छत्तीसगढ़ के शैलचित्र | Chhattisgarh Ke Shailchitra

मेरे प्यारे दोस्तों आज हम आपको ” छत्तीसगढ़ के शैलचित्र  की जानकारी देने वाले है। यहाँ जानकारी आपको छत्तीसगढ़ के किसी भी परीक्षा में पूछे जा सकते है , या आप किसी चीज के बारे में रिसर्च करना चाहते है, या आप फिर छत्तीसगढ़ में घूमना चाहते है तो यहाँ जानकारी आपके बहुत ही काम आएगी। इसलिए आप इस लेख को ध्यान से पढ़े और अपनी राय दे।

Chhattisgarh shailasrya aur puratatvik sthal
Chhattisgarh shailasrya aur puratatvik sthal

प्रागैतिहासिक काल के मानव संस्कृति का अध्ययन एक रोचक विषय है | छत्तीसगढ़ अंचल में प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों का विस्तृत श्रृंखला ज्ञात है | पुरातत्व की एक विधा चित्रित शैलाश्रयों का अध्ययन है| चित्रित शैलाश्रयों के चित्रों के अध्ययन से विगत युग की मानव संस्कृति, उस काल के पर्यावरण एवं प्रकृति की जानकारी प्राप्त होती है। ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

लिपि के अभाव में आदि मानव की अंतः चेतना के दर्पण ये शैलचित्र प्रागैतिहासिक काल को जानने की कड़ी है। छत्तीसगढ़ राज्य चित्रित शैलाश्रयों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां मध्याश्मीय काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के शैलचिंत्र प्राप्त होते हैं। रायगढ़, बस्तर, कांकेर, दुर्ग, कोरिया आदि जिलों के विभिन्‍न क्षेत्रों में स्थित चित्रित शैलाश्रय आदि मानव की कथा सुनाते हैं। ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वप्रथम चित्रित शैलाश्रयों की खोज सन्‌ 1910 में एंडरसन के द्वारा की गई थी | इंडिया पेंटिग्स 1948 में तथा इन्साइक्लोपिडिया ब्रिटेनिका के 13वें अंक में रायगढ़ जिले के सिंघनपुर के शैलचित्रों का प्रकाशन किया गया |

तत्पश्चात्‌ श्री अमरनाथ दत्त ने सन्‌ 1923 से 1927 के मध्य सर्वेक्षण किया | डॉ. एन.घोष, डी.एच. गार्डन द्वारा इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई | तत्पश्चात्‌ स्व. पं. श्री लोचन प्रसाद पाण्डेय द्वारा भी शैलचित्रों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई गई ।

Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh

सिंघनपुर- रायगढ़-खरसिया रोड पर रायगढ़ से पश्चिम में 20 कि.मी. की दूरी पर यह शैलाश्रय स्थित है। सिंघनपुर शैलाश्रय प्राचीनतम्‌ शैलाश्रयों में से एक है। यहां के चित्र लगभग धुधंले हो चुके हैं। इनमें सीढ़ीनुमा पुरूषाकृति, मत्स्यकन्या (मरमेड), पशु आकृतियां, शिकार दृश्य आदि का अंकन है। ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

कबरापहाड़- रायगढ़ जिला मुख्यालय से 8 कि.मी. पूर्व में स्थित कबरापहाड़ के चित्र गैरिक रंग के हैं। ये चित्र अन्य स्थानों से ज्यादा सुरक्षित व विविध प्रकार के हैं| यहां जंगली भैंस, कछुआ, पुरूषाकृति, ज्यामितिक अंलकरण का अंकन पूरक शैली में है।

बसनाझर- सिंघनपुर से दक्षिण पश्चिम में लगभग 17 किमी. दूर ग्राम बसनाझर स्थित हैं | इस ग्राम के समीप पहाड़ी श्रृंखला में लगभग 300 से अधिक चित्र अंकित किये गये हैं। इसमें हाथी, गेंडा, जंगली भैंसा, आखेट दृश्य, ज्यामितिक अलंकरण, नृत्य आदि चित्रित हैं।

ऑगना- रायगढ़ से 72 कि.मी. दूर उत्तर की ओर धर्मजयगढ़ के निकट ओंगना ग्राम के निकट बानी पहाड़ी पर स्थित शैलाश्रय में 100 से अधिक चित्र बने हैं। यहाँ पहले से बने शैल चित्रों के उपर बाद में बनने वाले शैल चित्र अंकित हैं| यहां बड़े ककुदवाले बैल, उनका समूह, मानवाकृतियों के सिर पर विशेष प्रकार की सज्जा, नृत्यदृश्य आदि का अंकन है | ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

Chhattisgarh shailasrya aur puratatvik sthalvChhattisgarh shailasrya aur puratatvik sthal
Chhattisgarh shailasrya aur puratatvik sthal

कर्मागढ़- रायगढ़ से 30 कि.मी. दूर कर्मागढ़ शैलाश्रय में 325 से अधिक चित्र अंकित है | यहां ज्यामितिक अलंकरण व बहुरंगी आकृतियों का अंकन है |

खैरपुर- रायगढ़ से 12 कि.मी. की दूरी पर उत्तर की ओर टीलाखोल जलाशय के निकट पहाड़ी में नृत्य, दृश्य तथा पशुपक्षियों का अंकन है, ये चित्र ऐतिहासिक है |

बोतल्दा- बिलासपुर-रायगढ़ मार्ग पर खरसिया से 8 कि.मी. पश्चिम मे बोतल्दा ग्राम है | इस ग्राम के उत्तर में लंबी पहाड़ी श्रूखला पर 2000 फीट की ऊंचाई पर सिंह गुफा स्थित है। यहां मध्याश्म काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के शैलचित्र हैं। इनमें पशु, शिकार दृश्य,
ज्यामितिक अलंकरण आदि हैं।

भंवरखोल- बिलासपुर से रायगढ़ मार्ग पर खरसिया से 72 कि.मी. दूर सूतीघाट पर पतरापाली ग्राम के मध्य उत्तर में स्थित पहाड़ी श्रृख॑ला में चित्रित शैलाश्रय है, जो भंवरखोल के नाम से प्रसिद्ध है। यहां चित्र सफेद, गैरिक, व अन्य रंगों से बने हैं। यहां मत्स्यकन्या, जंगली भैंस, भालू, शिकार दृश्य, ज्यामितिक अलंकरण, स्वास्तिक, हथेली आदि का अंकन है| ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

अमरगुफा- खरसिया से 02 कि.मी. दूर मुख्य मार्ग से दक्षिण में 44 कि.मी. दूर सोनबरसा नामक ग्राम के पूर्व में स्थित पहाड़ी अमरगुफा के नाम से विख्यात है। यहां पशु आकृतियां, मानवाकृतियां, आखेट दृश्य आदि का अंकन है।

सूतीघाट- बिलासपुर- रायगढ़ मार्ग पर पतरापाली ग्प्रम के समीप सूतीघाट में भी चित्रित शैलाश्रय है। इनमें कृषि दृश्य, किसान हाथ में हल लिए दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त पशु आकृतियों का अंकन भी है।

गाताडीह- सारंगढ़ के समीप स्थित गाताडीह में भी चित्रित शैलाश्रय है। इनमें पशु आकृतियां, शिकार दृश्य, मानवाकृतियों का अंकन है |

सिरौलीडों गरी- सारंगढ़ नगर से उत्तर पश्चिम में 5 कि.मी. दूर स्थित सिरौली-डोंगरी के शैलाश्रय में भी चित्र पाये जाते हैं। इनमें मानवाकृतियां, शिकार दृश्य व पशुओं का अंकन है | ये चित्र गैरिक रंग के हैं । ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

बौनीपाट- रायगढ़ से 32 कि.मी. की दूरी पर भैंसगढ़ी के बांस के जंगलों यह शैलाश्रय स्थित है | यहां के अधिकांश चित्र धुंधले हो चुके हैं | इन चित्रों में ज्यामितिक अलंकरण बहुतायत में है।

उड़कुड़ा- चारामा तहसील के ग्राम उड़काड़ा में मेगालिथिक अवशेष लघु अश्मोपकरण के साथ शैल चित्र भी प्राप्त होते हैं | यहां तीन स्थानों पर चित्रित शैलाश्रय हैं जोगीबाबा का स्थान, चंदा परखा व कचहरी | यहां के चित्रों में हथेली, पैरों के चिन्ह, पशुओं का अंकन व धनुर्धारी प्रमुख हैं |

गारागौड़ी- चारामा से होकर जाने वाले मार्ग में चारामा से 9 किमो दूर स्थित ग्राम गारागौड़ी के समीप पहाड़ी श्रृखंला में शीतलामाता नामक स्थान पर चित्रों का अंकन है। अधिकांश चित्र धुंधले हो चुके हैं | इनमें पशु आकृतियों का अस्पष्ट अंकन दिखाई देता है। ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

खैरखेड़ा- चारामा से कांकेर जाने वाले मार्ग पर चारामा से दक्षिण में कानापोड़ से पश्चिम में 5 कि.मी. दूर स्थित खैरखेड़ा ग्राम से दक्षिण में स्थित पहाड़ी श्रृखंला में शैलाश्रय है, जिसे बालोरा के नाम से जानते हैं। इन चित्रों में पशु आकृतियां, मानवाकृतियां, धनुर्धर, हथेली का अंकन है।

कुलगांव- कांकेर से 12 कि.मी. दूर स्थित कुलगांव की पहाड़ी श्रृखंला में चित्रित शैलाश्रय स्थित है। यहां पशुओं का अंकन है |

कान्हागांव- कांकेर से पश्चिम में देवरी मार्ग पर 20 कि.मी. की दूरी पर पीढ़ापाल के समीप चित्रित शैलाश्रय है। यहां मानवाकृतियां व पशुओं के चित्र अंकित हैं। ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

गोटीटोला- चारामा – कांकेर मार्ग पर लखनपुरी ग्राम से 8 कि.मी. दूर स्थित गोटीटोला ग्राम के मधुबनपारा से 3 कि.मी. दूर दक्षिण पश्चिम में सीतारामगुड़ा स्थान पर शैल चित्र मिलते हैं। शैलश्रयों के ऊपर में आखेट दृश्यों का अंकन है।

घोड़सार- सोनहत क्षेत्र में बदरा की पहाड़ियों में चित्रित शैलाश्रय घोड़सार के नाम से जाने जाते हैं। इनमें पशु आकृतियां एवं मानवाकृतियां सफेद रंग से चित्रित किये गये हैं।

कोहबउर- जनककेुर क्षेत्र में मुरेरगढ़ की पहाड़ी पर कोहबउर चित्रित शैलाश्रय स्थित है। यहां विभिन्‍न रंगों से ज्यामितिक आकृतियां, मानवाकृतियां एवं आखेट दृश्यों का चित्रण है। ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

चितवा डोंगरी- यह दल्ली राजहरा मार्ग पर ग्राम सहगांव के पास अवस्थित है। अधिकांश चित्र लाल गेरू रंग से बने हुए हैं। चित्रों में मुख्य रूप चीनी आकृति खच्चर के ऊपर सवार दिखाई दे रही हैं। इसके साथ ही एक ड्रेगन की तरह चित्र दिखाई दे रहा है। यहां के शैलचित्र
धूमिल तथा अस्पष्ट स्थिती में हैं।

इन स्थानों के अतिरिक्त बस्तर अंचल में केशकाल, लिमदरिया एवं सरगुजा अंचल में सीतालेखनी, ओड़गी आदि अनेक स्थानों पर चित्रित शैलाश्रय पाये गये है।

आवास व्यवस्था:- रायपुर में ठहरने के लिए उच्च स्तर के होटल्स के अतिरिक्‍त पर्यटन मंडल के पर्यटन आवासीय भवन है।

कैसे पहुंचे

वायु मार्ग: रायपुर निकटतम हवाई अड्डा है जो मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलूरू, विशाखापट्नम, चेन्नई एवं नागपुर से वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर रायपुर और बिलासपुर निकटस्थ रेलवे जंक्शन है।

सड़क मार्ग: रायपुर से निजी वाहन से यात्रा की जा सकती है ( Chhattisgarh Ke Shailchitra : Puratatvik Sthal Rock Paintings of Chhattisgarh )

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