बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh

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बैगा जनजाति | Baiga Janjati | Baiga Tribe Chhattisgarh
बैगा जनजाति | Baiga Janjati | Baiga Tribe Chhattisgarh

नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ – Baiga janjati chhattisgarh baiga tribes chhattisgarh के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा ।

बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribes chhattisgarh

बैगा जनजाति

1.भारत कई जनजातियों का घर है और बैगा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली जनजातियों मे से एक है।

2.लगभग 250000 की आबादी के साथ, मोटे लकड़ी के क्षेत्रों में रहते हैं। भाषा: हालाँकि अधिकांश बैगा बाहरी लोगों से हिंदी में बातचीत करते हैं और उन्होंने कुछ स्थानीय भाषाओं को भी अपनाया हुआ है।

3.उनमें से, वे ‘बाघानी’ नामक भाषा में बात करते हैं। यह छत्तीसगढ़ी की शैली से जुड़ा हुआ है और ‘गोंडी’ भाषा से भी प्रभावित है और मंडला जिले के ज्यादातर आदिवासियों इस भाषा का इस्तमाल करते है।

भोजन: वे आटा से बने हुए व्यंजन खाते हैं और पीज पीते है। पीज को उबलते चावल के बाद पिसा हुआ मक्का या पानी से बनाया जाता है। वे जंगलों से भोजन भी पाते हैं और पीपल, गूलर के पत्ते आदि खाते हैं।

गोदना: टैटू उनकी संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा है। बैगा महिलाओं के शरीर के हर हिस्से पर बड़ी-बड़ी आकृतियाँ होती हैं। पूछने पर उन्होंने खुलासा किया कि इस कला को बादी-बदनिन समूह को दिया गया है जो टैटू का काम करते हैं। वे प्रत्येक जनजाति द्वारा मांगे गए टैटू के प्रकारों को जानते हैं और अपनी माताओं से कला सीख चुके हैं और निश्चित रूप से आगे की पीढ़ियों तक भी इसे पारित करेंगे।

बैगा जनजाति का इतिहास

बैगा छत्तीसगढ़ की एक विशेष पिछड़ी जनजाति है। छत्तीसगढ़ में उनकी जनसंख्या जनगणना 2011 में 89744 दर्शाई गई है। राज्य में बैगा जनजाति के लोग मुख्यत: कवर्धा और बिलासपुर जिले में पाये जाते हैं। मध्य प्रदेश के डिंडौरी, मंडला, जबलपुर, शहडोल जिले में इनकी मुख्य जनसंख्या निवासरत है। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

बैगा जनजाति के उत्पत्ति के संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। रसेल, ग्रियर्सन आदि में इन्हें भूमिया, भूईया का एक अलग हुने समूह माना जाता है। किवदतियों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की तब दो व्यक्ति उत्पन्न किये। एक को ब्रह्मा जी ने “नागर” (हल) प्रदान किया। वह “नागर” लेकर खेती करने लगा तथा गोड़ कहलाया। दूसरे को ब्रह्माजी ने “टगिया” (कुल्हाड़ी) दिया। वह कुल्हाड़ी लेकर जंगल काटने चला गया, चूँकि उस समय वस्त्र नहीं था, अतः यह नंगा बैगा कहलायाबैगा जनजाति के लोग इन्हीं को अपना पूर्वज मानते हैं। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

बैगा जनजाति का रहन-सहन 

बैगा जनजाति के लोग पहाड़ी व जंगली क्षेत्र के दुर्गम स्थानों में गोड़ , भूमिया आदि के साथ निवास करते हैं। इनके घर मिट्टी के होते हैं, जिस पर घास फूस या खपरैल की उप्पर होती है। दीवाल की पुताई सफेद या पीली मिट्टी से करते हैं। घर की फर्श महिलाएं गोबर और मिट्टी से लीपती हैं। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh)

इनके घर में अनाज रखने की मिट्टी की कोठी, धान कूटने का “मूसल”, “बाहना”, अनाज पीसने का बाँस की टोकरी, सूपा, रसोई में मिट्टी, एलुमिनियम, पीतल के कुछ बर्तन, ओइ बिछाने के कपड़े, तीर-धनुष, टंगिया, मछली पकड़ने की कुमनी, दुट्टी, वाद्यंत्र में ढोल, नगाड़ा, टिसकी आदि होते हैं

इनका मुख्य भोजन चावल, कोदो, कुटकी का भात, पेज, मक्का की रोटी या पेज, उड़द, मूंग, अरहर की दाल, मौसमी सब्जी, जंगली कंदमूल फल, मांसाहार में मुर्गा, बकरा, मछली, केकड़ा, कछुआ, जंगली पक्षी, हिरण, खरगोश, जंगली सुअर का मांस आदि हैं। महुए से स्वयं बनाई। शराब पीते हैं। पुरुष तंबाकू को तेंदू पत्ता में लपेटकर चोंगी बनाकर पीते हैं। (बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

बैगा जनजाति | Baiga Janjati | Baiga Tribe Chhattisgarh
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बैगा जनजाति में स्त्रिया

बैगा जनजाति की महिलाएँ शरीर में हाथ पैर चेहरे पर स्थानीय बादी जाति की महिलाओं से गोडना गुदाती हैं। पुरुष लंगोटी या पंछा पहनते हैं। शरीर का ऊपरी भाग प्रायः खुला होता है। नवयुवक बंडी पहनते हैं। महिलाएँ सफेद लुगड़ा घुटने तक पहनती हैं। कमर में करधन, गले में रुपिया माला, चेन माला, सुतिया, काँच की मोतियों की गुरिया माला, हाथों में काँच की चूड़ियाँ, कलाई में ऍठी, नाक में लौंग, कान में खिनवा, कर्णफूल आदि पहनती हैं। इनके अधिकांश गहने गिलट या नकली चाँदी के होती हैं। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

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बैगा जनजाति का कृषि और व्यवसाय 

बैगा जनजाति के लोग पहले जंगल काटकर उसे जला कर राख में “बेवर” खेती करते थे। वर्तमान में स्थाई खेती पहाड़ी ढलान में करते हैं। इसमें कोदो, मक्का, मड़िया, साठी धान, उड़द, मूंग, झुरगा आदि बोते हैंजंगली कंदमूल संग्रह, तेंदू पत्ता, अचार, लाख, गोंद, शहद, भिलावा, तीखुर, बेचाँदी आदि एकत्र कर बेचते हैं।

पहले हिरण, खरगोश, जंगली सुअर का शिकार करते थे, अब शिकार पर शासकीय प्रतिबंध है। वर्षा ऋतु में कुमनी, कांटा, जाल आदि से स्वयं उपयोग के लिए मछली पकड़ते हैं। महिलाएँ बाँस की सुपा, टोकरी भी बनाकर बेचती हैं। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

बैगा जनजाति कई अंत: विवाही उपजातियाँ पाई जाती है। इनके प्रमुख उपजाति बिंझवार, भारोटिया, नरोटिया (नाहर), रामभैना, कटभैना, दुधभैना, कोडवान (कंडी), गोंडमैना, कुरका बैगा, सावत बैगा आदि हैं। उपजातियां विभिन्न बहिर्विवाही “गोती” (गोत्र) में विभक्त है। इनके प्रमुख गोत्र मरावी, धुर्वे, मरकाम, परतेती, र्तकाम, नेताम आदि हैं।

जीव-जंतु, पशु-पक्षी, वृक्ष, लता आदि इनके गोत्रों के टोटम होते हैं। यह जनजाति पितृवंशीय, पितृसत्तात्मक व पितृ निवास स्थानीय हैं। अर्थात् लड़कियों विवाह के पश्चात् वधू वर के पिता के घर जाकर रहने लगती है। उनके संतान अपने पिता के वंश के कहलाते हैं। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

संतानोत्पत्ति भगवान की देन मानते हैं। गर्भवती महिलाएँ प्रसव के पूर्व तक सभी आर्थिक व पारिवारिक कार्य संपन्न करती हैं। प्रसव घर में ही स्थानीय “सुनमाई” (दाई) तथा परिवार के बुजुर्ग महिलाएँ कराती है। प्रसूता को सोंठ, पीपल, अजवाईन, गुड़ आदि का लड्डू बनाकर खिलाते हैं। छठे दिन छठी मनाते हैं। प्रसूता व नवजात शिशु को नहलाकर कुल देवी-देवता का प्रणाम कराते हैं। घर की लिपाई पुताई करते हैं। रिश्तेदारों को शराब पिलाते हैं।

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बैगा जनजाति का रीती रिवाज 

विवाह उम्र लड़कों का 14-18 वर्ष तथा लड़कियों का 13-16 वर्ष माना जाता है। विवाह प्रस्ताव वर पक्ष की ओर से होता है। मामा बुआ के लड़के-लड़कियों के बीच आपस में विवाह हो जाता हैवर पक्ष द्वारा वधू पक्ष को “खर्ची” (वधूध न) के रूप में चावल, दाल, हल्दी, तेल, गुड़ व नगद कुछ रकम दिया जाता है। विवाह की रस्म बुजुगों के देखरेख में संपन्न होता है। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh)

लमसेना (सेवा विवाह), चोरी विवाह (सह पलायन), पैठ विवाह (घूसपैष्ठ), गुरावट (विनिमय) को समाज स्वीकृति प्राप्त है। पुनर्विवाह (खड़ोनी) भी प्रचलित है। मृत्यु होने पर मृतक को दफनाते हैं। तीसरे दिन घर की साफ-सफाई, लिपाई करते हैं। पुरुष दाढ़ी-मूंछ के बाल कटाते हैं। 10वें दिन दशकरम करते हैं, जिसमें मृतक की आत्मा की पूजा कर रिश्तेदारों को मृत्यु भोज कराते हैं।

इनमें परंपरागत जाति पंचायत पाया जाता है। इस पंचायत में मुकद्दम, दीवान, समरथ और चपरासी आदि पदाधिकारी होते हैं। पैटू, चोरी विवाह, तलाक, वैवाहिक विवाद, अनैतिक संबंध आदि का निपटारा इस पंचायत में परंपरागत तरीके से सामाजिक भोज या जुर्माना लेकर किया जाता है। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh)

बैगा जनजाति का देवी देवता 

इनके प्रमुख देवी-देवता बुढ़ा देव, ठाकुर देव, नारायण देव, भीमसेन, घनशाम देव, धरती माता, ठकुराइन माई, खैरमाई, रातभाई, बापदेव, बुढीमाई, दुल्हादेव आदि हैं। इनके पूजा में मुर्गा, बकरा, सूअर की बलि देते हैं। कभी-कभी नारियल, खरेक व दारू से ही पूजा संपन्न कर लेते हैं। (बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh)

इनके प्रमुख त्योहार हरेली, पोला, नवाखाई, दशहरा, काली चौदस, दिवाली, करमा पूजा, होली आदि हैं। जादू-टोना, मंत्र, तंत्र, भूत-प्रेत में काफी विश्वास करते हैं। “भूमका” इनके देवी-देवता का पुजारी व भूत-प्रेत भगाने वाला होता है

इनके प्रमुख लोक नृत्यों में करम पूजा पर करमा, नाच विवाह में बिलमा नाच, दशहरा में झटपट नाच नाचते हैं। छेरता इनका नृत्य नाटिका है। इनके प्रमुख लोकगीत करमा गीत, ददरिया, सुआ गीत, विवाह गीत, माता सेवा, फूल आदि हैं। इनके प्रमुख वाद्य यंत्र मांदर, डोल, टिमकी, नगाड़ा, किन्नरी, टिसको आदि है। ( बैगा जनजाति छत्तीसगढ़ Baiga janjati chhattisgarh baiga tribe chhattisgarh )

वर्ष 2011 की जनगणना में इस जनजाति में साक्षरता 40.6 प्रतिशत थी। पुरुषों में साक्षरता 50.4 प्रतिशत तथा महिलाओं में 30.8 प्रतिशत थी।

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source : Internet

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