सोनपान – लखनलाल गुप्त | Sonpan Chhattisgarhi Nibandh By Lakhanlal Gupt

सोनपान – लखनलाल गुप्त | Sonpan Chhattisgarhi Nibandh By Lakhanlal Gupt

(1)
छत्तीसगढ़ में संझौती बेरा दशहरा के दिन नवा पोसाक पहिन के लड़का सियान जमो चिन गाजा बाजा के सगे जरन तिरन रावन के पुतला जलाय बर पहुँच जायय।

सबके साहू म पुतला जलाय जायय जेखर पहिले सोनपान के पूजा होयय अऊ सोनपान ल जमोझन अपन अपने हाथ म रखये सबसे पहिली भगवान ल सोनपान जमौझन अरपित करवंय येखर बाद छोटे-बड़े सोनपान भेंट करे के बाद मिल-भेंट करयय सही में विजय के चिन्हारी के रूप में दिये जावय।

(2)
येती बिहनिया ले घर में खड्ग, तरवार ल मांजे के काम घलो सुरू रहय, आज घरो घर खड्ग के पूजा होयय। ये दिन ल हिन्दु मन साल भरले अगोरत रहियय येला बड़ पवित्र दिन माने जाये।

काहे के, ये दिन आर्य के जीत के पताका अनार्य के किल्ला में फहराये रहिस हे। ये वही सुभ-दिन आय जउन दिन भगवान राम हर रावण ला खतम कर आर्य संस्कृति के रक्षा करे रहिन ।

(3)
नवरात मनइया मन नव दिन ले उपास रहियय उंखर विश्वास है के ये सबै मं जउन अनुष्ठान होयय तेखर बड़ फायदा हौयय। काहे के, संयम में रहे के कारन परिवर्तन होये के कारन, आने वाला कष्ट व्याधि से अनुष्ठान करड्या बचे रहियंय, दूसर हवन अऊ यज्ञ के घुंवा ले हवा सुद्ध हो जायय।

जेखर कारन, किसम-किसम के रोग राई के समाप्ति हो जायय। खराब हवा ल बने करे खातीर हवन सबले बढ़िया उपाय आय। येखरे सेती हमार जुन्ना रिसी मुनी मन येखर बर जादा जोर दिये है।

(4)
सही में दशहरा आज भगवान राम के राक्षसी रावण ऊपर अलौकिक बिजय के यादगार में मनाय जावय। येखर दस दिन पहिली अऊ कोनो-कोनो एक महिना आघू ले रामलीला सुरु हो जय ।

ये लीला महात्मा तुलसीदास के रामचरितमानस के आधार म खेले जाथय। ये लीला म राम के जीवन के जमा उतार चढाव के जिंदगानी के लीला करथय। 

(5)
दशहरा परब क्षत्री मन के माने जायय, पर आज पूरा देस के जम्मो मनखे येला राष्ट्रीय परव मानके मनायंय। कोनो नव दुर्गा के कारन, कोनो वीर पूजा के कारन, कोनो राम के उपासना के कारन, व्यापारी अपन बेपार के कारन, अउ कतको झन रमायन के पाठ करके जन-जागरन करायय। 

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