नगर घड़ी चौक रायपुर | Nagar Ghadi Chowk Raipur Chhattisgarh

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नगर घड़ी चौक रायपुर छत्तीसगढ़ | Nagar Ghadi Chowk Raipur Chhattisgarh

1.राजधानी में स्थित नगरघड़ी छत्तीसगढ़ लोक संस्कृति की पहचान है। इसे 1995 में नगर के मध्य स्थित पं. रविशंकर शुक्ला उद्यान में स्थापित किया गया था।

2.कांक्रीट से बने लगभग 50 फुट ऊँचे इसके स्तंभ के चारों ओर छह फुट व्यास की मैकेनिकल घड़ी लगाई गई थी। घड़ी में हर घंटे के बाद इसके बुर्ज में लगा घंटा बजता था।

3.वर्ष 2007 में मैकेनिकल घड़ी में लगातार आ रही तकनीकी खराबी के कारण रायपुर विकास प्राधिकरण ने इसे बदलने का निर्णय लिया। घड़ी को बदल कर जी.पी.एस प्रणाली वाली नई घड़ी लगाने का फैसला लिया गया।

4.जी.पी.एस. प्रणाली पर आधारित घड़ी सही समय बताती है। यह प्रणाली भारतीय सेना और भारतीय रेल द्वारा उपयोग की जा रही है।

5.रायपुर विकास प्राधिकरण ने छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को लोकप्रिय बनाने के लिए नगरघड़ी में हर घंटे के बाद बजने वाले घंटे की आवाज के पहले छत्तीसगढ़ की लोकधुनों को संयोजित करने का निर्णय लिया ताकि इससे आम आदमी भी छत्तीसगढ़ की लोकधुनों से परिचित हो सके।

6.सुबह 4 बजे से प्रारंभ कर के इन धुनों के नाम इस प्रकार हैं- 4.00 बजे सगीत, 5.00 बजे रामधुनी, 6.00 बजे भोजली, 7.00 बजे – पंथी नाचा, 8.00 बजे ददरिया, 9.00 बजे देवार गीत, 10.00 बजे करमा, 11.00 बजे भड़ौनी, दोपहर 12.00 बजे – सुआ गीत, 1.00 बजे भरथरी, 2.00 बजे – डंडा नृत्य, 3.00 बजे चंदैनी गोंदा, 4.00 बजे पंडवानी, शाम 5.00 बजे – राऊत नाचा, 6.00 बजे सरहुल, 7.00 बजे आल्हा, रात 8.00 बजे – गौरी – गौरा गीत, 9.00 बजे – गौर नृत्य, 10.00 बजे धनकुल, 11.00 बजे नाचा, 12.00 बजे – बांस गीत, 1..00 बजे – कमार गीत, 2.00 बजे – फाग गीत और 3.00 बजे – सोहर गीत की धुनें नगरघड़ी से सुनी जा सकती है।

7.छत्तीसगढ़ की लोकधुन सुनाने की अवधारणा के कारण नगरघड़ी को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में शामिल किया गया।


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