( ͡° ͜ʖ ͡°) बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ Bastar Dussehra Chhattisgarh

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मेरे प्यारे दोस्तों आज हम आपको “बस्तर का दशहरा” की जानकारी देने वाले है। यहाँ जानकारी आपको छत्तीसगढ़ के किसी भी परीक्षा में पूछे जा सकते है , या आप किसी चीज के बारे में रिसर्च करना चाहते है, या आप फिर छत्तीसगढ़ में घूमना चाहते है तो यहाँ जानकारी आपके बहुत ही काम आएगी। … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) फणिनाग वंश छत्तीसगढ़ | Farinag Vansh Chhattisgarh | Farinag Dynasty Chhattisgarh

फणिनाग वंश ( कवर्धा ) (9 वीं से 14 वीं शताब्दी तक ) संस्थापक > अहिराज सिंह राजधानी > पचराही क्षेत्र > कवर्धा प्रसिद्ध राजा:- गोपाल देव :- इन्होंने 1089 ई. (11 वीं सदी) में भोरमदेव मंदिर बनवाया था। यह खजुराहों के मंदिर से प्रेरित है, इसलिए इसे छ.ग. का खजुराहों कहते है। यह नागर … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ की चित्रकारी चित्रकला Chhattisgarh ki Chitrakari Chitrakala

छत्तीसगढ़ की चित्रकारी चित्रकला चित्रकारी/चित्रकला  विस्तृत जानकारी  चौक पुरना गोबर की लिपाई के ऊपर चावल के आटे से विभिन्न प्रकार से चित्र बनाना। हरितालिका हरितालिका शिव-पार्वती की पूजा का पर्व है। हरितालिका का अंकन तीज के दिन बनाया जाता है। नोह डेरा नये घर प्रवेश के समय महिलाओं द्वारा दीवारों पर मिट्टी से मढ़े हुए … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ जनजाति लोकनृत्य लोकनाट्य | Chhattisgarh Janjati Loknritya Loknatya

छत्तीसगढ़ जनजाति लोकनृत्य मांदरी नृत्य : (मुड़िया) यह मुढ़िया जनजाति द्वारा किया जाता है। यह गीत विहीन नृत्य है (वाय यंत्र-मांदर) घोटुल क्या है :- 12 वर्ष से कम उम्र के अविवाहित लड़का व लड़कियों को सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक परम्परा से सिंचित करना । महिलाओं को मोटियारिन व मुखिया को बेलोसा कहते है। पुरूषो … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ के त्यौहार Chhattisgarh के Tyohar Festivals of Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के त्यौहार Chhattisgarh Ke Tyohar Festivals of Chhattisgarh छत्तीसगढ़ के त्यौहार को समझने जानने के लिए हमें सबसे पहले जानना होगा की पक्ष क्या होते है ? तो भाई हमारे हिन्दू धर्म में पक्ष दो प्रकार के होते है , पहला होता है कृष्ण पक्ष इस दिन अमावस्या होता है , और दूसरा होता … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ का मध्यकालीन इतिहास | Chhattisgarh Ka Madhyakalin Itihas | Medieval History of Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ का मध्यकालीन इतिहास सुनो बाबू ! इससे पहले हमने आपको छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास के बारे में बताया था , जो तुम्हे बहुत पसंद आया था , तो तुम्हारी याद में मैं फिर से छत्तीसगढ़ के मध्यकालीन इतिहास के बारे में लिखने  जा रहा हु , इसे  तुम अपना प्यार  जरूर देना , और … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ का लोकगीत विवाह गीत | Chhattisgarh ka Lokgeet Vivah Geet

छत्तीसगढ़ का लोकगीत और विवाह गीत लोक कलाएं संस्कृति की संवाहक होती है। लोक कलाओं में किसी घटना के माध्यम से इतिहास व संस्कृति के दर्शन होते है । लोक कलाएँ लोक मानस की मूल भावनाओं को प्रदर्शित करता है। संगीत शिखर पुरुष विष्णु कृष्ण जोशी को कहते है। लोक संस्कृति की जागरण का प्रतीक … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ का लोकनृत्य लोकनाट्य | Chhattisgarh Ka Loknritya Loknatya

छत्तीसगढ़ का लोकनाट्य  छत्तीसगढ़ का लोक नाट्य छ.ग. मे सर्वप्रथम नुक्कड़ नाटक की परम्परा विमु कुमार ने शुरू किया लोक नाट्य की भाषा छत्तीसगढ़ी होती है। लोक नाट्य के सभी पात्र पुरूष होते है। लोक नाट्य मंचन से होता है। नाचा नाचा में गीत, संगीत, नृत्य का संगम होता है। नाचा में अलिखित कथा प्रसंगों … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) छत्तीसगढ़ के देवी देवता | Chhattisgarh Ke Devi Devta

छत्तीसगढ़ के देवी-देवता चूरापाट :- बेर वृक्ष में चूड़ी-फुंदरी बाँधा जाता है। ठाकुर देव :- प्रत्येक गाँव में ग्राम देवता का प्रतीक है। संहाड़ा देव :- 1.बैल आकार की मूर्ति जिसकी पूजा की जाती है। 2.प्रथम बार जनी गाय व भैंस का दूध चढ़ाया जाता है। आंगन पाट :- रास्ते में स्थापित काली मूर्ति जिस … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) सोमवंश छत्तीसगढ़ | Somvansh Chhattisgarh | Som Dynasty Chhattisgarh

सोमवंश ( कांकेर ) (1191 से 1320 तक ) संस्थापक > सिंहराज राजधानी > कांकेर प्रसिद्ध शासक सिंहराज व्याघ्रराज वोप देव ⇓ 1.कृष्णराज   2.सोम देव > पम्पा देव ⇓ जैतराज ⇓ सोम चंद्र ⇓ भानु देव ⇓ चन्द्रसेन देव (अंतिक शासक) कर्णराज (कर्णदेव) का सिहावा अभिलेख प्राप्त हुआ है। भानुदेव का कांकेर लेख प्राप्त हुआ … Read more

( ͡° ͜ʖ ͡°) काकतीय वंश छत्तीसगढ़ | Kaktiya Vansh Chhattisgarh | Kaktiya Dynasty Chhattisgarh

काकतीय वंश (1324 से 1966 तक) संस्थापक > अन्नदेव राजधानी > मंधोता अन्नमदेव (1324-1369) :- 1324 में काकतीय वंश की स्थापना मंधोता में किया। चक्रकोट से राजधानी मंधोता ले गया। इन्होंने तराला ग्राम व शंकिनी-डंकिनी नदी के संगम पर माँ दंतेश्वरी मंदिर का निर्माण करवाया। इसे बस्तर में चालकी वंश कहते है। इसने विवाह चंदेल … Read more