कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh

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कमार जनजाति छत्तीसगढ़ - Kamar Janjati Chhattisgarh - Kamar Tribes Chhattissgarh
कमार जनजाति छत्तीसगढ़ – Kamar Janjati Chhattisgarh – Kamar Tribes Chhattissgarh

नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे कमार जनजाति छत्तीसगढ़ – Kamar Janjati Chhattisgarh – Kamar Tribes Chhattissgarh के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा ।

कमार जनजाति छत्तीसगढ़ – Kamar Janjati Chhattisgarh – Kamar Tribes Chhattisgarh

कमार जनजाति का उत्पत्ति

कमार जनजाति गरियाबंद जिले को गरियाबंद, छूरा, मैनपुर तथा धमतरी जिले के नगरी तथा मगरलोड विकासखण्ड में मुख्यत: निवासरत हैं। महासमुन्द जिले के महासमुंद एवं बागबाहरा विकासखण्ड में भी इनके कुछ परिवार निवासरत हैं। इस जनजाति को भारत सरकार द्वारा “विशेष पिछड़ी जनजाति” का दर्जा दिया गया है। 2011 की जनगणना अनुसार राज्य में इनकी जनसंख्या 26530 दर्शित है। इनमें 13078 पुरुष एवं 13460 स्त्रियाँ हैं।

कमार जनजाति अपनी उत्पत्ति मैनपुर विकासखण्ड के देवडोंगर ग्राम बताते हैं। इनका सबसे बड़ा देवता “वामन देव” आज भी देवडोंगर की “वामन डोंगरी” में स्थापित है। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

कमार जनजाति का रहन सहन  

इस जनजाति के लोगों के मकान घास फूस या मिट्टी के बने होते हैं। प्रकान में प्रवेश हेतु एक दरवाजा होता है, जिसमें लकड़ी या बाँस का किवाड होता है। छप्पर घास फूस या खपरैल की होती है। दीवारों पर सफेद मिट्टी की पताई करते हैं। फ का होता है, जिसे स्त्रियाँ गोबर से लीपती हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

घरेलू वस्तुओं में मुख्यतः अनाज रखने की कोठी, बांस की टोकनी, सूपा, चटाई, मिट्टी के बर्तन, खाट, मूसल बाँस बर्तन के औजार, ओढ़ने बिछाने तथा पहनने के कपड़े, खेती के औजार जैसे ती, फावड़ा, कुल्हाड़ी आदि। इस जनजाति के लोग शिकार करते थे, तीर-धनुष तथा मछली पकड़ने का जाल प्रायः घरों में पाया जाता है।

पुरुष व महिलाएँ प्रतिदिन दातौन से दाँतों की सफाई कर स्नान करते हैं। पुरुष बाल छोटे रखते हैं तथा महिलाएँ लम्बे बाल रखती हैं। बालों को कंधी या “ककता” की सहायता से पीछे की ओर चोटी या जूड़ा बनाती हैं। कमार लड़कियाँ 8-10 वर्ष की उम्र में स्थानीय देवार महिलाओं से हाथ, पैर, ठोड़ी आदि में गुदना गुदवाती हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

नकली चाँदी, गिलट आदि के आभूषण पहनती हैं। आभूषणों में हाथ की कलाई में ऐंठी, नाक में फुली, कान में खिनवा, गले में रुपियामाला आदि पहनती हैं। वस्त्र विन्यास में पुरुष पंछा (छोटी धोती), बण्डी, सलूका एवं स्त्रियाँ लुगड़ा, पोलका पहनती हैं

कमार जनजाति का मुख्य भोजन चावल या कोदो की पेज, भात, बासी के साथ कुलथी, बेलिया, मूंग, उड़द, तुवर की दाल तथा मौसमी सब्जियाँ, जंगली साग भाजी आदि होता है। मांसाहार में सुअर, हिरण, खरगोश, मुर्गा, विभिन्न प्रकार के पक्षियों का मांस तथा मछली खाते हैं। पुरुष महुवा से शराब बनाकर पीते हैं। पुरुष धूम्रपान के रूप में बोड़ी व चोंगी पीते हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

कमार जनजाति का व्यवसाय 

इस जनजाति का मुख्य व्यवसाय बांस से सुपा टुकना, झांपी आदि बनाकर बेचना, पक्षियों तथा छोटे वन्य जन्तुओं का शिकार, मछली पकड़ना, कंदमूल तथा जंगली उपज संग्रह और आदिम कृषि है। इनका मुख्य कृषि उपज कोदो, धान, उड़द, मूँग, बेलिया, कुलथी आदि है। इस जनजाति का आर्थिक जीवन का दूसरा पहलू वनोपज संग्रह है, जिसमें महुवा, तेन्दू, सालबीज, बांस, चिरौंजी, गोंद, आँवला आदि संग्रह करते हैं।

इसे बेचकर अन्य आवश्यक वस्तुएँ जैसे – अनाज, कपड़े इत्यादि खरीदते हैं। कुछ कमार लोग जंगल से शहद एवं जड़ी बूटी भी एकत्रित कर बेचते भी हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

कमार जनजाति में क्रमशः पहाड़पत्तिया और बंदरजीवा दो उपजातियाँ पाई जाती है। पहाड़पत्तिया कमार लोग पहाड़ में रहने वाले तथा सुंदरजीवा कमार मैदानी क्षेत्र में रहने वाले कहलाते हैं। इस उपजातियों में गोत्र पाये जाते हैं जगत. तेकाम मरकाम, सोढ़ी , मराई, छेदइहा और कुंजाम इनके प्रमुख गोत्र है। एक गोत्र के लोग अपने आपको एक पूर्वज की संतान मानते हैं।

एक ही गोत्र के लड़के-लड़कियों में विवाह निषेध माना जाता है। इस जनजाति में परिवार प्रायः केन्द्रीय परिवार पाये जाते हैं। ये पितृवंशीय पितृसत्तात्मक एवं पितु निवास स्थानीयते  होहैं, किन्तु विवाह के कुछ समय बाद लड़का पिता की झोपड़ी के पास नई झोपड़ी बनाकर रहने लगता है। त्योहार, सामाजिक कार्यों में सब एकत्रित हो जाते हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

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कमार जनजाति में स्त्रिया

कमार जनजाति की गर्भवती स्त्रियों प्रसव के दिन तक आर्थिक तथा पारिवारिक कार्य करती रहती हैं। प्रसव घर में ही कराया जाता है। नवजात शिशु, लड़का हो तो तीर से और लड़की हुई तो “कहरा” (बाँस की पंची) से नाल काटते हैं। नाल घर में ही गड्ढा खोदकर गड़ाते हैं। जन्म के छठवें दिन नवजात शिशु और प्रसूता को गरम पानी से नहलाया जाता है। इसके बाद तेल हल्दी लगाई जाती है एवं शराब पीकर परिवार के समस्त सदस्य खुशियाँ मनाते हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

इस जनजाति में लड़कों का विवाह प्रायः 18-19 वर्ष की उम्र में तथा लड़कियों का विवाह 16-17 वर्ष की उम्र में कर दिया जाता है। मामा या बुआ के लड़का-लड़की से विवाह को प्राथमिकता देते हैं। विवाह प्रस्ताव वर पक्ष की ओर से होता है। विवाह तय होने पर वर पक्ष द्वारा वधू पक्ष को चावल, दाल व नगद, कुछ रुपया “सुक भरना” के रुप में दिए जाते हैं।

विवाह रस्म कमार जनजाति में बड़े बूढ़ों की देख-रेख में संपन्न होती है। सामान्य विवाह के अतिरिक्त गुरांवट व घर जमाई प्रथा भी प्रचलित हैपैटू (घुसपैठ), उडरिया (सहपलायन) को परंपरागत सामाजिक पंचायत में समाजिक देंड के बाद समाज स्वीकृति मिल जाती है। विधवा, त्यक्ता, पुनर्विवाह (चूड़ी पहनाना) को मान्यता है। विधवा भाभी देवर के लिए चूड़ी पहन सकती है। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

मृत्योपरांत मृतक के शरीर को दफनाते हैं। तीसरे दिन तोजनहावन होता है, जिसमें परिवार के पुरुष सदस्य दाढ़ी मूंछ व सिर के बालों का मुंडन कराते हैं। घर की सफाई स्वच्छता कर सभी स्थान पर हल्दी पानी छिड़कर अपने शरीर के कुछ भागों में भी लगाते हैं। आर्थिक अनुकूलता अनुसार 10वें या 13वें दिन मृत्यु भोज देते हैं। यदि किसी कारणवश मृत्युभोज नहीं दे पाये तो वर्ष के अंदर आर्थिक अनुसार भोज दिया जाता है। 

कमार जनजाति में भी सामाजिक व्यवस्था बनाये रखने के लिए एक परंपरागत जाति पंचायत (सामाजिक पंचायत) होती है। कमार जनजाति के सभी व्यक्ति उस पंचायत का सदस्य होता है। इस पंचायत के प्रमुख “मुखिया” कहलाता है। सामान्य जातिगत विवादों का निपटारा गाँव में हो कर लिया जाता है। अनेक ग्रामों को मिलाकर एक क्षेत्रीय स्तर की जाति पंचायत पाई जाती है।

जब कोई त्योहार, मेला या सामूहिक पर्व मनाया जाता है, उस समय इस पंचायत की बैठक आयोजित की जाती है। इस पंचायत में वैवाहिक विवाद, अन्य जाति के साथ वैवाहिक या अनैतिक संबंध आदि विवादों का निपटारा किया जाता है।( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

कमार जनजाति छत्तीसगढ़ - Kamar Janjati Chhattisgarh - Kamar Tribes Chhattissgarh
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कमार जनजाति के देवी देवता

कमार जनजाति के प्रमुख देव कचना, धुरवा, बूढ़ादेव, ठाकुर देव, वामन देव. दूल्हा देव, बड़ी माता, मंझली माता, छोटी माता, बूढ़ी माई धरती माता आदि हैं। पोगरी देवता (कुलदेव), मांगरमाटी (पूर्वजों के गाँव व घर की मिट्टी). गाता हुमा ( पूर्वज ) की भी पूजा करते हैं। पूजा में मुर्गी, बकरा आदि की बलि भी चढ़ाते हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

इनके प्रमुख त्योहार हरेली, पोरा, नवाखाई, दशहरा, दिवाली, छेरछेरा, होली आती हैं। त्योहार के समय मुर्गी, बकरा आदि का मांस खाते एवं शराब पीते हैं। भूत-प्रेत, जादू-टोना पर भी विश्वास करते हैं। तंत्र-मंत्र का जानकार बैगा कहलाता है।

इस जनजाति की महिलाएँ दिवाली में सुवा नाचती हैं। विवाह में पुरुष व महिलाएँ दोनों नाचते हैं। पुरुष होली व दिवाली के समय खूब नाचते हैं। ( कमार जनजाति छत्तीसगढ़ Kamar janjati chhattisgarh kamar tribes chhattisgarh )

2011 की जनगणना अनुसार कमार जनजाति में साक्षरता 47.7 प्रतिशत दर्शित है। पुरुषों में साक्षरता 58.8 प्रतिशत तथा स्त्रियों में 37.0 प्रतिशत है।

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source : Internet

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