गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh

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गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh
गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh

नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा ।

गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh

गोंड जनजाति का इतिहास 

गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ में ही नहीं वरन् भारत की सबसे बड़ी जनजाति समूह है। छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, बिहार, उड़ीसा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात तथा उत्तर प्रदेश में पाये जाते हैं। छत्तीसगढ़ में गॉड जनजाति की समस्त उप जातियों सहित जनसंख्या 2011 की जनगणना में 4298404 दर्शित है। इनमें पुरुष 2120974 तथा स्त्रियाँ 2177430 दर्शाई गई है। 

इनका प्रमुख निवास क्षेत्र बस्तर कांकेर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, धमतरी, बिलासपुर, कोरबा, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, कवर्धा, आदि जिले हैं। राज्य के अन्य जिले में इनकी जनसंख्या कम है।( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

गोंड जनजाति की उत्पत्ति के संबंध में कोई ऐतिहासिक अभिलेख नहीं है। गोंड शब्द की व्युत्पत्ति तेलुगु (द्रविड़) भाषा के “कोण्ड” अर्थात् पूर्वत से हुई। अतः कोण्ड (पर्वत) के निवासी गॉड कहलाये। दूसरी अवधारणा यह है कि गोड शब्द की उत्पत्ति “गोंद” शब्द से हुई। बिहार एवं पश्चिम बंगाल का सीमावर्ती क्षेत्र “गोड” कहलाता है।

संभवतः यहाँ के रहवासी गोंड कहलाये। अतः यह भी कहा जा सकता है कि गोंड जनजाति पूर्वी क्षेत्र से मध्य क्षेत्र की ओर घने जंगलों, पर्वतों एवं कुछ मैदानों क्षेत्र की ओर बढ़ती गई। भाषा वैज्ञानिक साक्ष्य इनके दक्षिण भारत से मध्य क्षेत्र में आने का संकेत देती है। ” गोंड” जनजाति का मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक महत्व है ।

मध्य प्रदेश के गोंडवाना क्षेत्र में इस जनजाति का शासन एवं आधिपत्य था। वीरांगना रानी दुर्गावती इस जनजाति की कुशल महिला शासक थी। मध्य प्रदेश के गॉड जनजाति द्रविड़ भाषा परिवार की “गॉडी” बोली बोलते हैं।( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

“गोंड जनजाति मुख्यतः जंगलों, पहाड़ों, घाटियों व नदी किनारे के ग्रामों में अन्य जनजातियों जैसे हलबा, कंवर, कमार, भुजिया, मैना, मझवार, सवरा, – बिंझवार, बैगा, भूइहर, खैरवार, माझी, आदि के साथ छत्तीसगढ़ में निवास करती हैं।

गोंड जनजाति का रहन-सहन   

घर छोटे-छोटे झोपड़ीनुमा व मिट्टी के बने हुये होते हैं। मकान की छत घास फूस या देशी खपरैल को बनी होती है। घर का निर्माण वे स्वयं करते हैं। घर दो-तीन कमरे के बने होते हैं। घर के सामने बरामदा होता है, दरवाजे बांस या लकड़ी के बने होते हैं। घर के सामने दीवारों से घिरा आंगन रहता है। पीछे का भाग “बाड़ी” कहलाता है, इसमें सब्जी-भाजी लगाते हैं। घर के अंदर अनाज रखने की कोठी मिट्टी से बनी होती है। एक किनारे में देवी-देवता का स्थान होता है।

घरेलू सामान में सोने के लिए खाट, बैठने हेतु चटाई, माचिया, अनाज कूटने की ढेकी, मूसल, अनाज पीसने का जाता (चक्की), खेती के उपकरणों में हल, कुल्हाड़ी, कुदाली, फावड़ा, हंसिया आदि होते हैं। शिकार के लिए तीर-कमान, फरसा, फंदा, मछली का जाल, चोरिया (कुमनी) मछली रखने की टूटी आदि पाये जाते हैं।( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

महिलाएँ हाथ पैर, चेहरे पर गुदना गुदगुदाती हैं। महिलाएँ गहनों में पैर में पैड़ी, पैरपट्टी, कमर में करधन, कलाइयों में चूड़ियाँ, ऐंठी, ककना, गुलेठा, बाहों में पहुंची, नागमोरी, गले में सुतिया, सुरड़ा, कानों में खिनवा एरिंग, नाक में फूली, सिर के बालों में खोचनी पहनती हैं। अधिकांश गहने नकली चाँदी या गिलट के होते हैं।

वस्त्र विन्यास में पुरुष पंछा, धोती, स्त्रियाँ लुगड़ा पोलका पहनती हैं। इनका भोजन चावल, कोदो, कुटकी का पेज, भात बासी, उड़द, मूंग, कुलथी, तिबड़ा मुख्य की दाल, जंगली कंदमूल-भाजी, मौसमी सब्जी, मांसाहार में मुर्गा, बकरा, हिरण, खरगोश, सूअर, मछली का मांस खाते हैं। महुआ से स्वनिर्मित शराब पीते हैं।( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

गोंड जनजाति का कृषि और व्यवसाय   

इस जनजाति का मुख्य व्यवसाय पहले आदिम खेती, शिकार, जंगली उत्पादन संग्रह, शहद, कंदमूल एकत्रित करना था। इस जनजाति के उपजाति समूह अबूझमाड़िया, दण्डामी माड़िया 10-15 वर्ष पूर्व “पेड़ा” खेती (स्थानांतरित खेती) करते थे। घाटी के बीच रहने वाली इनकी उपजाति मुरिया, दोरला आदि सीढ़ीनुमा खेती तथा समतल मैदानी इलाकों में रहने वाले स्थायी खेती करते हैं। जमीन असिंचित होने के कारण वर्षा पर निर्भर रहते हैं

खेती की मुख्य फसल कोदो, कुटकी, मड़िया, धान, ज्वार, मक्का आदि है। पहाड़ी ढलान में अरहर, उड़द, मूंग, कुलथी, बेलिया, सेम, तिल, जगनी आदि बोते हैं। बाड़ी में मौसमी सब्जियाँ उगाते हैं। छोटे पशु-पक्षियों का शिकार करते हैं। जंगली उत्पादन तेंदू, अचार, हर्रा, बहेड़ा, आँवला, महुआ, गुल्ली, साल बीज एकत्र कर बेचते हैं। भूमिहीन या कम कृषि भूमि धारक परिवार अन्य कृषक के खेतों में मजदूरी करते हैं।( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

गोंड जनजाति के निवेश क्षेत्र 

यह जनजाति निवास क्षेत्र व कार्य के आधार पर कई उप जातियों में बंटी हुई है। जमीदारी से जुड़े हुए लोग राजगोंड कहलाते हैं। आरख उपजाति बस्तर तथा चंद्रपुर (महाराष्ट्र) के सीमा क्षेत्र में, लोहा लगाने वाले अगरिया गोंड बिलासपुर जिले में, – माड़िया, दण्डामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, दोरला, धुरुवा, कोया, कोरतुर आदि बस्तर संभाग में, धोबा, दुलिया, कोइलाभूता (नाच गाने वाले), ओझा गॉड (मोघिया गॉड), मंत्र-तंत्र, गोदना व शिकार करते हैं।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, डिंडोरी, बालाघाट जिले में, गोंड की एक उपजाति जो गोंडों के गाय चराते हैं गोंड गवारी कहलाते हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बालाघाट जिले में, बाजा बजाने वाले दुलिया, नागरची गॉड मध्य प्रदेश के मण्डला, छिंदवाड़ा, सिवनी जिले में, सोनझरा गॉड छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में, खैरवारा गोंड

सरगुजा में, मन्नेवार (कोलम), गैती गोंड आदि चन्द्रपुर जिले महाराष्ट्र क्षेत्र में, दरोई गॉड मध्य प्रदेश के रायसेन में, खटोला गॉड मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में, कंडरा (बांस बर्तन बनाने वाले) छत्तीसगढ़ के दुर्ग, धमतरी, रायपुर, बलौदाबाजार, बेमेतरा आदि जिले में तथा कलंगा छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में, भीम्मा गॉड (गाने वाले) मध्य प्रदेश के मण्डला जिले में पाये जाते हैं। इन उपजातियों में जो पास-पास रहते हैं, आपस में खान-पान संबंध है, किन्तु वैवाहिक संबंध नहीं है।

उपजातियाँ अनेक गोत्रों में विभक्त है। इनके प्रमुख गोत्र कुर्राम, टेकाम, नेताम, मरकाम, मरावी, भलावी, केराम, कारेआम, सिरसाम, उइका, उसेण्डी, धुर्वा, परतेती, मरपाची, मर्सकोला, पद्रो, श्याम, करपे, मारपो, उरेती, पोटी, ओटी, उरेती, पोया, सल्लाम, पोरते, जगत आदि हैं। इनके गोत्र के जीव-जन्तु, वृक्ष आदि के नाम पर वंश (टोटस) पाये जाते हैं। ( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

गोंड जनजाति परम्परा 

गोंड जनजाति पितृवंशीय, पितृ निवास स्थानीय, पितृसत्तात्मक जनजाति है।

संतानोत्पत्ति ईश्वर की देन मानी जाती है। इस जनजाति की गर्भवती महिलाएँ। प्रसव के दिन तक अपनी आर्थिक तथा परिवारिक कार्य करती है। प्रसव पति के पर पर एक कोने में परिवार की बुजुर्ग महिलाएँ या स्थानीय दाई द्वारा करवाया जाता है। प्रसव काल में ज्यादा तकलीफ हो तो स्थानीय ‘बैगा’ या ‘(भूमिका) को बुलाक झाड़ फूंक कराते हैं। ( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

नबजात शिशु का नरा (नाल) बाँस की खपच्ची या नया से काटते हैं। नाल को घर में गड़ाते हैं। प्रसूता को सौंठ, गुड़, तिल, खोपरा खाने के लिए देते हैं तथा जड़ी-बूटी से निर्मित कसा पानी पिलाते हैं। छठे दिन छठी संस्कार मनाते हैं। प्रसूता व शिशु को नहलाकर नया कपड़ा पहनाकर देवी-देवता का प्रणाम कराते हैं। रिश्तेदारों को भोजन कराते हैं, शराब पिलाते हैं। बच्चे का नामकरण स्वयं कर लेते हैं।

आदिवासियों में विवाह युवक-युवती का सहज आकर्षण, परस्पर सहयोग, आदि प्रणय को अभिव्यक्ति तथा वंश वृद्धि के लिए माना जाता है। आदिवासी महिला, पुरुष के साथ समस्त आर्थिक कार्य तथा धार्मिक कार्य संपन्न करती हैं। ( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

मृत्यु होने पर मृतक को प्राय: दफनाते  हैं। कुछ समपन्न व्यक्तियों को जलाते है। तीसरे दिन परिवार पुरुष सदस्य दाढ़ी मूछ व सिर के बाल का मंडन है मृत्यु होने पर मृतक को प्रायः दफनाते हैं। कुछ संपन्न व्यक्तियों को घर की साफ-सफाई व स्नान करते हैं। दसवें दिन दशकरम किया जाता है, जिसमें मृत्यु भोज देते हैं।

इनमें परंपरागत जाति पंचायत पाया जाता है, जिसमें जाति का प्रमुख “राजा” अन्य पंचों की मदद से तलाक, अनैतिक संबंध, गोहत्या, आपसी झगड़ा, जमीन का बंटवारा आदि का निराकरण एवं ग्राम देव की पूजा व्यवस्था आदि कार्य करते हैं। अपराधी से दंड के रूप में आर्थिक जुर्माना तथा सामाजिक भोज लिया जाता है। फैसला न मानने पर समाज से अलग कर दिया जाता है। ( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

गोंड जनजाति में विवाह 

विवाह उम्र लड़कों का 18 से 22 वर्ष तथा लड़कियों का 16 से 18 माना जाता है। मामा या बुआ के लड़के से विवाह को प्रथम प्राथमिकता दी जाती है। विवाह प्रस्ताव वर पक्ष से प्रारंभ होता है। वर के पिता द्वारा वधू के पिता को खर्ची या सुक के रूप में अनाज, दाल, तेल, गुड़ और नगद कुछ रुपये दिये जाते हैं।

निर्धारित तिथि को वर तथा वधू के घर मंडप बनाते हैं, तेल-हल्दी की रस्म करते हैं। अधिका उपजातियों में वर बारात लेकर वधू के गाँव जाते हैं। बारात का स्वागत के पश्चाद भांवर की रस्म कराते हैं। विवाह की रस्म जाति के बुजुगों द्वारा संपन्न कराया जाता है। भोजन उपरांत नाच गाना भी होता है। विवाह में दुलिया उप जाति के लोग बजाते हैं। दूसरे दिन बधू को लेकर बारात वर के घर आती है।

गरावट (विनिमय) तथा घर जमाई (सेवा विवाह) प्रथा भी प्रचलित है। या दुक (घुसपैठ तथा उरिया (सह पलायन) को भी जाति पंचायत में निर्ण उपरांत विवाह के रूप में मान्यता दी जाती है। पुनर्विवाह (चूड़ी पहनाना) प्रचलित है।  ( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

गोंड जनजाति के देवी-देवता 

प्रमुख देवी-देवता बुढादेव (महादेव), ठाकुर देव, बूढ़ी माई, कंकालीन माता, छोटा पेन, बड़ा पेन, मझला पेन आदि हैं। स्थानीय देवी-देवता, सूर्य, चंद्र, पहाड़, पृथ्वी, नदी, बाघ, नाग तथा हिंदू देवी-देवता की पूजा भी करते हैं। पूजा में मुर्गी, बकरा, सूअर की बलि दी जाती है। इनके प्रमुख त्योहार हरेली, पोला, नवाखानी, दशहरा, दिवाली, होली आदि है।

जादू-टोने, भूत-प्रेत पर बहुत विश्वास करते हैं। “भूमका” या “बैगा “ मंत्र द्वारा जादू-टोना का तथा बीमारी में झाड़-फूंक करता है। ( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh )

रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, सूरजपुर, सरगुजा, कोरिया में करमा, शैला नृत्य, महिलाएँ पंडकी नृत्य करती हैं। विवाह के अवसर पर प्रत्येक क्षेत्र में नाच गान होता है। इनके प्रमुख लोक गीत करमा, ददरिया, सुवा गीत, फाग, विवाह गीत आदि प्रमुख हैं। इनकी अपनी विशिष्ट “गोंडी” बोली है।

2011 की जनगणना में गोंड जनजाति में साक्षरता 56.7 प्रतिशत दर्शित है। पुरुषों में साक्षरता 67.5 प्रतिशत व स्त्रियों में साक्षरता 46.2 प्रतिशत थी।( गोंड जनजाति छत्तीसगढ़ Gond janjati chhattisgarh gond tribe chhattisgarh ) 

इनके प्रमुख उपजातियों यथा- मुरिया, माहिया, दोरला, कंडरा आदि का सांस्कृतिक विवरण उनके निवास क्षेत्र के आधार पर अगले अध्याय में दो गई है। अबूझमाड़िया का सांस्कृतिक विवरण पूर्व अध्याय में दी जा चुकी है।

 

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source : Internet

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