[2022] Chhattisgarh Ki Janjatiya | छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ

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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya
छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya

छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke adiwasi  इन सभी की जानकारी देने वाले है तो , इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा , और हम एक चीज और कह देते है की इससे ज्यादा पढ़ने के लिए डाटा आपको और कही नहीं मिलेगा ।

छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya

छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति अपने अनूठे तरीकों और साधनों के साथ काफी विशाल और विविध है। संस्कृति की अपनी विशिष्टता है। यदि आप विभिन्न आदिवासी संस्कृतियों और उनके विभिन्न तरीकों और साधनों के बारे में जानने के प्रति झुकाव रखते हैं, तो छत्तीसगढ़ में रहने का सही स्थान है और छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति का अध्ययन काफी दिलचस्प होगा।

यदि आप छत्तीसगढ़, भारत में जनजातीय संस्कृति के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप दंतेवाड़ा में गामावाड़ा के स्मृति स्तंभ, बस्तर में मारिया मेंहिर और बस्तर में मानव विज्ञान संग्रहालय का दौरा कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध जनजातियाँ गोंड जनजाति, भुंजिया जनजाति, बैगा जनजाति, बिसनहोर मारिया जनजाति, पारघी जनजाति, मुरिया जनजाति, हल्बा जनजाति, भतरा जनजाति, पारबे जनजाति, धुर्वा जनजाति, मुरिया जनजाति, डंडामी मरिया जनजाति, डोरला जनजाति, धनला जनजाति, कोल जनजाति, कोरवा जनजाति, राजगोंड जनजाति, कावार जनजाति, भैयाना जनजाति, बिंझवार जनजाति, सावरा जनजाति, मांजी जनजाति, भयना जनजाति, कमर जनजाति, मुंडा जनजाति और अबुझमारिया जनजाति। ( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति के बारे में बात करने के लिए, प्रत्येक जनजाति का अपना समृद्ध इतिहास और संस्कृति है। उनके नृत्य, संगीत, पोशाक और भोजन के विभिन्न रूप एक-दूसरे से भिन्न हैं।एक जनजाति के प्रमुख को ‘सरपंच’ कहा जाता है, जो विवादों और अन्य महत्वपूर्ण मामलों के दौरान मुख्य सलाहकार और मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है।

मुख्य को 5 सलाहकारों की एक टीम द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जिनमें से प्रत्येक को पंच कहा जाता है। जनजातियाँ अपने सरपंच और 5 पंचों का बहुत सम्मान करती हैं। जनजातियों के भीतर बहुत अधिक एकता है।

आमतौर पर जनजाति के भीतर शादियां होती हैं। मृतकों को या तो दफनाया जाता है या अंतिम संस्कार किया जाता है। दाह संस्कार में महंगे बहु-अनुष्ठानों के कारण, यह बहुत लोकप्रिय नहीं है। लेकिन महत्वपूर्ण बड़ों का हमेशा अंतिम संस्कार किया जाता है।.( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

छत्तीसगढ़ जनजाति परमपरा से सम्बंधित कुछ मूल बाते

  • भारत की कुल जनसँख्या का 8.6% जनजाति है पुरे भारत में ।
  • पुरे भारत की सबसे बड़ी जनजाति समूह  गोंड है ।
भारत में सर्वाधिक STभारत में कम ST
1.मध्यप्रदेश 1.पंजाब 
2.झारखण्ड  
3.ओड़िशा  
4.छत्तीसगढ़  

 

% में अधिक जनजाति % में कम  जनजाति 
1.मिजोरम 1.पंजाब 

प्रजाति के आधार पर :-
  • ओड़िसा में कुल 62 प्रजातियां पाई जाती है ।
  • छत्तीसगढ़  में कुल 42 प्रजातियां पाई जाती है ।

छत्तीसगढ़ में जनजातीय भाषा 

  • छत्तीसगढ़ में कुल 162 भाषा बोली जाती है ।
  • छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाएँ :-
  • 1.छत्तीसगढ़ी ( प्राचीन काल में कोसली )  2.गोंडी  3.हल्बी( सर्वाधिक जनजाति बोली ) 4.कुरुख 
  • छत्तीसगढ़ी भाषा को सरकारी भाषा बनाए के लिए भाषा आयोग का गठन किया गया है ।
  • रामायण का गोंडी भाषा में अनुवाद महादेव आयतुराम ने किया था ।
  • खेलकूद को गोंडी भाषा में कर्सना कहते है ।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

छत्तीसगढ़ में जनजातीय :-

  • कुल जनसँख्या का 30.6% जनजाति है ⇒ 78 लाख 
  • 30.6% के साथ सबसे बड़ा जाती ⇒ जनजाति 
  • छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जनजाति समूह ⇒ गोंड ( सबसे छोटा- बैगा )
  • छत्तीसगढ़ का सबसे पिछड़ा जनजाति ⇒ अबुझमाड़िया 
  • आर्थिक दृष्टि से विकसित  जनजाति⇒ हल्बा
  • छत्तीसगढ़ में सबसे साक्षर जनजाति ⇒ उराव 
  • सांस्कृतिक रूप में समृद्ध जनजाति ⇒ मुड़िया 
  • सामाजिक दृष्टि से आगे ⇒ भतरा 

जनजाति वर्गीकरण :-

  1. गोंड :- 56%
  2. हल्बा :- 5%
  3. उराव :- 3%
  4. सवार :- 3%

जिलों में जनजाति :-

  • सर्वाधिक ⇒ जशपुर 
  • न्यूनतम ⇒ बेमेतरा 
  • % में सर्वाधिक ⇒ सुकमा 
  • % में न्यूनतम ⇒ रायपुर 

क्या आप जानते है ?

अनुसूची 5 के त्तहत्त राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के निम्न जनजातियों को विशेष पिछड़ी जनजाति घोसित किया था ।

  1. अभुझमाड़िया 
  2. कमर 
  3. पहाड़ी कोरवा 
  4. बैगा 
  5. बिरहोर 
  6. भुंजिया – इन्हे राज्य सरकार ने किया था ।
  7. पंडो – इन्हे राज्य सरकार ने किया था ।

छत्तीसगढ़ जनजातियों के देवी देवता 

क्रजनजाति छत्तीसगढ़ी देवी देवता 
1.गोंड दूल्हा देव , सलना देवी , मेघनाथ 
2.बैगा बूढ़ा देव , ठाकुर देव( साजा वृक्ष ) 
3.उराव सरना देवी , धर्मेश देव ( साल वृक्ष )
4.मुड़िया लिंगोपेन ( घोटुल ) 
5.भतरा शिकार देवी ( माटी देव )
6.बिंझवार विंध्यवासिनी देवी , 12 भाई बेटकर
7.कमर छोटे भाई , बड़े भाई 
8.कवर सगरा खंड 
9.कोरवा खुड़िया रानी , गोरिया देव 
10.येरुंग पेंग 7 देवतावो का पूजा 
11.सारंग पेंग 6 देवतावो का पूजा 
12.सयुंग पेंग 5 देवतावो का पूजा ( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
13.नालूंग  पेंग 4 देवतावो का पूजा 
14.करम सैनी कर्मा लोक नृत्य की इष्ट देवी 
15.शिव हर तालिका का देवता 
16.आंगा देव मंडई का देवता शिव 
17.दंतेश्वरी देवी दशहरा  की देवी 
18.कोरकू सिगरी देवी 
19.परधान परसा पेन 
20.खड़िया बंदा देव 
21.भरिया बाघेश्वर देव , भीमसेन देव 
22.परजा / धुरवा निशान मुंडा 
23.गरबा बूढी देवी , ठकुरानी माता 

 

छत्तीसगढ़ जनजाति युवा गृह 

घोटुल ⇒ मुड़िया जनजाति का 
धूम कुरिया ⇒ उरॉव जनजाति का  
गीतोआना ⇒ बिरहोर जनजाति का 
घसर वसा ⇒ भुइया जनजाति का 
रंग बंग ⇒ भरिया जनजाति का 
धांगा बक्सर ⇒ परजा / धुरवा जनजाति का 

छत्तीसगढ़ जनजातियों का पेय पदार्थ 

गोंड ⇒ पेज पीते है ।
बैगा ⇒ ताड़ी  ( ताड व छिंद पेड़  से ) पीते है।
कोरवा ⇒ हंडिया पीते है ।
मुरिया / माड़िया ⇒  सल्फी ( ताड पेड़ से ) पीते है। 
उराव ⇒ कोसमा पीते है।

 

जनजातियों की कृषि पद्धत्ति 

जनजातियों की कृषि को झूम कृषि ( स्थानांतरित कृषि) कहते है । दो तीन वर्ष बाद दूसरे खेत में फसल उगते है ।
गोंड ⇒ धारिया पद्धत्ति 
बैगा ⇒ बेवर पद्धत्ति  
अभुझमाड़िया ⇒ पेद्दा  पद्धत्ति 
कमार/भतरा ⇒ दाहिया पद्धत्ति 
कोरवा ⇒ देवारी पद्धत्ति 
परजा/धुरवा ⇒  डोंगर , घड़ा , बेडा  पद्धत्ति 
भरिया ⇒ दाहिया पद्धत्ति
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छत्तीसगढ़ जनजातियों के कार्य 

क्रजनजाति जनजातियों के कार्य 
1.बैगा झाड़-फुक, मेडिसिन मन ऑफ़ बैगा ( पुजारी )   
2.हल्बा कृषि कार्य करते है .
3.भतरा सेवक का कार्य करते है .
4.कमार बांस शिल्प कला का कार्य करते है ।
5.खैरवार कत्था  का कार्य करते है ।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
6.कोलकोयला का कार्य करते है ।
7.कंदरा बांस से घरेलु सामान बनाते है । जैसे ( झउवा, टुकनी )
8.कवर सैन्य का कार्य करते है ( कौरौवो के वंसज )
9.पारधी पक्षी का शिकार करते है । ( मुख्यतः काली रंग की पक्षी )
10.अगरिया लौह शिल्प का कार्य करते है ।
11.कोरकू भूमि खोदने का कार्य करते है ।
12.खड़िया पालकी ढ़ोने का कार्य करते है ।

छत्तीसगढ़ के जनजातियों के त्यौहार 

क्रत्यौहार/पर्व  जनजाति महत्वा
1.आमा खाई गोंड आम फलने के बाद पूजा होता है ।
2.नावा खाई गोंड नया फसल आने के बाद ( भादो पूर्णिमा में )
3.माटी त्यौहार गोंड पृथ्वी देवी की पूजा होती है ।
4.मेघनाथ त्यौहार गोंड फाल्गुन माह में होता है ।
5.आमा   खाई परजा , धुरवा आम पकने के बाद किया जाता है ।
6.मंडई त्यौहार मुड़िया/माड़िया आंगादेव का पूजा किया जाता है ।
7.दियारी त्यौहार माड़िया पशुओ को खाना दिया जाता है ।
8.सरहुल त्यौहार उराव साल वृक्ष में फूल आने पर किया जाता है ।
9.धनकुल त्यौहार हल्बा , भतरा तीजा में होता है ।
10.कोरा , घेरसा , बीज बोनी कोरवा कृषि के समय होता है ।
11.रसनवा बैगा सभी पर्व में किया जाता है ।
12.अरवा तीज सभी जनजाति अविवाहित लड़कियों द्वारा बैशाख माह में होता है ।

बस्तर का दशहरा

यह छत्तीसगढ़ का अद्वितीय सांस्कृतिक गुण है। राज्य के स्थानीय लोगों द्वारा पर्याप्त उत्साह के साथ मनाया जाता है, दशहरा का त्योहार देवी दंतेश्वरी की सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है। दशहरा के दौरान, बस्तर के निवासी जगदलपुर के दंतेश्वरी मंदिर में विशेष पूजा समारोह आयोजित करते हैं।

ऐसा माना जाता है कि महाराजा पुरुषोत्तम देव ने पहली बार दशहरे के त्योहार की शुरुआत 15 वीं शताब्दी में की थी। इस । इस अवसर के पूरे दस दिनों के दौरान, बस्तर के सम्मानित राज परिवार पूजा सत्रों की व्यवस्था करते हैं जिसमें देवी दंतेश्वरी के प्राचीन हथियारों को दिव्य तत्वों के रूप में माना जाता है।

बस्तर दशहरा के निहित लक्षणों में से एक यह है कि राज्य का नियंत्रण औपचारिक रूप से जमींदार और समान महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को गवाह के रूप में रखते हुए दीवान को हस्तांतरित किया जाता है।

कुंवर अमावस्या दशहरा का पहला दिन है। पहले दिन की रात नियंत्रण का प्रथागत हस्तांतरण होता है। इस समारोह की एक रहस्यमय विशेषता यह है कि दीवान को सत्ता सौंपने से पहले, माना जाता है कि आध्यात्मिक शक्तियों को रखने वाली लड़की से अनुमति मांगी जाती है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

इस लड़की को लकड़ी की तलवार के साथ देखा जाता है और युद्ध जैसी मुद्रा में खड़ा किया जाता है। दशहरे के दूसरे दिन को प्रतिपदा कहा जाता है जिसके बाद आरती और सलामी होती है।

नौवें दिन, बस्तर के राजा देवी दंतेश्वरी का स्वागत करते हैं जो डोली या पालकी में शहर के प्रवेश द्वार पर आती हैं। त्योहार के दसवें दिन को दशहरा कहा जाता है जब राजा एक दरबार का आयोजन करते हैं जहां लोग आते हैं और अपने अनुरोध पेश करते हैं।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

यहाँ त्यौहार बस्तर के हिन्दुओ की आस्था का प्रतिक है जिसका डंका पूरी दुनिया में बजता है , इसे सभी हिन्दू चाहे वो ब्राह्मण हो या दलित या आदिवासी सभी हिन्दू इसे धूमधाम से मनाता है।

जनजाति विशेषताएं:-

  • छत्तीसगढ़ की जनजाति पितृ  सत्तामक है ।
  • छत्तीसगढ़ की जनजाति गोत्र ( गण चिन्हो , टोटम ) में बाटे होते है ।
  • गोत्र का विभाजन विब्भिन देवी देवताओ के हिसाब से किया जाता है ।
  • टेबू – धार्मिक निषेध है मत करो .
  • टेबू – अधिवासी समाज का यह अलिखित निषेधात्मक  कानून है ।
  • छत्तीसगढ़ में भूत  को मिर्चक कहते है ।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • जनजातियों का समाज संयुक्त समाज होता है ।
  • बच्चो का नाम प्रकृति पर रखा जाता है ।
  • वृक्षों को जनजातीय समाज में माता पिता के समतुल्य मन जाता है ।

बोंगवाद :-

  • अदृश्य शक्ति  पर विश्वास किया जाता है ।
  • यहाँ मंत्र तंत्र का प्रयोग करते है ।
  • बोंगवाद को पवित्र आत्मा मन जाता है ।
  • बोंगवाद को बुराई पर अच्छाई की जीत मन जाता है ।

मृतक संस्कार :-

  • जनजातियों में मृतक को दफ़नाने व जलाने दोनों का प्रथा प्रचलित है ।
  • गोदो में चेचक व कोढ़ से मरने वालो को दफनाया जाता है ।
  • गोदो में पांच  वर्ष  से कम   उम्र  के बच्चे  को मृत्युपरांत  महुवा  वृक्ष के निचे  दफनाया जाता  है ।
  • मृतक गर्भवती महिला होने पर मृतक संस्कार शमशान घाट से दूर किया जाता है ।
  • मृतक संस्कार को कोरवा जनजाति नवाधावी कहते है ।

गोदना :-

  • गोदना को चिरसंगिनी आभूषण मन जाता है ।
  • गोदना जन जातियों का प्रमुख श्रृंगार है ।
  • गोदना के बिना  स्त्रियों का जीवन  अधूरा  माना जाता   है ।
  • महिलाओ को विवाह  के पूर्वा गोदना गोंडवाना  अनिवार्य है ।
  • घोटुल सदस्यों में गोदना श्रृंगार अधिक किया जाता है ।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • बैगा विश्व की सर्वाधिक गोदना प्रिय  जनजाति है ।
  • माना जाता है की गोदना मृत्यु  पश्चात्  साथ में जाता है ।
  • गोदान गोदवाने से स्वर्गो में स्थान प्राप्त होता है ।
  • सुन्दर गोदना को ससुराल  में सौभाग्यशाली मन जाता है ।
  • गोदना के कारण महिलाओ को बाड़ी व गठिया रोग  नहीं होता है ।
  • देवा , बंजारा , कंजर लोग गोदना गोदने का कार्य करते है ।
  • कमार जनजाति सर्वाधिक गोदना  गोदवाने वाला जाती है ।

वाद्य यन्त्र :-

  • जनजातियों का 4 वाद्य यत्र होता है :- 1.तत वाद्य यन्त्र 2.वितत वाद्य यन्त्र  3.धन वाद्य यन्त्र  4.सुषिर वाद्य यन्त्र 
  • माँ दंतेश्वरी  मंदिर में पूजा के समय रायगढी वाद्ययंत्र बजाय जाता है ।
  • रायगढी पीतल का बना डमरू आकर का होता है ।
  • रायगढी के दोनों तरफ बकरे का चमड़ा गधा होता है ।
  • माँ दंतेश्वरी  मंदिर में पूजा के समाया नेफी , करतल व निरकाहली सुषिर बजाय जाता है ।
  • घंटी को गोंडी में मुयांग कहते है ।
  • मंजीरे नुमा वाद्ययंत्र को चित कुल कहते है ।
  • तिरडुड़ी  धन वाद्ययंत्र को मंदरी नृत्य  में महिलाये  बजती है ।
  • बिरिया ढोल का प्रयोग मंदरी नृत्य के दौरान किया जाता है ।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

शिल्पकला :-

  • धरवा कला  शिल्प बस्तर के धरवा जनजाति द्वारा बनाई जाती है ।
  • भ्रष्ट मोम पद्धति का प्रयोग धरवा कला में होता है ।
  • इस  कला  में  धरवा, झारा, मलार,  कसर अदि जनजाति दक्ष  है ।
  • ढोकरा  कला  में मोम व् क्षय संयोजन  पद्धति से मूर्ति  निर्मित   की जाती है ।
  • भित्ति शिल्प में मिटटी व रंगो से घर  के दिवार को सजाया जाता है ।
  • काष्ठ कला में कौड़ी का प्रयोग करके शिल्प किया जाता है । 1.मिटटी शिल्प  2.कंघी शिल्प  3.बांस शिल्प  4.कोसा शिल्प  5.पत्ता शिल्प अदि शिल्प प्रचलित है ।
  • शिल्प गुरु राष्ट्रीय पुरस्कार तीन लोगो को मिला है ,  1.जयदेव बघेल   2.सोना बाई   3.गोविन्द राम झारा 

जनजातीय विवाह 

  • जनजातीय गोत्र बहिर्विवाह  का पालन करते है ।
  • एकल विवाह ( मोनोगेमि ) बहुविवाह ( पोलोगेमी ) दोनों मान्य है ।
  • सह गोत्री विवाह नहीं किया जाता है ।
क्रविवाह जनजाति महत्वा 
1.पयसोतूर/ अपहरण गोंड लड़कियों  का अपहरण करके विवाह किया जाता है ।
2.लमसेन सेवा चारधिया गोंड लड़का  पूरा  उम्र  लड़की के घर में गुजारता  है ।
3.पठौनी विवाह गोंड लड़की बारात  लेकर  लड़का के घर जाति है ।
4.दूध लौटावा विवाह गोंड ममेरे फुफेरे  के बच्चो  का विवाह होता है ।
5.भगेली विवाह माड़िया लड़की प्रेमी के घर रात में आकर रहने लगती   है ।
6.तीर विवाह बिंझवार लड़की का विवाह तीर के साथ किया जाता है ।
7.गन्धर्वा विवाह/ हरिबोल परजा/ धुरवा   परजा धुरवा का यहाँ प्रेम विवाह है ।
8.हठ विवाह सभी  जनजाति सभी जनजाति लड़की  प्रेमी के घर में घुस जाति है ।
9.पैठुल विवाह बैगा एक प्रकार से प्रेम  विवाह है । 
10.ढुकु विवाह कोरवा एक प्रकार से प्रेम  विवाह है ।
11.क्रय विवाहसभी  जनजाति लड़के  को उपहार  देकर  विवाह होता है ।
12.उर/ ऊना विवाहसभी  जनजाति विधवा  विवाह होता है ।
13.पाटो विवाहसभी  जनजाति पुनर्विवाह होता है ।
14.गुरावत/विनिमय सभी  जनजाति भाई बहनो  के बीच विनिमय होता है ।
15.पोता विवाह कोरकू अपने ही जाति में विवाह करना 

जनजाति गीत 

क्रगीत जानकारी
1.छेरता गीत बस्तर अंचल छेर-छेरा (पौष पूर्णिमा) पर्व पर लड़को द्वारा किया जाता है  ।
2.तारा गीत बस्तर अंचल छेर-छेरा (पौष पूर्णिमा) पर्व पर लड़कियों  द्वारा किया जाता है  ।
3.रीलो गीत मुड़िया जनजाति द्वारा विवाह के अवसर पर गया जाता है ।
4.कोटनी गीत मुड़िया जनजाति को छोड़कर अन्य जनजाति द्वारा विवाह के अवसर पर गाया जाता है ।
5.करमा गीत कर्म देव  को  प्रसन्न  व  नै  फसल की ख़ुशी  में जनजाति द्वारा गया जाता है . 
6.चैत्य परब गीत बस्तर अंचल में चैत्र माह में गाया जाने वाला श्रीनगर प्रधान गीत है 
7.लेजा  गीत हल्बी जनजाति द्वारा किसी भी अवसर में गाया जाता है ।
8.धनकुल/जगार गीत  

हल्बी, भतरी, जनजाति द्वारा भादो, तीज  में गाया  जाता है ।  .

यहाँ हल्बी भाषा में होता है ।

9.भैना गीत  यहाँ भैना जनजाति द्वारा तंत्र मंत्र पर आधारित गीत है ।

जनजाति लोक नाट्य 

भतरा लोक नाट्य :-

  • भतरा जनजाति द्वारा किया जाता है (ग्रीष्म ऋतु में )
  • इसे उडीया नाट्य भी कहते हैं।
  • यह पौराणिक गाथा पर आधारित होता है।
  • इसमें मंचन होता है (युद्ध प्रधान)
  • इसमें पुरूष लोग महिला जैसे श्रृंगार करके मंचन करते हैं (सारे पुरूष होते है)
  • इसमें 20 से 40 कलाकार होते है।

मावोपाटा लोकनाट्य:-

  • यह मुड़िया जनजाति का शिकार नाट्य हैं।
  • इसमें टिमकी, कोटाइका, रस्सी का प्रयोग किया जाता है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • अंत में शिकार का भोजन बनाया जाता है।

खम्ब स्वांग लोक नाट्य :-

  • कोरकू जनजाति द्वारा क्वांर से कार्तिक माह तक मेघनाथ खम्ब के चारों ओर मंचन किया जाता है।
  • इसमें रावण पुत्र मेघनाथ की पूजा होती है।
  • कोरकू जनजाति मेघनाथ को अपना रक्षक मानते है।

दहिकांदो लोक नाट्य :-

  • बस्तर अंचल में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर किया जाता है।
  • यह करमा व रासलीला का मिश्रित रूप है।

कोकटी लोक नाट्य :-

  • जात्रा नृत्य के दौरान कोकटी-घोड़ा लोक नाट्य प्रचलित है।
  • इसे कोकटी-घोडा एक दूसरे से युद्ध करते है।
  • इसमें घोड़ा को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

नकटा-नकटी लोक नाट्य :-

  • छेरता गीत के दौरान नकटा नकटी लोक नाट्य प्रचलित हैं।
  • लड़का नकटा व लड़की नकटी की भूमिका निभाते हैं।

चीते मुखौटा लोक नाट्य :-

  • यह अबुझमाड़िया जनजाति द्वारा किया जाता है।

साम्भर लोक नाट्य :-

  • इसमें एक लड़का चील, एक लड़की मुर्गी बनता है।
  • शेष लड़के मुर्गी को घेरकर चील से रक्षा करते हैं।

पुत्तलिका लोक नाट्य :-

  • यह तारा गीत के दौरान लड़कियाँ घास से बनी पुतली को टोकरी में रख कर नाट्य करते हैं।

जनजाति लोकनृत्य

मांदरी नृत्य : (मुड़िया)

  • यह मुढ़िया जनजाति द्वारा किया जाता है।
  • यह गीत विहीन नृत्य है (वाय यंत्र-मांदर)

घोटुल क्या है :-

  • 12 वर्ष से कम उम्र के अविवाहित लड़का व लड़कियों को सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक परम्परा से सिंचित करना ।
  • महिलाओं को मोटियारिन व मुखिया को बेलोसा कहते है।
  • पुरूषो को चेलिस व मुखिया को सिरेदार कहते है।
  • गाँव में एक स्थान होता है जहाँ सभी उपस्थित होते हैं। इसी स्थान को घोटुल कहते हैं।
  • घोटुल को गोंगा स्थल भी कहते है।
  • घोटुल की स्थापना लिंगोपेन ने किया था।

ककसार नृत्य :- (मुड़िया)

  • यह नृत्य लिंगोपेन देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
  • जीवन साथी प्राप्ति के लिए विशेष नृत्य किया जाता है।
  • इस नृत्य को जात्रा नृत्य भी करते है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

हुलकी पाटा नृत्य :- (मुड़िया)

  • यह सभी अवसर पर किया जाता है।

घोटुल पाटा नृत्य :- (मुड़िया)

  • यह मृत्यु के अवसर पर किया जाता है।
  • यह गोंडी भाषा में होता है।

एबलतोर नृत्य :- (मुड़िया)

  • मड़ई में आगा देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।

गैंडी/डिटोंग नृत्य :- (मुड़िया)

  • इसमें केवल पुरूष भाग लेते है।
  • गेडी, हरेली त्यौहार में बनता है और नारबोद में ठंडा किया जाता है।

डंडारी नृत्य : (मुड़िया)

  • बस्तर अंचल में होली के पर्व में किया जाता है।

पूस कोलांग/ पूस कलंगा नृत्य :-

  • यह बस्तर अंचल का प्रसिद्ध नृत्य है।

गौर/बायसन नृत्य :- ( दण्डामी माड़िया)

  • इसमें बायसन हार्न के सींग को सिर में बाँधकर नृत्य किया जाता है।
  • इस नृत्य को येरियर एल्विन ने विश्व का सबसे सुंदरतम नृत्य कहा है।
  • बस्तर दशहरा में रथ के सामने यही नृत्य होते हुए आगे बढ़ता है।

करमा नृत्य : (बैगा)

  • यह नये फसल आने पर कर्म देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।
  • यह 4 प्रकार से होता है, 1. करमा खरी  2. करमा खाप 3. करमा लड़की  4. करमा लनी

बिल्मा नृत्य :- (बैगा)

  • दशहरा के अवसर पर किया जाता है।

सैला/डंड्रा नृत्य :- (बैगा)

  • कार्तिक  पूर्णिमा से फाल्गुन  पूर्णिमा तक किया जाता है।
  • यह मुख्यतः सरगुजा जिले में होता है।
  • इस नृत्य के दौरान लड़कियाँ मन पसंद जीवन साथी चुनते हैं।

सरहुल नृत्य :- (उरांव)

  • यह चैत्र पूर्णिमा में जैसे ही साल वृक्ष में फूल आते हैं पूजा-अर्चना के साथ नृत्य होता है।

सोहर /बार नृत्य :- ( कंवर)

  • यह किसी भी अवसर में किया जाता है।

थापड़ी नृत्य : (कोरकू)

  • यह बैशाख माह में लड़के पंचा व लड़कियाँ चितकोटा बजाते हुये नृत्य किया जाता है।
  • इसे ढांढल नृत्य भी कहते है।

दमनच नृत्य :- (कोरवा )

  • यह भयोत्पादक नृत्य होता है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • इसे विवाह के अवसर पर किया जाता है।

परब नृत्य :- (धुरवा)

  • इस नृत्य में पिरा मिड का निर्माण किया जाता है।
  • यह सैन्य नृत्य है ।
  • इसमें लड़के व लड़की दोनो रहते है।

कोल दहका नृत्य : (कोल)

  • यह किसी भी अवसर में किया जाता है।

दोरला / पैडुल नृत्य :- (दोरला)

  • यह विवाह के अवसर पर किया जाता है।

गांडा नृत्य :(गांडा)

  • यह सरगुजा जिले में अधिक प्रचलित है।
  • गांडा नृत्य विवाह के अवसर में लोग किराये पर ले जाते है।

भड़म नृत्य :- (भारिया)

  • यह सबसे लंबी समय तक चलने वाली नृत्य है।

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जनजाति पुस्तक

क्र.रचनाकारपुस्तक
1.बेरियर एल्विनद
  • मुड़िया एण्ड देयर घोटुल ।
  • द अगरिया।
  • द गौर।
  • द बैगास।
2.चरण दुबेद कमार।
3.

P.V. नायक

द भील |
4.दयाशंकर नागद ट्राईबल इकॉनामी।
5.M.C. रायद बिरहोर।
6.जार्ज ग्रियर्सनद माड़ियां गॉड्स ऑफ बस्तर।

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जनजातियों को संवैधानिक अधिकार

क्र अनुच्छेदप्रावधान
1.164 (A) 

छ.ग., मध्यप्रदेश, उड़ीसा में अनुसूचित क्षेत्रों के राज्यों में

जनजाति मंत्री का प्रावधान है।

2.2446 वीं अनुसूची के तहत् स्वशासन का प्रावधान
3.275जनजातियों को अनुदान का प्रावधान।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
4.330जनजातियों को लोकसभा में आरक्षण का प्रावधान।
5.332जनजातियों को विधानसभा में आरक्षण का प्रावधान।
6.335UPSC, PSC के पदों में आरक्षण का प्रावधान। 
7.338(A)राष्ट्रीय जनजाति आयोग का गठन का प्रावधान
8.342जनजातियों पर राष्ट्रपति का अधिकार।

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जनजाति प्राधिकरण

क्र प्राधिकरणस्थापना

मुख्यालय

1.बिरहोर विकास प्राधिकरण1978जशपुर
2.अबुझमाड़िया विकास प्राधिकरण1978नाराणपुर
3.पहाड़ी कोरवा1978

कोरबा

4.बैगा विकास प्राधिकरण1990कवर्धा
5.यस्तर/दक्षिण विकास प्राधिकरण2004जगदलपुर
6.सरगुजा उत्तरी /विकास प्राधिकरण2004अम्बिकापुर
7.पण्डो विकास प्राधिकरण2005अम्बिकापुर
8.भुजिया विकास प्राधिकरण2005रायपुर
9.कमार विकास प्राधिकरण2006गरियाबंद 
10.आदिम जाति शिक्षण संस्थान2006रायपुर
11.दण्डकारण्य विकास प्राधिकरणछ.ग., महाराष्ट्र, उड़ीसा, तेलंगाना का संयुक्त प्राधिकरण है। 

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जनजातियाँ

केन्द्र सरकार द्वारा:-

1. अबुझमाड़िया
2. कमार
3. बिरहोर
4. बैगा ( पुरोहित )
5. कोरवा ( पहाड़ी )

राज्य सरकार द्वारा:-

1. भुंजिया
2. पण्डो

अबुझमाड़िया:-

  • यह बीजापुर जिला में सर्वाधिक पाया जाता है।
  • इसे हिल माड़िया भी कहते है। अबुझमाड़ की पहाड़ी में निवास करते है।
  • इनका निवास क्षेत्र परगना में बटा होता है। परगने के मुखिया को मांझी कहते है ।
  • अबुझमाड़िया अपने आप को मेटाभूम कहते है।
  • अबुझमाड़िया का अर्थ अज्ञात लोग( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • भारत सरकार नक्सलियों के कारण निवास क्षेत्रों का सर्वे नहीं कर पाया है।

बैगा :-

  • यह मैकाल श्रेणी में पाया जाता है।
  • यह गोड़ो की पुजारी का काम करता है।
  • बैगा जनजाति का भोजन
  • सुबह बासी।
  • दोपहर पेज।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • रात्रि बियारी।
  • महिलाओं के वस्त्र को कपची कहते है।
  • खेत में हल नहीं चलाते क्योकि धरती माँ का सीना फट जाता है।
  • बैगा बच्चों के लिए विशेष स्कूल > उड़ान खोला गया है।
  • नक्सल प्रभावित बच्चों के लिए >प्रवास खोला गया है।

कोरवा (पहाड़ी) :-

  • अपना घर पेड़ के ऊपर बनाते हैं, जिसे मचान कहते है।
  • जमीन में सोना अशुभ मानते है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • कोरवा सिंगली व कोरबोर बोली बोलते है।
  • इनके पंचायत को मयारी कहते है।
  • पांच वर्ष होने पर लड़के के हाथ में 10 से 16 निशान आग से बनाते है, जिसे दरहा कहते है।
  • इनकी दो उपजाति है :- 1. पहाड़ी कोरवा 2. दिहाड़ी कोरवा

कमार :-

  • इनका मुख्य कार्य बाँस शिल्प तैयार करना है।
  • इनका शिल्प विश्व में प्रसिद्ध है।
  • इनके पंचायत को कुरहा कहते है।
  • धोड़े को छुना व दूसरे जाति से बाल कटवाना अपराध मानते है।
  • (मुखिया को कुरहा कहते है)
  • अपने आप को कौरवों का वंशज मानते हैं।
  • घर में मृत्यु होने पर घर का त्याग करते है। कमार की दो उपजाति है 1. मकाड़िया 2. बुधरजिया।
  • मकाड़िया चंदर का माँस खाते हैं। (बुंधरसिया नहीं)

बिरहोर :-

  • यह छ.ग. की विलुप्त होने वाली जनजाति है।
  • यह मुख्यतः झारखण्ड की जनजाति हैं।
  • बिरहोर का अर्थ> बनचर होता है।

भुंजिया:-

  • यह रोगो का उपचार तपते लोहे से करते हैं।
  • इसकी दो उपजाति है 1. छिन्दा भुंजिया 2. चौखटिया भुंजिया
  • रसोई घर को “लाल बंगला” कहते है।

पण्डो :-

  • पाण्डवों को अपना वंशज मानते है।
  • इसे रूढ़िवादी जनजाति मानते है।

गोड़ :-

  • छ.ग. में इसकी 30 शाखाएँ पायी जाती है।
  • घर के दीवारों पर नोहडेरा चित्रकारी करते है।
  • मेघनाथ को अपना देवता मानते है।
  • गोड़ की 41 उपजाति छ.ग. में पायी जाती है।
  • गोड़ की दो उपवर्ग है 1. राजगोड़ 2. धुरगोड़ गोड़ बस्तर संभाग में अधिक पाये जाते है।
  • गोड़ जाति का मूल नाम कोईतोर है।
  • गोड़ शब्द की उत्पत्ति तमिल भाषा से हुई हैं।

हल्बा :-

  • हल वाहक होने के कारण हल्बा नाम पड़ा।
  • इनमें टोडम (एक रस्म) को बरग कहते है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • यह जनजाति अधिकतर कबीर पंथी होते है।
  • यह सर्वाधिक सम्पन्न जनजाति है।

दण्डामी माड़िया :-

  • जंगल में पृथक झोपड़ी बना कर रहते हैं, जिसे सिहारी कहते है।
  • इनका मकान पाँच भागों में बटा रहता है।
  • 1. अहगी 2. अहपानी 3. आगता, 4.मेंटम 5 बेडूकुरमा
  • मृतक स्तंभ का प्रयोग करते है।

मुड़िया / मुरिया:-

  • मुड़िया शब्द की उत्पत्ति मुड़ शब्द से हुआ है, जिसका अर्थ पलास वृक्ष होता है।
  • मुड़िया संस्कृति को राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पहचान प्राप्त है।
  • मुड़िया जनजाति लकड़ी शिल्पकला में पारंगत होती है।

उराव :-

  • यह जनजाति सर्वाधिक शिक्षित है।
  • इस जनजाति में सर्वाधिक धर्मांतरण हुआ है।
  • इनकी प्रमुख भाषा कुरुख हैं
  • नृत्य के मैदान में अखाड़ा करते है।
  • इसके प्रमुख देवता धर्मेश है जिसे सूर्य देव का रूप माना जाता है।
  • इसके पूजा स्थल को बगिया कहते है।
  • घुमकुरिया के मुखिया को थांगर महतो कहते है।
  • विरह गीत गाते है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • ग्राम के प्रमुख को मांझी कहते है।
  • पारंपरिक पोशाक को करेया कहते हैं
  • राजमहल की पहाड़ियों में निवास करते है।

भतरा :-

  • भतरा शब्द की उत्पत्ति भृत्य शब्द से हुई है।
  • इसका प्रमुख कार्य सेवक व नौकर कार्य करना।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • यह जनजाति उड़ीसा से प्रेरित है।
  • अन्नमदेव के साथ वारंगल से बस्तर आये थे।

बिंझवार :-

  • तीर इनका जाति चिन्ह है।
  • इनके महासभा को कोटा सागर कहते है।
  • बिंझवार जनजाति बालाघाट के लाफा से आये है।
  • शबरी बोली बोलते है।

कोरकू :-

  • इसमें पोटा विवाह प्रचलित है।
  • जातीय संस्कार को पोथड़िया कहते है।

परधान :-

  • इन्हें पटरिया भी कहते है।
  • यह जनजाति गोड़ राजाओं के प्रशस्ति गीत गायक थे।

सौंता :-

  • एकमात्र कटघोर तहसील में है।
  • यह विलुप्त होती जनजाति है।

सांवरा :-

  • सांप पकड़ने के कारण सांवरा कहते है।
  • अपना पूर्वज शबरी को मानते है।

कँवर :-

  • शबरी बोली बोलते है।
  • अपने आप को कौरवों का वंशज मानते है।
  • इनका पैतृक समूह को गोटी कहते है।
  •  महिलाएँ सीने में कृष्ण का रूप गोदना गोदवाते है ।

अगरिया :-

  • लोहे गलाने के कारण अगरिया नाम पड़ा है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • इनमें उड़द दाल का विशेष महत्व होता है।

नगेशिया :-

  • शबरी बोली बोलते है।

विवाह के दौरान वर के पैर में तेल, सिंदर लगाते हैं।

खैरवार :-

  • खैर के पेड़ से कत्था बनाने का कार्य करते है।

पारधी :-

  • पारधी मराठी शब्द पारधू से है।
  • केवल काले पक्षियों का शिकार करते है।

खड़िया :-

  • पालकी उठाने का कार्य करते है।

बिरजिया :-

  • इस जनजाति को “जंगल का मछली” कहते है।

भारिया :-

  • इनके निवास स्थल को ढाना कहते है।
  • लकड़ी के दरवाजे में शिल्पकारी करने में इन्हें महारत हासिल है।
  • बाघ न खाए कहकर बापेश्वर देव की पूजा करते है।
  • भीम सेन देव को विवाह का वरदान मानते है।
  • गांव के सीमा पर मुठया चबुतरा बनाया जाता है।

कंध :-

  • इसे खोड़ या कोण्ड जनजाति कहते है।

कोल :-

  • यह विलुप्त होती जनजाति है।
  • कोयला का कार्य करते है।

धनवार :-

  • इन्हें धनुवर भी कहते है।
  • धनुष चलाने में निपुण होते है।

गदबा / गड़वा :-

  • बोझा ढोने का कार्य करते है।
  • अपने आप को गुडन कहते है।

परजा / धुरवा :-

  • इनके पंचायत को वेरना मुण्डा कहते है।
  • ग्राम मुखिया को मडुली कहते है।
  • धार्मिक कार्य के लिए प्रसिद्ध है।
  • परजा जाति का प्रिय व्यसन गुड़ाखू करना है।
  • ग्राम वैध  (बैंगा) को दिसारी व गुरमेन कहते हैं।
  • शुद्धीकरण करने वाले को महानायक कहते है।

भैना :-

  • यह बैगा व कंवर का मिश्रित प्रजाति है।
  • यह सिर्फ मुंगेली जिला में पाया जाता है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

दोरला / कोया / कोयतूर:-

  • यह सुकमा के गोदावरी क्षेत्र में निवास करती है।

मंझवार :-

  • गोड़, मुण्डा, कंवर की मिश्रित जनजाति है।
  • इन्हे मांझी व माझिया भी कहते है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातीया

क्र.जनजाति उपजनजातिनिवासस्थल
1.गोंडपरधान,अगरिया ,ओझा,नगारची ,सोल्हासकांकेर,बस्तर,दंतेवाड़ा
2.बैगाबिंझवार,नरोटिया ,भरोदिया,नाहर,रै मैना,कांध मैनाबिलासपुर,राजनांदगांव
3.कोरबापहाड़ी कोरबा,
दिहारिया
सरगुजा,रायगढ़,जशपुर,कोटा,बिलासपुर,जांजगीर
4.उरावकुरुख,धनका,
धांगर ,कूडा
रायगढ़,सरगुजा,जशपुर
5.हलवाहनवी,बस्तरिया
,छत्तीसगारिया
रायपुर,दुर्ग,राजनांदगांव,कांकेर,दंतेवाड़ा
6.भतरासमभतरा,अम्नेट,पिटबस्तर,रायपुर
7.कंवरकंकर,तंवर ,कमलवंशी,दूधकवंर ,पैंकराछत्तीसगढ़ के पहाड़ी क्षेत्र बिलासपुर,कोरिया,रायगढ़ सरगुजा,रायपुर,जांजगीर,दुर्ग,राजनांदगांव,कबीरधाम
8.कमार_बिलासपुर,जांजगीर,दुर्ग, रायगढ़,जशपुर,कोरिया,सरगुजा
9.मरियाअबुझमाड़ियाबस्तर
10.मुरिया_बस्तर
11.भैना_बिलासपुर,रायगढ़,जशपुर,रायपुर,बस्तर
12.भरियाभूमिया,भुइंहार ,पांडोबिलासपुर
13.बिझवरसोनझर, बिरझिया,बिछियारायपुर,बिलासपुर
14.धनवार_बिलासपुर के पहाड़ी क्षेत्र
15.नगेसिया_रायगढ़ ,सरगुजा
16.मझवार_रायगढ़ ,सरगुजा
17.खैरवार_बिलासपुर,सरगुजा
18.भुजियाछिंदा भुजिया ,चौखटिया,भुजियारायपुर
19.पारधी_बस्तर,रायगढ़,सरगुजा,बिलासपुर,रायपुर
20.खारियादूध,खारिया,देलकि खारियाबिलासपुर,रायगढ़,सरगुजा
21.गदबा या गढ़वा_बस्तर,रायगढ़,बिलासपुर

छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजातियाँ | Chhattisgarh ki Anusuchit Janjatiya

“यहाँ जो जानकारी निचे हम आपको दे रहे है , यह इंटरव्यू में पूछा जाता है ।”

छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत 42 जाति समूह और अनुसूचित जाति के अंतर्गत 44 जाति समूह अधिसूचित किए गए हैं। यह अधिसूचना भारत सरकार के राजपत्र में हिन्दी और अंग्रेजी में प्रकाशित है।

इनमें से कई जातियों के नामों में उच्चारण भेद पाए जाते हैं, जो इनके ही स्थानजनित उच्चारणगत विभेद हैं। चूंकि मूल रूप से यह अधिसूचना अंग्रेजी भाषा और लिपि में जारी हुई है तथा इसका हिन्दी अनुवाद सिर्फ हिन्दी अधिसूचना के रूप में जारी हुआ है। ( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

अत: उच्चारण भेद के कारण मूल अनुसूचित जनजाति और मूल अनुसूचित जाति के लोगों को जाति प्रमाण पत्र उनके जनजाति  अथवा अनुसूचित जाति का होने के बाद भी जारी नहीं हो पा रहा था। समिति को राज्य की अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के अंग्रेजी लिपि के शब्दों के स्थानीय भाषा में ध्वन्यात्मक मानक शब्द अंकित करने के बारे में विचार करने और अनुशंसा देने की जिम्मेदारी दी गई थी।

समिति ने इस महीने की 14 तारीख को राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें समिति ने अनुसूचित जन-जातियों में से 22 जातियों और अनुसूचित जातियों में 05 जातियों के उच्चारणगत विभेद इंगित किए हैं, जिन्हें आज मंत्रि परिषद ने विचार-विमर्श के बाद मान्य करने का निर्णय लिया।

इनमें अनुसूचित जनजातियों के 22 समूहों के विभिन्न उच्चारण विभेद और अनुसूचित जातियों के पांच समूहों के 19 उच्चारण विभेद शामिल हैं।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

अनुसूचित जनजातियों से संबंधित प्रकरणों में – भुईहार, भारिया, भूमिया, पण्डो, भुजिया, बियार, धनवार, गड़ाबा, गदबा, गोंड, धुलिया, डोरिया, कंडरा, नागवंशी, हल्बा, तंवर, खैरवार, कोन्ध, कोड़ाकू, मंत धनगड़, पठारी और सवरा जाति के अंतर्गत विभिन्न उच्चारण में विभेद वाली जातियां शामिल हैं। इसी तरह अनुसूचित जाति से गई। संबंधित प्रकरणों में औधेलिया, धारकर, चडार, गांड़ा और महार जाति समूहों में विभिन्न उच्चारण विभेद वाली जातियां शामिल है।

 छत्तीसगढ़ में एससी-एसटी एक्ट

सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी एक्ट के जिस फैसले को लेकर देश में विवाद हो रहा है, उसे छत्तीसगढ़ पुलिस ने लागू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के 20 मार्च 2018 के फैसले का ऊलेख करते हुए सर्वोच्च अदालत द्वारा अजा,जजा अत्याचार निवारण अनियम 1989 के प्रावधानों का दुपयोग रोकने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

अत्याचार निवारण अधिनियम में अग्रिम जमानत स्वीकार करने में कोई रोक नहीं है। अगर प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है या जहां न्यायिक स्वरूटनी पर शिकायत प्रथम दृष्टया झूठी पाई जाती है, उस पर विचार के बाद एफआईआर होगी।

अब हो सकती है प्रारंभिक जांच

पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार, एक निर्दोष को झूठा फंसाने से बचाने के लिए प्रारंभिक जांच हो सकती है। संबंधित उप पुलिस अधीक्षक यह पता लगाएंगे कि अपराध बनता है या नहीं। वह आरोप तुच्छ या उत्प्रेरित तो नहीं है।


‘सलवा जुडूम’ यानी शांति का कारवां

वर्षों पहले धुर नक्सल प्रभावित बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ कुछ दोस्तों ने एक दल बनाया, नाम दिया सलवा जुडूम’ यानी शांति का कारवां। उसी समय दल के एक संस्थापक सदस्य मधुकर राव ने शपथ ली कि इस लड़ाई में यदि
किसी साथी की मौत होती है तो वह उनके बच्चों की परवरिश करेंगे और अगर नक्सली उन्हें भी मार दें तो अन्य जीवित सार्थी यह दायित्व निभाएंगे।

मारे गए सदस्यों के 132 बच्चे बेसहारा हो चुके हैं, लेकिन दिए गए वचन के अनुसार मधुकर राव अब उन 132 बेसहारा बच्चों को पढ़ा रहे हैं और परवरिश कर रहे हैं। नक्सलियों की मनाही और भारी विरोध के बाद भी उनका उनका गुरुकुल चल रहा है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

साथियों को दिए वचन को निभाने के लिए ही 2008 में पंचशील आश्रम की बुनियाद रखी। यहां बच्चे रहते भी हैं, पढ़ते भी हैं। बता दें कि नक्सल प्रभावित बीजापुर जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित कुटरू गांव में संचालित पंचशील आश्रम के संचालक 57 वर्षीय मधुकर राव को नक्सलियों ने देखते ही गोली मारने का फरमान जारी कर रखा है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

आश्रम में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं चलती हैं। गांव के ही चार युवक अल्प मानदेय लेकर बच्चों को पढ़ाते हैं। मधुकर को छात्र पिता तुल्य मानते हैं। वे उन्हें ‘बड़े सर’ कह कर बुलाते हैं। यहां बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ खेलकूद, गीत-संगीत से भी जोड़ा जाता है। उनके हाथों में बंदूक की जगह किताबें हों, उनका मकसद है। सरकार ने पुलिस सुरक्षा प्रदान की है।

यह था सलवा जुडूम

कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा को सलवा जुडूम का जनक माना जाता है। छत्तीसगढ़ में जब नक्सलियों का आतंक बढ़ने लगा तो महेंद्र कर्मा ने सलवा जुडूम की शुरुआत 2005 में की थी।

इसका मकसद था नक्सलियों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना। सलवा जुडूम से नक्सलियों के आतंक पर काफी हद तक अंकुश भी लगा। इसके बाद नक्सलियों ने बदला लेने के लिए सुकमा में 25 मई 2013 को कांग्रेस के काफिले पर हमला कर महेंद्र कर्मा सहित 29 नेताओं की हत्या कर दी थी।

छत्तीसगढ़ में दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक

छत्तीसगढ़ में सरकारी और गैर सरकारी रिकार्डो में दलित शब्द लिखने पर पाबंदी लगा दी गई है। सरकार ने बाकायदा आदेश जारी कर दलित के स्थान पर जाति का उल्लेख करने का निर्देश दिया है।

राज्य के गठन के पहले संयुक्त मध्यप्रदेश के दौर में तत्कालीन सरकार ने 10 फरवरी 1982 को नोटिफिकेशन जारी कर हरिजन शब्द पर रोक लगाई थी।

इस शब्द के इस्तेमाल पर सजा का भी प्रावधान किया गया, लेकिन दलित शब्द के प्रयोग पर कितनी सजा का प्रावधान होगा यह स्पष्ट नहीं है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

जनजाति सलाहकार परिषद सचिवालय

नया रायपुर में आदिवासी जनजाति:- छत्तीसगढ़ राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद के सचिवालय का शीघ्र गठन किया जाएगा। अनुसूचित जनजाति अनुसंधान संस्थान में यह सचिवालय संचालित होगा। वहींआदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को सोसायटी के रूप में पुनर्गठित कर संचालित किया जाएगा, ।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

जिससे भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय से वित्तीय सहायता सीधे संस्थान को मिलेगी और प्रस्तावित योजनाओं का विभिन्न स्तर से अनुमोदन कराने के बजाए सीधे आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सोसायटी से अनुमोदन मिलना प्रारंभ हो जाएगा।

राज्य में जनजाति संस्कृति एवं भाषा अकादमी गठन के प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति मिल गई है नया रायपुर पुरखौती मुक्तांगन के समीप 27 करोड़ की लागत से 22 एकड़ में शहीद वीरनारायण सिंह आदिवासी संग्रहालय निर्मित किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ के सभी परीक्षाओ में जनजातियों से सम्बंधित पूछे गए प्रश्न 

  • बैगा, बिरहोर, अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरवा तथा कमार छत्तीसगढ़ की विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह हैं।
  • छत्तीसगढ़ राज्य में 5 जनजातियाँ बैगा, बिरहोर, कमार, अबूझमाड़िया तथा पहाड़ी कोरवा को विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्रदान है ।
  • छत्तीसगढ़ में भुजिया जनजाति का संकेन्द्रण मुख्य रूप से गरियाबंद जिले में पाया जाता है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ का सबसे अधिक जनजाति प्रतिशत सुकमा तथा उसके पश्चात् बीजापुर जिले में है।
  • कमार जनजाति गरियाबंद जिले की बिंद्रानवागढ़, फिंगेश्वर तथा मैनपुर जिले में निवास करती है। डॉ. श्यामाचरण दुबे ने इन पर द कमार ग्रंथ लिखा है।
  • सरगुजा, जशपुर और रायगढ़ क्षेत्र में निवास करने वाली नगेशिया जनजाति स्वयं को किसान के रूप में मानती है तथा सदरी बोली का प्रयोग करती है।
  • पारधी शिकारी जनजाति मुख्य रूप से सरगुजा, रायगढ़ और कोरबा जिलों में पाई जाती है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • कवर्धा, मुंगेली पेण्ड्रा जिलों में निवासरत बैगा जनजाति की मान्यता अनुसार उनके देवता बूढ़ादेव साल वृक्ष में निवास करते हैं।
  • छत्तीसगढ़ के रायगढ़, सरगुजा एवं जशपुर क्षेत्र में निवास करने वाली नगेशिया जनजाति स्वयं को सर्प का वंशज मानती है तथा कृषि कार्य में संलग्न है।
  • बस्तर में कोयतूर प्रजातियों की संख्या 4 है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 की धारा 20 में सूचीबद्ध कुल जनजातियों में से 42 जनजाति समूह छत्तीसगढ़ में निवास करती है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • माड़िया, मुड़िया, दोरला, घुरवा आदि जनजातियां गोंड जनजाति की उपजातियां हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में निवासरत अबूझमाड़िया जनजाति यहां की सबसे बड़ी जनजाति समूह गोंड की एक उप जनजाति है।
  • छत्तीसगढ़ में गोंड़ सबसे बड़ा जनजाति समूह है, कुल जनजाति जनसंख्या का 50% से भी अधिक इसी समूह से है। राज्य में गोंड के 41 उप समूह पाए जाते हैं।
  • छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में निवासरत अबूझमाड़िया जनजाति यहां की सबसे बड़ी जनजाति समूह गॉड की एक उप जनजाति है।
  • जनजाति एवं युवागृह- 1. परजा- धांगाद बक्सर, 2. भारिया-धंसर वासा 3. उरांव-धुमकुरिया, 4. भुइयां – रंगभंग 
  • ( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • खड़ोनी पुनर्विवाह का एक प्रकार है जो बैगा जनजाति में प्रचलित है।
  • गुरावट विनिमय विवाह का स्वरूप है जिसमें दो परिवार आपस में वर एवं वधु का विनिमय करते हैं।
  • जनजातियों में गोत्र के भीतर विवाह वर्जित होता है।
  • मुरिया विवाह में माहला का अर्थ सगाई है।
  • छत्तीसगढ़ में की जनजातियों में अपहरण विवाह को पायसोतूर के नाम से जाना जाता है।
  • छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में निवासरत मुड़िया जनजाति के युवागृह को घोटुल कहा जाता है।
  • उरांव जनजाति का युवागृह घुमकुरिया के नाम से जाना जाता है, इसमें युवकों के प्रमुख को धांगरमहतो तथा युवतियों के प्रमुख को बारकिन धांगरिन कहा जाता है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • वेरियर एल्विन के द्वारा मुड़िया जनजाति के युवागृह घोटुल का विशेष अध्ययन किया गया तथा उस पर मुड़िया एंड देयर घोटुल नामक ग्रंथ की रचना की गई है।
  • जनजातियों में विनिमय में विवाह को गुरांवट के नाम से जाना जाता है, जिसमें एक परिवार के भाई-बहनों की शादी दूसरे परिवार के भाई-बहनों से की जाती है।
  • अर-उतो एक विधवा पुनर्विवाह पद्धति है जो छत्तीसगढ़ की जनजातियों में प्रचलित है।
  • कोरकू जनजाति में स्त्री के द्वारा अपने पति का परित्याग कर किसी अन्य पुरूष से विवाह कर लेना, पाटो विवाह के नाम से जाना जाता है।
  • पायसोतुर अपहरण विवाह का एक स्वरूप है, जो गोंड समाज में प्रचलित है।
  • प्रसिद्ध मानव शास्त्री वेरियर एल्विन ने इस राज्य की मुड़िया जनजाति पर शोध किया तथा उन पर मुड़िया एंड देयर घोटुल नामक ग्रंथ की रचना की।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • कुछ जनजातियों में प्रचलित दुकू विवाह हठ विवाह का एक रूप है जिसमें लड़की भाग कर अपने प्रेमी की घर आ जाती है और वहां रहने लगती है, कुछ जनजातियों में हठ विवाह को पैठू विवाह के नाम से भी जाना जाता है।
  • दहका नृत्य कोल जनजाति का प्रमुख नृत्य है.
  • घोटुल पाटा बस्तर क्षेत्र में गाया जाने वाला वीर गीत है, जिसमें राजा जोलोंग साय की गाथा प्रस्तुत की जाती है।
  • छत्तीसगढ़ में विवाह के अवसर पर मायमौरी रस्म में मातृ पूजा के लिए पकवान बनाया जाता है।
  • माओपाटा दंडामी माड़िया जनजाति का शिकार नृत्य नाटक है।
  • छत्तीसगढ़ बैगा जनजाति दशहरा के अवसर पर बिल्मा नृत्य करती है।
  • चैत्र माह की पूर्णिमा को साल वृक्ष पर फूल आने की खुशी में उरांव जनजाति द्वारा सरहुल नृत्य किया जाता है, साथ ही करमा नृत्य भी करते हैं।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • अबूझमाड़िया जनजाति में कांडाबरा या पुष्प विवाह नामक एक कौमार्य संस्कार किया जाता है। साल वृक्ष में फूल आने के अवसर पर उरांव जनजाति सरहुल त्यौहार मनाती है।
  • छत्तीसगढ़ राज्य की विभिन्न जनजातियां अपना उद्गम एक विशेष तत्व से मानती हैं जिसे टोटम कहा जाता है। टोटम का अर्थ विश्वास होता है।
  • बिंझवार जनजाति तीर को अपना जाति चिन्ह मानते हैं, वे विंध्यवासिनी देवी की पूजा करते हैं। शहीद वीर नारायण सिंह इसी जनजाति से संबंधित थे।
  • छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासी साल वृक्ष की पूजा करते हैं, इनकी मान्यता अनुसार इनके आराध्य बूढ़ादेव का निवास साल वृक्ष में होता है।
  • छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासी साल वृक्ष की पूजा करते हैं, इनकी मान्यता अनुसार इनके आराध्य बूढ़ादेव का निवास साल वृक्ष में होता है।( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )
  • सूर्य या सूरज बिरहोर जनजाति के प्रमुख देवता है।
  • भतरा जनजाति का शाब्दिक अर्थ सेवक होता है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में जनजातियों की संख्या कुल आबादी का 30.62 प्रतिशत है। धनवार जनजाति का नाम उसके बाण निर्माण करने के कारण पड़ा.
  • छत्तीसगढ़ के बिलासपुर तथा रायपुर शहर के निकट निवासरत बंसोड़ परिवार बांस शिल्प के कार्य में संलग्न है।
  • ( छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ | Chhattisgarh Ki Janjatiya, छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियाँ Chhattisgarh ki pramukh janjatiya, छत्तीसगढ़ के आदिवासी Chhattisgarh ke आदिवासी )

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