पाण्डु वंश छत्तीसगढ़ | Pandu Vansh Chhattisgarh | Pandy Dynasty Chhattisgarh

पाण्डु वंश छत्तीसगढ़ | Pandu Vansh Chhattisgarh | Pandy Dynasty Chhattisgarh

पाण्डु वंश छत्तीसगढ़

शासनकाल > ( 6 वी से 8 वी शताब्दी तक )

संस्थापक > इन्द्रबल ( आदिपुरुष उद्यान का पुत्र )

राजधानी > सिरपुर ( महासमुंद )

इसकी दो शाखाये थी :-

  1. दक्षिण  कौशल में पाण्डु वंश ( कालिंजर शिलालेख में उल्लेख )
  2. मैकल श्रेणी में सोम वंश थी ।


1.दक्षिण  कौशल में पाण्डु वंश 

ननराज प्रथम :-

  • इन्द्रबल के चार पुत्र में से एक था ।
  • शेष तीनो भाइयो को मण्डलधिपति के रूप में रखा था ।

तीवर देव :-

  • इसने सकल कोशलाधिपति उपाधि धारण किया था ।
  • इसके काल को पाण्डु वंश का उत्कर्ष कल कहते है ।
  • राजिम व बालोद के ताम्रपत्र से इसके पराक्रम का पता चलता है ।

ननदेव द्वितीय :-

  • इसने कौशलमंडलधिपति उपाधि धारण किया था ।
  • इसके एक मात्र ताम्रपत्र अड़भार से प्राप्त हुआ है ।
  • यह निसंतान था ।
  • इसलिए तीवरदेव का भाई चन्द्रगुप्त शासक बना  .

चन्द्रगुप्त :-

  • लक्ष्मण मंदिर सिरपुर में इसका नाम उल्लेख है ।
  • सिरपुर अभिलेख से जानकारी मिलती है ।

हर्षगुप्त :-

  • इनका विवाह मगध के मौखरि राजा सूर्यवर्मा की पुत्री वासता देवी से हुआ था ।
  • इसका पुत्र – महाशिवगुप्त बालार्जुन रणकेशारी थे ।
  • हर्षगुप्त की स्मृति में वासता देवी ने 6 वी शताब्दी में सिरपुर में लक्ष्मण मंदिर की नीव राखी थी ।
  • लक्ष्मण मंदिर के अंदर विष्णु की मूर्ति है ।
  • यह लाल ईंटो व नगर शैली में बना हुआ है ।

महाशिव गुप्त बालार्जुन रण केशरी :-

  • 595 से 655 ई तक (6 वर्ष )
  • लक्ष्मण मंदिर का अंतिम निर्माण कार्य पूर्ण किया ( 7 वी शताब्दी में )
  • 639 ई में चीनी यात्री ह्वेनसांग महाशिव गुप्त बालार्जुन के दरबार में आया था ।
  • ह्वेनसांग की रचना – सी-यु-की जिसमे छत्तीसगढ़ को  “किया-स-लो” के नाम से उल्लेख किया था ।
  • राजा को धनुर्विद्या के कारन बालार्जुन कहते है ।
  • हवेंगसांग ने सिरपुर व् मल्लार की यात्रा की थी ।
  • बालार्जुन ने परम परमेश्वर की उपाधि धारण किया था ।
  • बालार्जुन भगवन शिव को मानते थे ।
  • ह्वेनसांग भगवन बौद्ध को मानते थे ।
  • वासता  देवी भगवन विष्णु को मानती थी ।
  • ह्वेनसांग द्वारा सिरपुर में बुद्ध के विशाल मूर्ति का पता चलता है ।
  • बालार्जुन के 27 ताम्रपत्र प्राप्त हुए है ।
  • जिसे विष्णु ठाकुर व रमेन्द्रनाथ ने अध्यन किया ।
  • इसने पुलकेशिन द्वितीय का अधीनता स्वीकार किया था ।
  • बालार्जुन का शासन काल धार्मिक सहिष्णुता से श्रेठ था , तथा सभी धर्मो ने स्वतंत्रता पूर्वक जीवन व्यतीत किया इसलिए , बालार्जुन के शासन काल को प्राचीन इतिहास का स्वर्ग काल कहते है ।

नोट :- 

  • पाण्डु वंश के काल में छत्तीसगढ़ में मंदिरो का निर्माण मन जाता है ।
  • लक्षमण मंदिर का जीवनोद्धार > चिमन जी भोसले ने करवाया था

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