सिरपुर महासमुंद छत्तीसगढ़ | Sirpur Mahasamund Chhattisgarh

Sirpur Mahasamund Chhattisgarh – Sirpur Tourism Chhattisgarh India

Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India ( सिरपुर महासमुंद छत्तीसगढ़ )

 

पुण्य सलिला महानदी के तट पर स्थित सिरपुर का अतीत सांस्कृति समृद्धि तथा वास्तुकला के लालित्य से ओतप्रोत रहा है। सिरपुर प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात रहा है तथा पाण्डुवंशी शासकों के काल में इसे दक्षिण कोसल की राजधानी होने का गौरव प्राप्त रहा है। 

सिरपुर की प्राचीनता का सर्वप्रथम परिचय शरभपुरीय शासक प्रवरराज तथा महासुदेवराज के ताम्रपत्रों से उपलब्ध होता है, जिनमें “श्रीपुर” से भूमिदान दिया गया था। पाण्डुवंशी शासकों के काल में सिरपुर महत्वपूर्ण राजनैतिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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                                                         महाशिवगुप्त बालार्जुन के 57 वर्षीय, सुदीर्घ शासनकाल में यहां अनेक मंदिर, बौद्ध विहार, सरोवर तथा अद्यानों का निर्माण करावाया गया। सातवीं सदी ईस्वी में चीन के महान पर्यटक तथा विद्वान हवेनसांग ने सिरपुर की यात्रा की थी। उस समय यहां लगभग 100 संधाराम थे तथा महायान संप्रदाय के 10000 भिक्षु निवास करते थे। महाशिवगुष्त बालार्जुन ने स्वयं शेवमतावलंबी होते हुए भी बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक प्रचुर दान देकर संरक्षण प्रदान किया था।

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दर्शनीय स्थल

( Sirpur Secenic Spots)

 

1.लक्ष्मण मंदिर:-

( Sirpur Lakshman Mandir )

यह मंदिर ईटों से निर्मित भारत के सर्वोत्तम मंदिरों में से एक है। अलंकरण सौंदर्य, मौलिक अभिप्राय तथा निर्माण कौशल की दृष्टि से यह अपूर्व है। लगभग 7 फुट ऊंचे पाषाण निर्मित जगती पर स्थित यह मंदिर अत्यंत भव्य है। पंचरथ प्रकार का यह मंदिर गर्भगृह, अंतराल तथा मंडम से युक्त है। 

मंदिर ‘की बाहय भित््तियों में कूट द्वारा तथा वातायन आकृति, चैत्य गवाक्ष, भारवाहकगण, गज, कीर्तिमुख एवं कर्ण आमलक आदि अभिप्राय दर्शनीय है। मंदिर का प्रवेश द्वार अत्यंत आकर्षक है। द्वारशीर्ष पर शेषशायी विष्णु प्रदर्शित है। उभय द्वारशाखा पर विष्णु के प्रमुख अवतार, कृष्ण लीला के दृश्य, अलंकरणात्क प्रतीक, मिथुन दृश्य तथा वैष्णव द्वारपालों का अंकन है  ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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गर्भगृह के भीतर नागराज शेष की बैठी हुई सौम्य प्रतिमा रखी है। लक्ष्मण मंदिर का महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता वासटा ने अपने दिवंगत पति हर्षगुप्त की स्मृति में करवाया था। वासटा मगथ के राजा सूर्यवर्मन की पुत्री थी | अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर इस मंदिर का निर्माण काल ईस्वी 650 के लगभग मान्य है।

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2.गंथेश्वर मंदिर:( Sirpur Gantheshwar mandir )

महानदी के तट पर स्थित इस मंदिर का प्राचीन नाम गंथर्वेश्वर था। यह सतत पूजित शिव मंदिर है। इसका निर्माण प्राचीन मंदिरों एवं विहारों से प्राप्त स्थापत्य खण्डों से किया गया है। मंदिर परिसर में अनेक कलात्मक प्रतिमाएं संरक्षित की गई है। द्वारशाखा के विविध दृश्य है। इन्हीं दृश्यों में रावण के शीर्ष पर गर्दभ मुख निर्मित है।  ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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3.बैद्ध विहार:-( Sirpur Baudh Vihar )

बौद्धधर्म से संबंधित अवशेषों की दृष्टि से सिरपुर का विशेष महत्व है। उत्खनन कार्य से यहां दो बौद्ध विहार के अवशेष प्रकाश में आये हैं। विहारों के निर्माण में मुख्य रूप से ईटों का उपयोग किया गया है | 

इन विहारों की तल योजना में गुप्तकालीन मंदिर तथा आवसीय भवन निर्माण कला का सुंदर समन्वय है। विहार में प्रमुख स्थाविर तथा अन्य भिक्षुओं के ध्यान, अध्ययन-अध्यापन तथा निवास की सुविधा थी। इन विहारों के मुख्य कक्ष में भगवान बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा में लगभग साढ़े छः फूट ऊंची प्रतिमा प्रस्थापित है। इनके अतिरिक्त अवलोकितेश्वर तथा मकरवाहिनी गंगा भी मिली है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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यहां के प्रमुख विहास से मिले अभिलेख से ज्ञात होता है कि महाशिवगुत प्त बालार्जुन के राजत्वकाल में आनंदप्रभु नामक मि्षु ने इसा करवाया था | इस मठ में निवास के लिए 14 कमरे थे। यह विहार दो मंजिला था विहार के सम्मुख तोरणद्वार था, जिसके दोनों ओर द्वारपालों की प्रतिमायें रही है। 

अभिलेख के आधार पर इस विहार का नामकरण आनंदप्रभु कुटी विहार किया गया है। इसी के सन्निकट एक अन्य ध्वस्त विहार भी उत्खनन से प्रकाश में आया. है। तल योजना के आधार पर इसे स्वास्तिक विहार के नाम से जाना जाता है। 

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यहां पर भी भूमिस्पर्श मुद्रा में बुद्ध की प्रतिमा प्रस्थापित है। सिरपुर से बौद्धधर्म से संबंधित पाषाण प्रतिमाओं के अतिरिक्त धातु प्रतिमायें तथा मृण्मय पुरावशेष भी उपलब्ध हुए है।

4.राम मंदिर:( Sirpur Ram mandir )

लक्ष्मण मंदिर से कुद दूरी पर पूर्व की ओर ईटों से निर्मित एक भग्न तथा जीर्ण-शीर्ण अवशिष्ट है। यह राममंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर के ऊर्ध्व विन्यास में कोण तथा भुजाओं के संयोजन से निर्मित प्रतिरथ ताराकृति की रचना करते है। इस कलात्मक मंदिर का संपूर्ण शिखर नष्ट हो चुका है तथा भग्नप्राय भित्तियां बच रहे है। लक्ष्मण मंदिर तथा राम मंदिर के निर्माण में कुछ दशकों का अंतराल है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

 

 

संग्रहालय

( Sirpur Museum )

लक्ष्मण मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्वीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा स्थापपित संग्रहालय में सिरपुर से प्राप्त अनेक दुर्लभ प्रतिमाएं तथा स्थापत्य खण्ड संरक्षित कर रखी गई है। ये कलाकृतियां शैव, वैष्णव, बौद्ध तथा जैन धर्म से संबंधित है।

 एक अंगड़ाई लेती हुई नायिका की प्रतिमा में सौंन्दर्य, अनुराग तथा चपलता का अदभुत सामंजस्य है। काले पाषाण से निर्मित चतुर्मुख शिवलिंग के प्रशांत मुख पर लास्य के भाव है। उनके कंठ तथा जटा-जूट में मुक्ताहार गुंफित है। 

केशीवध को प्रदर्शित करती हुई प्रतिमा में कृष्ण तथा अश्व का अंकन अत्यंत प्रभावोत्पादक है। महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा में देवी के अनुग्रह तथा संहारक शक्ति की व्यंजना है। 

इसके अतिरिक्त यहां अन्य प्रतिमायें भी प्रदर्शित है, जिनमें नृसिंह, अंबिका, चामुंडा, विष्णु, सुर्य प्रतिमा के भाग, शिशु सहित दा , जैन तीर्थकर, दुर्गा, नाग पुरूष तथा बुद्ध विशेष महत्वपूर्ण है। सिरपुर से संग्रहित नाग पुरूष की एक मानवाकार प्रतिमा रायपुर संग्रहालय में भी प्रदर्शित है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

 

 

धातुप्रतिमायें

( Sirpur Metallic Images)

 सातवीं-आठवीं सदी ईस्वी में सिरपुर धातु प्रतिमाओं के निर्माण के केन्द्र के रूप में स्थापित हो चुका था। इस काल में सिरपुर महायान धर्म का प्रसिद्ध केन्द्र था। सिरपुर में सर्वप्रथम 1939 में धातु प्रतिमाओं का भण्डार प्राप्त हुआ था।

सिरपुर से प्राप्त धातु प्रतिमायें रायपुर, नागपुर, नई दिल्‍ली स्थित संग्रहालयों तथा मुम्बई के भारतीय विद्या भवन में संरक्षित है। सिरपुर से प्राप्त धातु प्रतिमाओं का प्रदर्शन इंग्लैंड, जर्मनी तथा अमेरिका में किया जा चुका है।

सिरपुर की धातु प्रतिमाओं में “श्री” एवं ‘शील” का अद्भुत संतुलन है। यहां से प्राप्त धातु प्रतिमाओं में बुद्ध, अवलोकितेश्वर प्रदूमपणि, वज़पाणि, मंजूश्री, तारा आदि के अतिरिक्त ऋषभनाद तथा विष्णु की धातु प्रतिमायें भी उपलब्ध हुई है। 

इन प्रतिमाओं के प्रदीप्त मुख, अर्ध निलिम्ब नेत्र, बरद मुद्रा युक्त हथेली की अंगुलियों एवं पारिधान की तरंगवत सिलवटों में आध्यत्मिक सौंदर्य के साथ कला का चरमोत्कर्ष व्याप्त है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )             

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उत्खनन

( Sirpur Excavation)

सिरपुर के तिमिराच्छादित अतीत के परतों को अनावृत करने के उद्देश्य से पुरातत्व विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से श्री एम.जी दीक्षित के निर्देशन में उत्खनन कार्य संपादित किया गया था | उत्खनन से यहां पर टीले के भीतर दबे हुए दो बौद्ध विहारों को क्रमशः अनावृत किया गया है। 

इनमें से एक का नाम आनंदप्रभु कुटी विहार तथा दूसरे का स्वास्तिक विहार रखा गया है। सिरपुर के उत्खनन से लगभग 2000 से अधिक वस्तुएं प्राप्त हुई है। ‘उत्खनित वस्तुओं में धातु प्रतिमा, प्रतिमिफलक, आभूषण बनाने के विविध उपकरण, लोहे के अनेक प्रकार के बर्तन, कीलें-ताले, जंजीर, सिलबट्टा, दीपक, पूजा के पात्र, घड़े, मिट्ठी के मटके, कांच की चूड़ियां, पकी मिट्टी की मुहरें एवं खिलौने तथा तीन सिक्‍के भी मिले है।

 इनमें से एक सिक्का शरभपुरीय शासक प्रसन्‍नमात्र का है तथा दूसरा कलचुरी शासक रत्नदेव के समय का है। तीसरा सिक्का विशेष महत्वपूर्ण है। यह सिक्का चीनी राजा काई युवान (713 से 741 ईस्वी) के समय का है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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राजमहल अवशेष:( Sirpur Rajmahal Remains )

सिरपुर में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के समीप महानदी के तट पर स्थित है | डॉ. ए. के शर्मा द्वारा (2000-01) में किये गये उत्खनन में एक विशाल परिसन के अवशेष उपलब्ध हुये, जिसे उन्होंने राजमहल के नाम से अभिहित किया। 

यहां से प्राप्त अवशेषों में भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी की प्रतिमाएं महत्वपूर्ण है। वर्ष 200। से वर्ष 2004 के मध्य सिरपुर में डॉ. अरूण कुमार शर्मा रिटायर्ड सुप्रिन्टेंडिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा नागार्जुन बोधिसत्व संस्थान मनसर के तत्वावधान में उत्खनन कार्य संपादित किया गया |  ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

 

 

 

इस अवधि में निम्नालिखित स्मारक अवशेष अनावृत किये गये-

( During This peroid following Sirpur Memorial remains were uncovered )

 

1. बौद्ध विहास (तीवर देव महाविहार)-( Sipur Baudh Vihar)

दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) में अब तक के सबसे बड़े विहार के रूप में परिगणित तीवरदेव बौद्ध विहार अरूण कुमार शर्मा महोदय (2002-03) के उत्खनन के दौरान प्राप्त हुआ। यह बौद्ध विहार कसडोल जाने वाले मार्ग पर दाहिने ओर लक्ष्मण मंदिर से लगभग 1 कि.मी. पूर्व स्थित है। वस्तुत: यह पूरा क्षेत्र एक बौद्ध सांस्कृतिक संकुल ही है। 

क्योकि इसी परिसर में अन्य विहार, बौद्ध भिक्षुणी बिहार भी स्थित है। किन्तु तीवर देव महाविहार अपनी विशालता, भव्यता, अद्भुत शिल्प कौशल की दृष्टि से अद्वितीय है। उत्खनन के दौरान प्राप्त अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर उत्खननकर्ता द्वारा इसे तीवर देव महाविहार के नाम से अभिहित किया गया है | 

यह बौद्ध महाविहार लगभग 902 वर्ग मी. परिक्षेत्र में निर्मित है, जिसे लगभग दो भागों में विभाजित किया जा सकता है| प्रथम विहार के मध्य में 16 अलंकृत प्रस्तर स्तंभों वाला मण्डप हैं, जिसका आकार 8.6 गुणा 7.6 मी. है। 

इन स्तंभों पर ध्यानी बुद्ध, सिंह, मोर, चक्र आदि का सुंदर शिल्पांकन है। इस विहार की योजना भी सामान्य विहारों के अनुरूप है। चारों ओर भिक्षुओं की कोठरियां एवं मध्य में आंगन है। गर्भगृह में पश्चिम में निर्मित गर्भगृह (2.4 गुणा 1.4 मी.) में भगवान बुद्ध की एकाश्मक, भूमि स्पर्श मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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बुद्ध के अतिरिक्त गर्भगृह से रत्नसंभव तथा पद्मपणि की प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थी । गर्भगृह के सामने वाले मण्डप के चारों ओर लगभग 2.25 मी. चौड़ा गलियारा है। इस विहार में जल निकासी के लिए प्रस्तर निर्मित भूमिगत नाली के अवशेष भी प्राप्त हुए है। 

इस विहार के कक्षों को कालातंर में लघु गर्भगृहों (पूजा कक्षों) में परिवर्तन पश्चात्‌ इस विहार के दक्षिण दिशा की ओर विस्तार किया गया तथा अनेक नवीन कक्षों का निर्माण किया गया तथा पूर्व की अपेक्षा एक अन्य बड़े मण्डप का (12.5 गुणा 9मी.) भी निर्माण किया गया तथा चारों ओर 36 मी. लम्बा एवं 1.5 मी. चौड़ा गलियारा है। 

यह मण्डप 10 स्तंभों पर आधारित था। इस विस्तारित बाग में कतिपय सोपनों (सीढ़ियों) की प्राप्ति के आधार पर उत्खनन कर्ता द्वारा इसके दो मंजिला होने का अनुमान किया गया है।

इस विहार की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत अलंकृत प्रवेश द्वार है, जिसे देखकर बौद्ध विहार की अपेक्षा किसी मंदिर के गर्भगृह के प्रवेशद्वार की द्वार शाखाओं का स्मरण होता है | इस विहार के प्रवेश द्वार के शिल्पांकन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पशु मैथुन का दृश्य है। जिसमें हाथियों को मैथुन मुद्रा में प्रदर्शित किया गया है | यह इसलिए भी रोचक एवं जिज्ञासावर्द्धक है कि प्राय: बौद्ध विहारों में इसके शिल्पांकन का अभाव है | 

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इसी प्रकार पंचतंत्र वर्णित मगरमच्छ एवं वानर की कथा का उत्कीर्णन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। तथा मंगोलियाई हाव-भाव युक्‍त नारी मूर्तियों के साथ-साथ आलिंगनबद्ध प्रणय प्रदर्शित करती युगल मूर्तियां भी आकर्षण का केन्द्र है।

शिल्पाकन की दृष्टि से यह प्रवेश द्वार दक्षिण कोसल की उच्च कला दक्षता को प्रदर्शित करता है। उपर्युक्त वर्णित शिल्पाक॒नों के अतिरिक्त भेड़ों की लड़ाई एवं उन्हें प्रोत्साहित करते उनके स्वामी का दृश्यांकन समकालीन परिवेश में मनोरंजन के साधनों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। 

इसी प्रकार कुम्हार द्वारा चाक पर मिट्टी के बर्तन का दृश्य तत्कालीन व्यवसाय एवं उसके महत्व की दृष्टि से उल्लेखनीय है| उत्खनन के दौरान उपलब्ध अभिलेखीय एवं अन्य प्रमाणों के आधार पर इस महाविहार के तीवर के शासनकाल में छठी शताब्दी के मध्य में निर्मित होने का अनुमान किया जा सकता है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

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2. शिव मंदिर समूह (शिव मंदिर क्रमांक1):( Sirpur shivmandir collections No.1)

स्व. दीक्षित जी के निर्देशन में लक्ष्मण मंदिर के उत्तरी पार्श्व से लगभग 300 मी दूर प्रस्तर खंडों द्वारा निर्मित अधिष्ठान पर पश्चायतन शैली का शिव मंदिर स्थित है। इसमें साढ़े चार फूट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है, जिसके सम्मुख ईंटों की दो कोठरियां थी।

शिव मंदिर क्रमांक 2:( Sirpur shivmandir no.2)

यह आनंद प्रभु कुटी विहार के समीप सिरपुर से सेनकपाट जाने वाले मार्ग पर भग्नावस्था में स्थित है। वर्तमान में मंदिर का गर्भगृह, शिवलिंग सहित तथा अन्तराल एवं मण्डप दृष्टव्य है।

शिव मंदिर क्रमांक 3:( Sirpur shivmandir no.3)

इस पश्चिमभिमुख शिव मंदिर का अधिष्ठान प्रस्तर खंडों व शेष मंदिर इष्ठिटका निर्मित है। पंचरथ शैली में निर्मित इस मदिर की भू योजना मात्र शेष है। मंदिर की योजना मे मुख्य गर्भगृह, अंतराल व मंडप है | गर्भगृह में योनिपीठ में चार फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है। इसके अतिरिक्त मंदिर में एक अन्य शिवलिंग एवं परंपरागत प्रमालिका भी है। 

पंचायतन बालेश्वर महादेव मंदिर: बोधिसत्व नागार्जुन स्मारक संस्था व अनुसंधान केन्द्र मनसर (नागपुर) द्वारा श्री अरूण कुमार शर्मा के संचालन में हुए उत्खनन में इस महत्वपूर्ण शैव मंदिर की प्राप्ति हुई है।

लक्ष्मण मंदिर से लगभग 1 कि.मी. बहले बांए पार्श्व में यह मंदिर स्थित है| वस्तुतः तारकृति भू योजना पर निर्मित यह युगल मंदिर है, जो पृथक-पृथक काले प्रस्तर खंडों द्वारा निर्मित अधिष्ठानों पर स्थित है।  ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

मंदिरों का नामकरण महाशिवगुप्त की बालार्जुन उपाधि एवं उसके ताम्रपत्र में उललेखित बालेश्वर मंदिर के आधार पर किया गया है। इस युगल शिव मंदिर के चारों कोनों पर एक-एक अन्य मंदिर के अवशेष मिले है | 

मंदिर की निर्माण योजना में गर्भगृह, अंतराल, मण्डप तथा एक से अधिक बरामदो को विभाजित करने के लिए दीवारों तथा अलंकृत युगल एवं सिंह आदि की मूर्तियां स्थापित की गई है। साथ ही विभिन्‍न कथाओं का अंकन है | मंदिर के उत्खनन से प्राप्त मृण-मृदा तथा अभिलेख आदि के अध्ययन एवं लिपि शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर इस मंदिर काल लगभग सातवीं सदी ईसवी ज्ञात होता है।

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अन्य पर्यटन स्थलः

( Sirpur Other Tourist Places )

1. बारनवापारा:( Sirpur Baranwapara )

सिरपुर से 15 कि.मी. की दूरी पर बरबसपुर नाके से अभ्यारण्य में प्रवेश किया जा सकता है| यह अभ्यारण सन्‌ 1976 से अस्तित्व में आया एवं इसका काल क्षेत्रफल 244.66 कि.मी. है। यहां औसतन 1200 मिमी. वर्षा होती है तथा तापमान 4Degree Celsius से 46 Degree Celsius बार-नवापारा का नाम अभ्यारण्य के हृदय स्थल पर बसे दो वन्य ग्रामों बार व नवापारा) पर आधारित है |

 यह वन क्षेत्र रायपुर जिले के उत्तर-पूर्वी दिशा में है, भौगोलिक विशेषताओं से युक्त एक ऐसा भूमि क्षेत्र है, जो कई छोटे-बड़े टीलों से निर्मित है । उसका दक्षिणी पूर्वी भाग मैदानी है, जबकि उत्तरी भाग पहाड़ियों से घिरा हुआ है|

2. नारायणपुर:( Sirpur Narayanpur )

रायपुर जिले मे सिरपुर कसडोल मार्ग पर ठाकुरदिया ग्राम से 7-8 कि.मी. दूर नारायणपुर स्थित है | महानदी के तट पर बसे नारायणपुर में 11वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर दर्शनीय है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

 

कैसे पहुंचे:( How to Reach Sirpur )

वायु मार्ग:- 

रायपुर निकटमत हवाई अड्डा है जो मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलूरू, विशाखापट्नम, चेन्नई एवं नागपुर से वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग:-

हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर रायपुर समीपस्थ रेलवे जंक्शन है।

सड़क मार्ग: 

रायपुर से सिरपुर तक की कुल दूरी 85 कि.मी. है। रायपुर से संबलपुर की ओर जाने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 6 पर लगभग 67 वें कि.मी. पर स्थित कुम्हारी ग्राम के मोड़ के उत्तर की ओर यह लगभग 18 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। रायपुर तथा महासमुंद से सिरपुर के लिए बस सेवा उपलब्ध है।

 

आवास व्यवस्था:-( Housing system in sirpur )

छ.ग. पर्यटन मंडल द्वारा संचालित व्हेनसांग टूरिस्ट रिसॉर्ट सिरपुर तथा रायपुर नगर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अनेक होटल उपलब्ध है। ( Sirpur Mahasamund Chhattisgarh : Sirpur Tourism Chhattisgarh India )

इन्हे भी एक-एक बार पढ़ ले ताकि पुरानी चीजे आपको Revise हो जाये :-

👉रतनपुर बिलासपुर छत्तीसगढ़

👉इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय

👉रायपुर का इतिहास

👉मल्हार बिलासपुर का इतिहास

👉The Love Story of Bhilai Me And Her

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