC एवं सामान्य वर्ग के महिला हितग्राही को विनियोजन करना होता है।

मार्जिन मनी अनुदान : बोर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जो निम्नानुसार है
25% सामान्य वर्ग के पुरूष हितग्राही को के
35% अन्य वर्गों एवं सामान्य वर्ग के महिला हितग्राही को

ऋण राशि : 65% योजना आकार का बैंक ऋण के रूप में होता है, जिसे 7 वर्षों में आसान किश्तों में ब्याज सहित वापस करना होता है।

शैक्षणिक योग्यता : विनिर्माण क्षेत्र के लिए रू. 10 लाख और सेवा क्षेत्र के लिए रू. , 5 लाख से अधिक की परियोजना हेतु न्यूनतम 8वीं उत्तीर्ण ।

नोडल अभिकरण : खादी और ग्रामोद्योग आयोग (भारत सरकार)

प्रशिक्षण : 2 सप्ताह का उद्यमिता विकास कार्यक्रम प्रशिक्षण

विपणन सहायता: इन इकाइयों के उत्पादों के लिए विपणन सहायता के रूप में उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनियां, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आदि आयोजित किए जाएंगे।

 

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आजीविका

1.अर्थव्यस्था में कृषि की भूमिकाक्लिक करे
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ग्रामीण विकास की फ्लैगशिप योजनाओ की जानकारी

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2.महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की विशेषताएंक्लिक करे
3.सुराजी गांव योजनाक्लिक करे
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5.इंदिरा आवास योजना-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
6.प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)क्लिक करे
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9.मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजनाक्लिक करे
10.श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशनक्लिक करे
11.अटल खेतिहर मजदूर बीमा योजनाक्लिक करे
12.आम  आदमी बिमा योजनाक्लिक करे
12.स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण)क्लिक करे
13.सांसद आदर्श ग्राम योजनाक्लिक करे
14.विधायक आदर्श ग्राम योजनाक्लिक करे
17.पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग की योजनाएक्लिक करे
19.निशक्त जनो के लिए योजनाएक्लिक करे
20..सामाजिक अंकेक्षण-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
21.ग्रामीण विकास योजनाए एवं बैंकक्लिक करे
22.सूचना का अधिकार अधिनियम 2005क्लिक करे
21.जलग्रहण प्रबंधन : उद्देश्य एवं योजनाएक्लिक करे
22.छत्तीसगढ़ में जलग्रहण प्रबंधनक्लिक करे
23.नीरांचल राष्ट्रीय वाटरशेड परियोजनाक्लिक करे

 

पंचायतरी राज व्यवस्था 

1.पंचायती राज व्यवस्थाक्लिक करे
2.73 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 : सार-संक्षेपक्लिक करे
 3.73 वाँ संविधान संशोधन के प्रावधानक्लिक करे
4.छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियमक्लिक करे
5.छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
6.ग्राम सभा से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
6.अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के लिए विशिष्ट उपबंध  से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
7.पंचायत की स्थापना से सम्बंधित प्रश्न -Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
8.पंचायतों के कामकाज -संचालन तथा सम्मिलन की प्रक्रिया से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
10.ग्राम पंचायत के कार्य से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
11.पंचायतों की स्थापना, बजट तथा लेखा से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
12.कराधान और दावों की वसूली से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
13.पंचायतो पर निर्वाचन का संचालन नियंत्रण एवं उपविधियाँ से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
16.शास्तियाँ-Cg Vyapam ADEO Notes | Cg vyapam ADEO Book pdf Downloadक्लिक करे
17.14 वा वित्त आयोग से सम्बंधित प्रश्नक्लिक करे
18.15 वाँ वित्त आयोग क्या थाक्लिक करे

 

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