गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe chhattisgarh

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नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe chhattisgarh के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा । 

गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh Gadba Tribe Chhattisgarh

गदबा जनजाति की उत्पत्ति 

गदबा जनजाति बस्तर जिले की जगदलपुर तहसील में पाये जाते हैं। 2011 की जनगणना में इनकी जनसंख्या छत्तीसगढ़ में 8535 दर्शित है। इनमें पुरुष 4183 तथा स्त्रियों 4352 दर्शित है। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

गदबा जनजाति की उत्पत्ति के संबंध में कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यह जनजाति उड़ीसा राज्य की मूल जनजाति है, इनमें प्रचलित मौखिक जानकारी अनुसार इनके पूर्वजों को बस्तर के राजा महिपाल देव सिंह ने डोली (पालकी) उठाने हेतु बस्तर बुलाये थे। किवदंती अनुसार प्राचीन काल में इनके पूर्वज गोदवरी नदी के किनारे रहते थे, अतः “गोदया” कहलाये। कालांतर में यह शब्द गदबा में परिवर्तित हो गया।

गदबा जनजाति बस्तर की अन्य जनजातियों के साथ ग्रामों में निवास करती है। इनका घर झोपड़ीनुमा होता है। इनमें दो तरह की झोपड़ियाँ होती हैं, एक तो घासफूस की छप्पर वाली, जिनकी संख्या अधिक है; दूसरी खपरैल की छप्पर वाली झोपड़ी के चारों ओर बाड़ बनाते हैं। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

प्रत्येक घर में एक आँगन होता है। एक ओर भोजन बनाने का कमरा होता है। दूसरी तरफ गाय, बैल के लिये “सार” होता है। कमरे के आगे परछी होती है। मुख्य द्वार के किनारे धान कूटने की ढेकी एवं अनाज पीसने के लिए पत्थर की “जांता” (चक्की) होती हैं। घर की दीवारों पर सफेद मिट्टी को पुताई करते हैं। फर्श मिट्टी का बना होता है, जिसे स्त्रियाँ गोबर से लोपती हैं।

घरेलू वस्तुओं में अनाज रखने की मिट्टी की कोठी, ओढ़ने बिछाने के कपड़े, भोजन पकाने व खाना खाने के लिए बर्तन, कृषि उपकरणों में गैंती, फावड़ा, कुंदाली, बखर आदि वस्तुएँ होती है। इसके अतिरिक्त मछली पकड़ने के जाल भी होते हैं। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

गदबा जनजाति का रहन-सहन 

गदबा जनजाति के पुरुष नित्य स्नान करते हैं। अपने शरीर का मैल निकालने के लिये चिकने गोल पत्थर का उपयोग करते हैं। पुरुष अपने सिर के बाल छोटे रखते हैं। स्त्रियाँ अपने बालों को “ककई” (ककवा) से “कोरती” (संवारती हैं तथा पीछे की ओर बाँधती हैं।

स्त्रियों के हाथ पैरों में गुदने पाये जाते हैं। गुदना दो बार गुदवाये जाते हैं। पहली बार शादी के पहले लड़कियाँ केवल तीन बिंदु लगवाती हैं (ठुड्डी, नाक, मस्तक में), दूसरी बार शादी में अपने अंगों में गुदना गुदवाती हैं। गिलट, चाँदी, एल्युमिनियम के गहने पहनती हैं। वस्त्रों में पुरुष धोती, गमछा, सूलका, कमीज, बंडी, स्त्रियाँ साड़ी, लुगड़ा, पोलका पहनती हैं। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

इनका मुख्य भोजन घावल, कोदो, कुटकी की भात या पेज है। इसके साथ अरहर, उड़द आदि की दाल है। मौसमी सब्जियाँ खाते हैं। मांसाहार में मछली, बकरा, मुर्गा, सुअर, खरगोश आदि का मांस खाते हैं। गदबा लोग तंबाकू खाते एवं बीड़ी पीते हैं। महुआ की शराब, सल्फी, लांदा आदि पीते हैं।

गदबा जनजाति का व्यवसाय 

गदबा जनजाति का मुख्य व्यवसाय कृषि व कृषि मजदूरी हैं। खेतों में धान, मक्का, तिल्ली, उड़द, कोदो, ज्वार, कोसरा आदि अनाज बोते हैं। जिनके पास कृषि के लिए भूमि नहीं है, ये अन्य भू-स्वामियों के खेतों में जाकर मजदूरी करते हैं। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

जंगल से कंदमूल, महुआ, कटहल, बाँस की जद, वोड़ा, कांदा आदि एकत्र कर स्वयं खाने में उपयोग करते हैं। गोंद, तेंदू पत्ता, कोसा आदि संग्रह कर बेचते हैं। जंगली सुअर, खरगोश, जंगली पक्षियों का शिकार करते हैं। अपने खाने के लिए मछली भी पकड़ते हैं।

गदबा जनजाति पितृवंशीय, पितृसत्तात्मक, पितृ निवास स्थानीय होते हैं। यह जनजाति विभिन्न गोत्रों में विभक्त है। इनके प्रमुख गोत्र मुकरवंभ, नागपूस, कुरैया आदि हैं। इनमें एक ही गोत्र में विवाह करना वर्जित है। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

गदबा जनजाति के परम्पराये 

गदबा महिलाएं गर्भावस्था में सभी धार्मिक तथा पारिवारिक कार्य करती हैं। गर्भावस्था के समय इस जनजाति में कोई विशेष संस्कार नहीं होता है। प्रसव के समय स्त्री को घर में एक कोने या कमरे में किनारे पर ले जाते हैं। प्रसव परिवार या गाँव की बुजुर्ग की देखरेख में होता है।

बच्चे का नाल हंसिया से काटती हैं। नाल काटने के बाद बच्चे को कुनकुने पानी से नहला कर माँ के पास सुलाया जाता है। जहाँ पर बच्चे का जन्म होता है, वहाँ एक गड्डा खोदकर नाल गढ़ाते हैं माँ (प्रसूता) को सिर्फ छिंद की जड़ का रस तथा पौष्टिक खाना देते हैं। नौवें दिन बच्चे का मुण्डन तथा नामकरण किया जाता है। रिश्तेदारों को शराब पिलाते हैं। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

विवाह का प्रस्ताव लेकर लड़के वाला (वर पक्ष) लड़की वाले (वधू पक्ष) के घर जाता है, लड़की के घर पर एक “बढ़ेगी” (सकढ़ी की लाठी) खड़ी करके वापिस आ जाता है। दूसरे दिन फिर जाता है। यदि बड़गी खड़ी मिली तो विवाह की बात तय की जाती है और यदि गिर गई तो विवाह संबंधी कोई बात नहीं होगी।

विवाह तय होने के 12 दिन बाद वर के पिता वधू के घर 12 बोतल “मंद” (शराब) लेकर वधू के घर जाकर वधू धन संबंधी माँग तय करते हैं। वधू धन के रूप में एक बोरा चावल, 3 धान, एक बकरा, एक सुअर इत्यादि वर पक्ष की ओर से दिया जाता है। विवाह की रस्म जाति के मुखिया के देखरेख में संपन्न होती है। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

मृत्यु होने पर मृतक (शव) को दफनाते हैं। साथ में उसके कपड़े, नमक, गुड़ ★ भी रख देते हैं। उसके बाद उसी स्थान पर मछलियों को उबाला जाता है, जिसके पानी से बारी-बारी से सभी लोग अपने हाथ धोते हैं। नौ दिन बाद “नहानी” का आयोजन होता है, सभी स्नान करते हैं। सुअर की बलि देते हैं। मृत्यु भोजन दिया जाता है।

इस जनजाति में परंपरागत जाति पंचायत पाई जाती है। जाति पंचायत का मुखिया जाति का बुजुर्ग व्यक्ति होता है। जाति पंचायत का प्रमुख कार्य विवाह, तलाक, संपत्ति का उत्तराधिकार, बँटवारा, अनैतिक संबंध, विवाह विच्छेद आदि विवादों का निपटारा करना है। सामाजिक नियमों का उल्लंघन करने वाले को पंचायत द्वारा जुर्माना या भोज के रूप में दण्डित किया जाता है। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

गदबा जनजाति के देवी-देवता 

इनके प्रमुख देवी-देवता धारनी देवी, रास देवी, माता आदि हैं। अण्डे तथा नारियल द्वारा धारनी देवी को, रास देवी की पूजा में बकरा, मुर्गा तथा सुअर की बलि, गुड़ी माता की पूजा में नारियल, केला, दूध चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि देवी-देवता इनके पशुओं तथा फसलों की रक्षा करते हैं, इन्हें बीमारियों से बचाते हैं। हिंदू देवी-देवताओं यथा राम, हनुमान, शिव आदि की भी पूजा करते हैं।

इनके मुख्य त्योहार, ओमुष, धानवा, दिवाली, चुरई, अमनवा आदि है। जादू-टोना, भूत-प्रेत पर विश्वास करते हैं। इनके लोक नृत्य में विवाह नृत्य, होली नृत्य आदि हैं। लोक गीत में विवाह गीत, होली गीत, माता गीत प्रमुख है।

2011 की जनगणना में गदबा जनजाति की साक्षरता 61.1 प्रतिशत थी। पुरुषों में साक्षरता 73.2 प्रतिशत तथा स्त्रियों में 49.5 प्रतिशत थी। ( गदबा जनजाति छत्तीसगढ़ Gadba Janjati Chhattisgarh gadba tribe छत्तीसगढ़ )

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source : Internet

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