बस्तर छत्तीसगढ़ | Bastar Chhattisgarh | Bastar Jila Chhattisgarh

Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India.( बस्तर जिला छत्तीसगढ़ )

 

Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India.( बस्तर जिला छत्तीसगढ़ )

ऐतिहासिक, पौराणिक, प्राकृतिक, रहस्यमयी – आप भारत के आदिवासी क्षेत्रों के अंतिम छोर में से एक प्रदूषण मुक्त एवं शांत बस्तर में एक नए विश्व की खोज करने जा रहे हैं। बस्तर एक ऐसी खोज है, जो आपकी इंद्रियों को जागृत कर देगी, मस्तिष्क को प्रेरित करेगी और आपकी मन व बुद्धि को तरोताजा कर देगी।

यहां एक अद्भुत अनुभव आपकी प्रतीक्षा में है। बस्तर प्राचीनता एवं आधुनिकता, प्राकृतिक सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विभिन्‍नता का सुंदर समन्वय है। यह एक ऐसी अनबूझ पहेली है जिसे हल करना शेष है | 

आपके मस्तिष्क में उठते प्रश्नों का कहीं कोई तैयार उत्तर नहीं है | बस्तर स्वयं आपको इस रहस्य पर से पर्दा उठाने के लिए प्रेरित करता है। छत्तीसगढ़ राज्य के मुकुट पर चमकते मणि के समान बस्तर की सीमाएं उड़ीसा, महाराष्ट्र एवं आंध्रप्रदेश की सीमाओं को छूती हैं। 

बस्तर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हरे-भरे जंगलों, पश्चिमोत्तर भाग ऐतिहासिक अबूझमाड़ी, आदिवासी पहाड़ियों व दक्षिणी हिस्सा बैलाडीला की खनिज खदानों से घिरा हुआ है। 

कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान का फैला हुआ घना एवं भयानक जंगल, विभिन्‍न प्रकार के पेड़-पौधे, प्राचीन एवं रहस्यमयी गुफाएं सुंदर जलप्रपात एवं नदियां, जैववैज्ञानिकों, रोमांचकारी खेलों के शौकीन कलाकारों के लिए स्वर्ग समान है। मां दंतेश्वरी, बस्तर के राजघराने की देवी हैं। कहा जाता है कि देवी इन घने पहाड़ी जंगलों में राजा की रक्षा करते हुए उसका मार्गदर्शन करती हैं।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

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दशहरा बस्तर का सबसे बड़ा, भव्य व प्रमुख त्यौहार है | मगर इसका श्रीराम अथवा उनके अयोध्या लौटने से कोई संबंध नहीं है। यह पर्व दंतेश्वरी देवी को समर्पित होता है। बस्तर पिकनिक, फोटोग्राफी एवं रोमांचकारी यात्राओं के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है | 

शहरों की चकाचौंध रोशनियों को भूलकर बस्तर आइए जहां प्रकृति अपने संपूर्ण रूप में आपके स्वागत के लिए प्रतीक्षारत है।

बस्तर की जनसंख्या में लगभग तीन चौथाई लोग जनजातियों के हैं, जिसमें से हर एक की अपनी मौलिक संस्कृति, मान्यताएं, बोलियां, रीति-रिवाज एवं खान-पान की आदतें हैं। बस्तर की जनजातियों में गोंड़ जैसे-मड़िया, मुरिया, धुरवा (परजा) और दोरला शामिल हैं। 

साथ ही अन्य समूह जो कि गोंड नहीं हैं जैसे-भतरा और हल्बा शामिल हैं। आप जिले मे कहीं भी घूम रहे हों, हाट (स्थानीय बाजार) की ओर जाते हुए जनजातिय लोगों को उनकी वेशभूषा में पूर्णरूप से सजे-धजे देख सकते हैं| 

भारी बोझ संभाले, कमर में नवजात शिशु और सिर पर टोकना लिए एक कतार में समान कदमताल से चलती युवतियां, बूढ़ी महिलाएं और गोदने और चमकीले रंगों के कपड़ों में सजी युवा आदिवासी बालाएं-यह दृश्य मन मोह लेता है। गोंड़ जाति की सबसे महत्वपूर्ण उपजनजाति, अबूझमाड़ी शर्मीले व संकोची होते हैं।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

 
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एकांतवास करते हुए वे घने जंगलों में शिकार करते हैं और वन्य वस्तुएं इकट्ठी करते हैं। नृत्य महोत्सव के दौरान सींगों से सजे मुकुट पहनने के लिए जाने जानी वाली जनजाति माड़िया अच्छे नर्तक होते हैं। 

आप उन्हें शिल्पकारों के लिए एक प्रचलित विषय पाएंगे। उत्तरी बस्तर की खेती किसानी करने वाली मुरिया जनजाति सबसे अधिक व्यवस्थित होते हैं और घोटुल के कारण जाने जाते हैं। यह युवा कुंवारे लड़के-लड़कियों के लिए एक विशेष स्थान होता है,

जहां वे अपने बड़ों से दूर आपस में मिल सकते हैं। यहां उनकी सामाजिक शिक्षा की खास व्यवस्था होती है जिसमें नृत्य, गीत संगीत आदि भी शामिल होते हैं। यह प्रथा मुरिया समाज का सबसे महात्वपूर्ण पहलू है।

 

बस्तर के त्यौहार, आदिवासियों की प्राचीन एवं सांस्कृतिक प्रथाओं को दर्शाते हैं। बदलती हुई ऋतुओं में होने वाली प्राचीनतम उत्सवों के आदिवासी नृत्य एवं संगीत से प्रकृति निखर उठती है। दंतेश्वरी, तत्कालीन राजा के राज्य की देवी हैं। 

आदिवासी अपने देवी, देवताओं और पवित्र आत्माओं की पूजा करते हैं। जिनका संबंध प्रकृति के असंख्य रूपों से होता है। भारत के अधिकांश भागों में दशहरा श्री राम की अयोध्या वापसी के पर्व के रूप में मनाया जाता है लेकिन यह बस्तर में मुख्य रूप से मां दंतेश्वरी देवी पर केन्द्रित होता है| 

यह त्यौहार संपूर्ण रूप से स्थानीय धार्मिक मान्यताओं एवं आदिवासी प्रथाओं का मिश्रण है। अनेक पारंपरिक जनजातीय, स्थानीय एवं हिन्दु धर्म के देवी-देवता दंतेश्वरी देवी के मंदिर में एकत्रित होते हैं, जो कि पर्व का केन्द्र बिन्दु होता है।

दंतेवाड़ा का फागुन मड़ई, सुकमा का रामाराम मेला और नारायणपुर मड़ई बस्तर की कुछ रंगारंग गतिविधियों में से एक है। आप संपूर्ण बस्तर जिले को पूरे वर्ष विभिन्‍न उत्सव, हर्षोल्लास के साथ मनाते पाएगें।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

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बस्तर की सदियों पुरानी परंपराएं साधारण एवं जटिल कलाकृतियों को चिन्हित करती हैं। इन कलाकृतियों को आकार देने वाले शिल्पकार प्राकृतिक संसार से प्रेरित होते हैं| बस्तर की सुंदरता, कला की प्राचीनता एवं आधुनिकता के सम्मिश्रण में निहित है।

कला पारखियों में बस्तर कला की लोकप्रियता बढ़ने का कारण इसमें हड़प्पा व सिंधु घाटी सभ्यता का प्रभाव है। कोडागांव, नारायणपुर एवं जगदलपुर टेराकोटा कला के लिए प्रसिद्ध हैं, जैसे घंटियों से सजे हुए हाथी, सजावटी बर्तन एवं मेज पर रखी जाने वाली आकर्षक वस्तुएं | 

जगदलपुर कोसा सिल्क बुनाई के लिए प्रसिद्ध है, बेल मेटल एवं रॉट आयरन की कारीगरी कोंडागांव और जगदलपुर की विशेषता है। लकड़ी एवं बांस का सर्वश्रेष्ठ कार्य नारायणपुर और जगदलपुर में देखा जा सकता है।

बस्तर की सबसे पुरानी हस्तकलाओं में स्मृतिचिन्ह के रूप में प्रयोग किये जाने वाले नक्काशीदार पत्थर भी शामिल हैं। नारायणपुर के हस्तकला केन्द्र अथवा शिल्पग्राम में आप कुछ अनुपम कलाकृतियां चुन सकते हैं। 

साथ ही यहां कारीगरों को, काम करते हुए देखा जा सकता है| इन लोक कलाओं में मुख्य रूप से रॉट आयरन के लैंप व अन्य वस्तुएं देवी-देवताओं के चित्रों से अलंकृत लकड़ी व धातु के कंघे, टेराकोटा से बने जानवर व आकृतियां, बेल मेटल की वस्तुएं एवं हस्तकरघा वस्त्र लोकप्रिय हैं| 

जगदलपुर की स्थानीय जेल में कैदियों द्वारा हाथ से बनाई गई कृतियां उपलब्ध हैं। बस्तर के वास्तविक स्थानीय स्वरूप को समझने के लिए हाट (साप्ताहिक बाजार) जो कि पूरे बस्तर में लगभग 300 हैं, का भ्रमण करना चाहिए। 

यहां पर आदिवासी जंगल से एकत्रित की गई वस्तुएं के बदले नमक, तंबाखू, कपड़े एवं अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं खरीदते हैं। बस्तर के कलाकृतियों के कुछ उत्कृष्ठ नमूनों को भारत के पांच सितारा होटलों की लंबियों एवं बड़े शहरों के उच्चवर्गीय शो रूम में प्रथम स्थान प्राप्त है।

बस्तर के प्रतिभावान कारीगरों को फेस्टिवल ऑफ इंडिया सीरीज जैसे प्रतिष्ठित समारोहों में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ है।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

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धान के विस्तृत खेत, पगडंडीहीन वनों के मनोरम दृश्य, पशु-पक्षियों की अद्भुत प्रजातियां, नदियां, झरने एवं प्राचीन गुफाएं-बस्तर को प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग बनाती हैं और साथ ही छुट्टियां मनाने के लिए इस ग्रह के सबसे अधिक जैविक विविधता वाले पर्यावरण यात्रा का विकल्प प्रस्तुत करती हैं। 

पर्यटकों के लिए यह दुर्गम दुर्लभ भूमि एक सुखद आश्चर्य है। उच्च प्रजाति के वृक्षों जैसे सागौन, साल, सिरसा, गोंद, आंवला, व महुआ से वन्य भूमि अनेक भागों में विभकत होती है। यहां वन संरक्षित जंगली भैंसे, शेर, तेंदुआ, मगरमच्छ, उल्लू, और भांति-भांति के पक्षियों जैसे लुप्तप्राय: बस्तरिया पहाड़ी मैना आदि के लिए घर है

 किसी भी जैव विज्ञानी के लिए कांगेर वैली नेशनल पार्क एक शोध का विषय है। इन दुर्गम वनों के अनोखे पर्यावरण के संरक्षण के लिए बायोस्फेयर संरक्षित स्थान का प्रस्ताव है। यह घाटी सुंदर एवं मनमोहक दृश्यों, आकर्षक जलप्रपातों, नदियों एवं प्राचीन गुफाओं के लिए जानी जाती है।

उनके लिए जो दुर्गम्य प्रकृति का आनंद लेते हैं और रोमांचक गतिविधियों से आल्हादित होते हैं, पदयात्रा ,पर्वतारोहण, अदम्य गुफाओं की खोज जैसे अनेक आकर्षण, आकर्षित करते हैं। कूटुमसर, कैलाश एवं दंडक गुफाओं में स्टैलेगमाईट और स्टैलेकटाइट (चूने के स्तंभ) आकर्षण के केन्द्र हैं। 

सौ फिट की ऊंचाई से गिरते तीरथगढ़ जलप्रपात की पारदर्शी धारा पिकनिक मनाने वालों एवं नवविवाहितों का ध्यान आकर्षित करती है। जलप्रपात में डुबकी लगाने के बाद कुछ श्रद्धालु निकटतम शिवमंदिर में आर्शीवाद प्राप्त करने हेतु जाते हैं |

इंद्रावती नदी से निर्मित चित्रकोट जलप्रपात नियाग्रा की याद दिलाता है। इन स्थानों की यात्रा के साथ ही आप बस्तर की आदिवासी संस्कृति का आनंद लेने के लिए मानव संग्रहालय भी देख सकते हैं।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

 

देवी-देवताओं पर आस्था रखने वालों को जहां दंतेवाड़ा स्थित माई दंतेश्वरी का देवालय सुकून और शांति प्रदान करता है| वहीं प्राचीन और पुरातत्व के प्रेमियों के लिए बारसूर का गणेश मंदिर, मामा-भांजा मंदिर, नारायणपुर का विष्णु मंदिर, भद्रकाली का मंदिर तथा पुजारी कांकेर के धर्मराज का मंदिर भी आकर्षण केन्द्र हैं।

पुरातत्व के शोधकर्ताओं के लिए जगदलपुर के निकट कालीपुर, गढ़धनोरा के प्राचीन टीलों की भांति अनके अज्ञात टीले अन्वेषण कर्ताओं के लिए आज भी रहस्य ही बने हुए है।

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कांकेर ( Bastar Kanker ) 

कांकेर दूधनदी तट पर गढ़िया पहाड़ की तलहटी में बसा जिला मुख्यालय है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगदलपुर से लगभग 135 कि.मी. दूर हैं| इंसानवन कांकेर से उत्तर की ओर माकड़ी से 12-15 कि.मी. दूर शानदार रमणीक पिकनिक स्पॉट | 

मलाजकुडम-( Bastar Malajkundam)

कांकेर से दक्षिण-पश्चिम में 17 कि.मी. दूर दूधनदी का जलप्रपात | दुधावा-दक्षिण-पूर्व दिशा में 30 कि.मी. दूर जलाशय | पिंजाड़िन घाट-कांकेर आमाबेड़ा मार्ग पर लगभग 70 कि.मी. दूर मनोरम दृश्य श्रृंखला |

केशकाल-( Bastar keshkal ) 

राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर कांकेर से 29 कि.मी. दक्षिण में अपने खूबसूरत घाटी के लिए प्रसिद्ध है। घाटी स्थित पंचवटी आदि दर्शनीय भू दृश्य के अतिरिक्त गढ़धनौरा, बड़ेडोंगर एंव भोगापाल इतिहास पुरातत्व महत्व के केन्द्र हैं।

गढ़धनौरा-( Bastar gadhdhanura ) 

यहां पर खुदाई में ईटों से निर्मित 29 मंदिरों की श्रृंखला प्राप्त हुई है। केशकाल से 3 कि.मी. पूर्व की ओर बटराली ग्राम है। इसके दक्षिण की ओर 3 कि.मी. दूर गोबरहीन नाम का गांव है, जो गढ़धनौरा के नाम से जाना जाता है।

नारायणपाल-( Bastar Narayanpal )

जगदलपुर से उत्तर पश्चिम दिशा पर चित्रकोट जलप्रपात से लगा हुआ इंद्रावती नदी के दायें तट पर नारायणपाल ग्राम बसा हुआ है। यह जगदलपुर से 45 कि.मी. दूरी पर स्थित है।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

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भोंगापाल-( Bastar Bhongapal )

बस्तर जिले के कोण्डागांव तहसील के अंतर्गत बड़े डोंगर के पास ग्राम भोंगापाल स्थित है। यहां शिव मंदिर के भग्नावशेष एवं बौद्ध प्रतिमा स्थित है। यहां मिले बौद्ध एवं प्राचीन हिन्दु मंदिर 5वीं एवं 6 वीं शताब्दी के हैं। 

समलूर-( Bastar samloor ) 

यह पुरातात्विक स्थल गीदम से 9 कि.मी. दूर बीजापुर मार्ग पर जाने के बाद बाईं ओर अवस्थित है। इस शिव मंदिर का निर्माण काल 11वीं शताब्दी के आसपास है।

चिंगीतराई-(Bastar chingitarai )

जगदलपुर से कोंटा मार्ग पर 45 कि.मी. की | दूरी क्प र यह दरभा विकासखण्ड में स्थित है। यह शिवमंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी के बीच का है।

बड़े डोंगर-( Bade dongar )

फरसगांव से पश्चिम की ओर 16 कि.मी वन मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है | यहां एक ऊंची पहाड़ी पर मां दंतेश्वरी का सैंकड़ों वर्ष पुराना मंदिर है।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

 

नारायणपुर( Bastar Narayanpur ) 

अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार, राजकीय राजमार्ग क्रमांक 9 पर नारायणपुर का वार्षिक मेला, जहां अबूझमाड़ की माड़ संस्कृति के प्रत्यक्ष दर्शन होते हैं। रामकृष्ण मिशन आश्रम, बांस शिल्प केन्द्र, रावघाट, खंसैल वैली, खुसेल झरना, चर्रेमर्र प्रपात दर्शनीय हैं।

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दंतेवाड़ा-( Bastar Dantewara )

जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग 16 पर जगदलपुर से 84 कि.मी। दंतेवाड़ा स्थित बस्तर की आराध्य देवी माई दंतेश्वरी के देवालय, भैरमदेव मंदिर, फाल्गुन माह का वार्षिक मेला, नवरात्रि इत्यादि |

बैलाडीला लौह अयस्क परियोजना- पूरे एशिया की सर्वप्रथम पूर्ण मशीनीकृत अयस्क परियोजना दंतेवाड़ा से 45 कि.मी. ।

बारसूर-( Bastar Barsur ) 

छिन्‍्दक नागवंशीय राजाओं की राजधानी, पुरातत्व महत्व के गणेश मंदिर मामा-भांजा मंदिर और पुरातात्विक संग्रहालय, अबूझमाड़ का प्रवेश द्वार | दंतेवाड़ा से 40 कि.मी. दूर।

हांदावाड़ा जलप्रपात( Hadawara waterfall)

बारसूर से 55 कि.मी. गहन पर्वत, वन श्रृखंला के मध्य खूबसूरत प्रपात |Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

 

 

बीजापुर ( Bastar Bijapur )

दक्षिण पश्चिम का तहसील मुख्यालय जगदलपुर- निजामाबाद राजमार्ग  16 पर जगदलपुर से 135 कि.मी. दूर।

भैरमगढ़-( Bastar Bhairamgadh

)

पुरातात्विक महत्व के देवालय-वन भैंसा अभ्यारण्य, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान, कुटरू बाघ परियोजना | संकनपल्‍ली की गुफाएं-आवापल्ली के निकट फैली पर्वत श्रृंखला में छिपी |

कोण्डागांव( Bastar kondagaon ) 

राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर जगदलपुर से 75 कि.मी. तहसील स्तरीय वार्षिक मेला, अमरावती, माकड़ी का वन क्षेत्र, शिल्पग्राम-वनवासी शिल्प कला प्रशिक्षण का केन्द्र |

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जगदलपुर-( Bastar Jagdalpur )

संभागीय मुख्यालय। प्रमुख दर्शनीय स्थल-संग्रहालय-मानव संग्रहालय,.दलपत सागर, मृगनयनी, जिला पुरातत्व, शिल्पग्राम परचनपाल | मंदिर – दंतेश्वरी मंदिर, महोदव मंदिर आदि ।

 

 

जलप्रपात-( Bastar waterfalls)

1.चित्रकोट(40 कि.मी.), 

2.तीरथगढ़ (40 कि.मी.), 

3.कांगेरधारा (40 कि.मी.),

 4.चित्रधारा (40 कि.मी.), 

5.महादेव घूमर (37 कि.मी.) 

6.मेंदरीघूमर (40 कि.मी.), 

7.तामड़ा घूमर (47 कि.मी.), 

8.गुप्तेश्वः (45 कि.मी.), 

9.मिलकूडवाड़ा-हंदावाड़ा, 

10.सातधारा, चर्रे-मर्रंि, 

11.नोगो-बागा, 

12.मलाजकुण्डम,

 13.खुशैल, 

14.फूलपाड़, 

15.लंकापलली,

 16.मड़वा,

 17.मलगेर,

 18.बोग्तूम आदि।

 

गुफाएं-( Bastar Caves )

1.कुटुमसर, 

2.कैलाश दण्डक, 

3.अरण्यक, 

4.सकलनारायण, 

5.रानी तुलार, 

6.उसूर, आदि सभी कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान सहित माचकोट वन पक्षिकषेत्र में हैं एवं दक्षिण क्षेत्र में हैं|Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

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उद्यान- नगर स्थित शहीदपार्क, इंद्राववी तट का वनस्पति उद्यान।

 

कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान-( Kangerghati National Park )

जगदलपुर-( Jagdalpur )

कोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 200 कि.मी. में फैला यह उद्यान अपने अनेक खूबसूरत स्थलों, मिश्रित प्रजाति के घने वनों पुरातन विशालतम वृक्षों, करोडों साल पुरानी शैल श्रृंखलाओं, जीव-जंतुओं सहित एशिया के प्रथम जीवोद्यान के लिए विश्व प्रसिद्ध है।Bastar Chhattisgarh : The Highest Naxal Reigon of India )

 

आवास व्यवस्था-( Bastar Housing System )

छ.ग. पर्यटन मंडल द्वारा संचालित दंडामी लक्सरी रिसॉर्ट चित्रकोट एवं जगदलपुर मे उच्च कोटी के निजी होटल्स उपलब्ध हैं।

 

कैसे पहुंचे ( How to reach Bastar )

वायु मार्ग: रायपुर (295 कि.मी.) निकटतम हवाई अड्डा है, जो मुंबई, दिल्‍ली, नागपुर, हैदराबाद, बेंगलूरू, एवं चेन्नई से जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग: रायपुर निकटतम रेलवे जंक्शन है।

सड़क मार्ग: रायपुर से निजी वाहन एवं यात्री वाहन पर्यटकों के लिए उपलब्ध है।

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