कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान | Kanger Ghati Rashtriya Udyan Chhattisgarh

मेरे प्यारे दोस्तों आज हम आपको कांगेर घाटीकी जानकारी देने वाले है। यहाँ जानकारी आपको छत्तीसगढ़ के किसी भी परीक्षा में पूछे जा सकते है , या आप किसी चीज के बारे में रिसर्च करना चाहते है, या आप फिर छत्तीसगढ़ में घूमना चाहते है तो यहाँ जानकारी आपके बहुत ही काम आएगी। इसलिए आप इस लेख को ध्यान से पढ़े और अपनी राय दे।

कांगेर घाटी एक संतोषप्रद, अवर्णनीय एवं बेजोड़ प्राकृतिक अनुभव का वादा करता है।

अत्यंत मनोहारी दृश्यावली अपने अंचल में समेटे, कांगेर घाटी प्रसिद्ध जनजातीय संस्कृति से ओत प्रोत बस्तर जिले के प्रमुख नगर जगदलपुर से मात्र 27 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित है, जिसने अपने भरपुर वनस्पति, जीवों जल धराओं, झीलों (दरहा), गुफाओं एवं कंदराओं के कारण विश्व के प्रकृति प्रेमियों का ध्यान बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया है।

प्रकृति ने विश्व में मानव जाति को शायद ही कहीं ऐसा अनुपम उपहार सौंपा हो, जहां वन देवी अपने यौवन के पराकाष्ठा पर, मंत्रमुग्ध कर देने वाली दृश्यावली समेटे कई भूगर्भित गुफाओं को सीने से लगाकर यूं खड़ी हो मानों आपके आगमन का इंतजार कर रही हो ।

प्रकृति के इस अनोखे उपहार के संरक्षणार्थ कांगेर आरक्षित वन को जुलाई 1982 में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया, जिसका प्रमुख उद्देश्य था जंगल एवं इसके प्राकृतिक मृतप्राय घटकों को पुनर्जीवित कर हर हालत में इसे सुरक्षा प्रदान कर, वन्य प्राणियों के लिए एक बेहतरीन हैविटेट (शरण स्थल) प्रदान करना एवं पर्यटकों तथा प्रकृति प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केन्द्र बनाना | इसके अनछुये एवं कुंवारे वनों को देख कर इसे जीवमंडल (बायोस्फियर) रिजर्व भी घोषित्त किया गया है|

यह उत्तर पश्चिम किनारे तट पर तीरथगढ़ जलप्रपात से शुरू होकर पूर्व में उड़ीसा की सीमा कोलाब नदी तक फैला है। कांगेर नदी इसके बीचों-बीच इठलाती हुई चलती है। इसकी औसत चौड़ाई 6 कि.मी. एवं लंबाई 34 कि.मी. है। इसका क्षेत्रफल 200वर्ग कि.मी. है। इसमें कोई भी बफर क्षेत्र नहीं है। इसकी सीमा रेखा 48 गांवों से घिरी है।

साउथ पेनिनसुलर मिक्सड डेसिडुअस फारेस्ट (दक्षिण प्रायः द्वीपीय मिश्रित सदाबहार वन), आर्द्र सागौन वन इनमें साल, बीजा, साजा, हल्दू, चार, तेंदू, कोसम, बेंत, बांस एवं भांति-भांति की वनौषधियों के पौधे प्रमुख हैं | 

वन्यप्राणियों में शेर (बाघ), तेंदुआ (पेंथर), चीतल, बाकिंग डियर (कोटरी), भालू, जंगली शूकर, लोमड़ी भेड़िया, माउस डियर, पैंगोलिन, लकड़बग्घा, बंदर, लंगूर, सेही, सिवेट, नेवला, मंगूज, सोनकुत्ता, खरगोश, सियार आदि वन्य प्राणी यहां पाये जाते हैं। 

पक्षियों में पहाड़ी मैना, भृंगराज, उल्लू, वनमुर्गी, जंगली मुर्गा, क्रेस्टेड, सरपेंट, ईगल, श्यामा, रैकेट टेल ड्रांगो आदि से भरपूर है | रेप्टाइल में मगर, कछुआ, अजगर, नाग, धामन, लिर्जड आदि बहुतायत में बरबस ही दिख जाते हैं।

दर्शनीय स्थल-

Table of Contents

यहां के घने वन, लतायें-कुंज, बांस एवं बेलाओं के झुरमुट, रमणीक पहाड़ियां, तितलियां, चहकते पक्षी, रहस्यमयी गुफायें, सुंदर जलप्रपात, सर्वत्र नदी-नाले में करलव करता जल एवं बिखरे हुए दरहा आपको अपलक निहारने एवं प्रतिम आनंद में डूब जाने के लिए मजबूर कर देगा।

“गुफाये”

1.कुटुम्ब्सर गुफा-

ये वर्ष 1900 में खोजी गई तथा वर्ष 1954 में डॉ. शंकर तिवारी द्वारा सर्वेक्षण किया गया। इसका मुख्य मार्ग 330 मीटर लंबा है, तथा 20 से 72 मीटर चौड़ा है। इसकी दीवारों पर हाथी की सूंड सी रचनायें (ड्रिप स्टोन) जमीन से उठती (स्टेलेग्माइट) एवं छत से लटकती (सस्टेलेक्टाइट) शुभ्र धवल चूने के पत्थर की संरचनायें प्रमुख आकर्षण का केंन्द्र हैं | 

ये संरचनायें अत्यंत धीमी गति से बनती हैं तथा इनका अभी भी बनना जारी है। गुफा के कई साइड कम्पार्टमेंट हैं | गुफा के धरातल में कई छोटे-छोटे पोखर हैं। जिनमें प्रसिद्ध अंधी मछलियां एवं मेंढक पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त गुफा में अंधेरे में पलने वाले झींगुर, सांप, मकड़ी, चमगादड़, दीमक आदि पाये जाते हैं। गुफा के अंत में स्टेलेग्माइट शिवलिंग है

2.कैलाश गुफा-

इसकी खोज अप्रैल 1993 में राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा की गई । यह गुफा 200 मीटर लंबी एवं 35-50 मीटर गहरी है | गुफा के अंदर विशाल दरबार हाल है, जिसमें स्टेलेक्टाइट एवं ड्रिप स्टोन की आकर्षक संरचनायें हैं।

गुफा के अंदर कैलाश पर्वत के समान नजारा दिखाई देता है। गुफा के भीतर एक म्यूजिक प्वाइंट है, जहां चूने की संरचनाओं को पत्थर से टकराकर संगीत का आनंद लिया जा सकता है | गुफा के अंत में शिवलिंग विद्यमान है | गुफा को सौर उर्जा से आलोकित किया गया है।

Kanger Ghati Rashtriya Udyan : Kanger Ghati National Park कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
Kanger Ghati Rashtriya Udyan : Kanger Ghati National Park कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

3.दंडक गुफा –

इसकी खोज अप्रैल 1995 में की गयी । यह गुफा 200 मीटर लंबी 15-25 मीटर गहरी है। इस गुफा में दो खंड हैं। प्रथम खंड में प्रवेश करने के पश्चात्‌ एक विशाल सभागृह दिखाई देता है। इसमें दैत्याकार ड्रिप स्टोन की ठोस एवं शुभ्र संरचनायें हैं |

दूसरे खंड में पहुंचने के लिए घुटने के बल सरक कर जाना पड़ता है। इसमें गहन अंधकार में डूबा हुआ एक कुंआ के सदृश्य संरचना है। तत्पश्चात्‌ स्टेलेक्टाइट की श्वेत एवं सुंदर संरचनायें दिखाई देती है। इसमें भी सोलर लेंप का उपयोग किया जाता है|

“जलप्रपात”

1.तीरथगढ़ जलप्रपात –

यह मुनगा बहार नाले पर तीन चरणों के कुल 50मीटर की ऊंचाई से गिरता है। जलप्रपात के तीनो चरणों तक निचे उतरने के लिए कांक्रीट की सीढिया बानी हुई है ,यहां एक पुराना शिव पार्वती मंदिर भी है। पर्यटकों के विश्राम के लिये पर्यटक शेड एवं घाटी व जलप्रपात का नजारा लेने के लिए वाच टावर भी बनाये गये हैं।

2.कांगेर धारा जलप्रपात-

कुंटुम्बसर ग्राम के समीप कांगेर नदी का लघु जलप्रपात है, जो कई स्थानों पर झरनों के रूप में गिरता है। यहां की पथरीली चटूटानें, उथले जलकुंड, वांदियां एवं कल-कल अविरल बहते जल प्रवाह की ध्वनि मुख्य आकर्षण हैं।

3.भैंसा दरहा- 

कांगेर नदी पर चार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ विशाल प्राकृतिक झील का जल क्षेत्र है, जिसे भैंसा दरहा कहते हैं। यह घने बांस के वनों एवं झुरमुटों के बीच स्थित है। कांगेर नदी पार्क में कुटुम्बसर से अल्हड़तापूर्वक कूदती – फांदती हुई, यहां पर ठहर कर एकदम शांत हो जाती है। यह मगरों एवं कछुओं का नैसर्गिक वास है| इस दरहा की गहराई 20 मीटर है। इसमें उतरना खतरे से खाली नही है। यह झील पूर्वी दिशा में शबरी (कोलाबा) नदी में समा जाती है। 

इंटरप्रटेशन केन्द्र –

यह कुटुम्बसर वनग्राम में अवस्थित है, जिसका मूल उद्देश्य पर्यटकों को पार्क के वनस्पति एवं जैव जगत, वन्य प्राणियों सहित पार्क के तमाम घटकों की जानकारी देना है। जो अभी विकास की दिशा में है।

नेटरट्रेल-

तीरथगढ़ जलप्रपात मार्ग पर लगभग 1.5 कि.मी. लंबा नेचर ट्रेल विद्यमान है। इस ट्रेल से गुजरने पर आपके सामान्य ज्ञान में निश्चित रूप से बढ़ोत्तरी होगी एवं आपको पैदल रहस्यमयी यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा। 

लोअर कांगेर वैली ड्राइव – कुटुम्बसर से कैलाशगुफा मार्ग में एक ओर कांगेर नदी इठलाती हुई बहती है तो दूसरी ओर सघन बन एवं लताओं से आच्छादित ऊंचे पहाड़ चुनौती देते हुए खड़े हैं। यही है लगभग 7 कि.मी. लोवर कांगेर वैली की मनोरम एवं रमणीय यात्रा |

Kanger Ghati Rashtriya Udyan : Kanger Ghati National Park कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
Kanger Ghati Rashtriya Udyan : Kanger Ghati National Park कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान

सामान्य सूचनायें –

क्षेत्रफल – 200 वर्ग कि.मी.

सयुद्र सतह से ऊंचाई – 38 मी. से 781 मी

तापक्रम शीत – 30’C

अधिकतम – 30’C न्यूनतम

ग्रीष्म – 42’C

अधिकतम – 20’C न्यूनतम

वर्षा- औसत 152 से.मी. (सामान्यतः वर्ष में 110 दिन)

भ्रमण काल – नवंबर से जून तक

वन श्रेणी – अर्द पेनिनसुलर साल

प्रवेश अवधि:-

यह पार्क 01 नवंबर से 30 जून तक भ्रमण हेतु खुला रहता है, जिसका समय प्रात: 8:00 बजे से संध्या 4.00 बजे तक रहता है।

नोट:-

उपरोक्त सभी मार्ग घने जंगलों एवं घाटों से गुजरते हैं जो आपके लिए निश्चित रूप से अविस्मरणीय एवं रोमांचकारी यात्रा होगी । जगदलपुर उतरने के उपरांत राष्ट्रीय उद्यान में पहुंचने के लिए कुटुम्बसर (27 कि.मी.) या नेतानार (33 कि.मी.) नाले से प्रवेश करें। उद्यान भ्रमण के लिए जगदलपुर में किराये की टेक्सियां उपलब्ध हैं ।

शुल्क:-

प्रवेश शुल्क – रू. 25.00 प्रति पर्यटक (बच्चे 5 वर्ष से कम निःशुक्ल) रू, 300.00 प्रति 20 पर्यटक तक का समूह रू, 150.00 प्रति विदेशी पर्यटक

वाहन शुल्क – रू. 50.00 प्रति जीप एवं कार रू. 100.00 प्रति मिनी बस रू. 40.00 प्रति दुपहिया वाहन

कैमरा शुल्क– रू. 25.00 प्रति सामान्य कैमरा रू. 200 प्रति विडियो कैमरा

प्रकाश शुल्क – रू. 25.00 प्रति 8 व्यक्तियों में रू. 05.00 प्रति पर्यटक लेकिन रू. 25.00 न्यूनतम

गाइड शुल्क – रू. 75.00 प्रति 8 पर्यटकों का दल

आवास व्यवस्था-

वन विश्रामगृह, कुटुम्बसर – 2 कमरे

वन विश्रामगृह, नेतानार – 2 कमरे

वन विश्रामगृह, तीरथगढ़ – 2 कमरे

वन विश्रामगृह, जगदलपुर – 4 कमरे, 5 डारमेटरी |

निरीक्षण कुटीर, दरभा – 2 कमरे |

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा संचालित रेस्टॉरेन्ट उपलब्ध है।

आरक्षण:-

संचालक, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ |

Kanger Ghati Rashtriya Udyan : Kanger Ghati National Park कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
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कैसे पहुंचे:-

वायु मार्ग:- रायपुर (775 कि.मी.) निकटमत हवाई अड्डा है जो मुंबई, दिल्‍ली, कोलकाता, हैदराबाद, बेंगलूरू, विशाखापट्नम, चेन्नई एवं नागपुर से वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग:– विशाखापट्टनम – किरंदुल रेल मार्ग पर निकटतम रेलवे स्टेशन जगदलपुर है। सुविधाजनक निकटतम रेलवे स्टेशन रायपुर है|

सड़क मार्ग:-

रायपुर – जगदलपुर – 303 कि.मी.

विशाखापट्टनम – जगदलपुर – 313 कि.मी.

विजयवाड़ा – जगदलपुर – 435 कि.मी.

हैदराबाद – जगदलपुर – 565 कि.मी.

राजनांदगांव – जगदलपुर – 320 कि.मी.

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