संत गहिरा गुरु – Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh

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संत गहिरा गुरु – Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh

संत गहिरा गुरु - Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh
संत गहिरा गुरु – Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh

दोस्तों आज हम यहाँ लेख संत गहिरा गुरु Sant Gahira Guru रायगढ़ वाले जी के बारे में लिख रहे है जिसके बारे में आप लोगो में से बहुत सरे लोगो ने हमें कमेंट करके बताया था ।

इतिहास : History

  • समाज सुधारक संत गाहिरा गुरु का जन्म सन् 1904 में श्रावण मास की अमावस्या को रात्रि 12 बजे रायगढ़ जिले के तैलूंगा नामक स्थान से लगभग करीब 15 किलोमीटर दूर उडीसा से लगे ग्राम “गहिरा” सघन वनाच्छादित दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में हुआ था। ( Social reformer Sant Gahira Guru was born in the year 1904 on the new moon of Shravan month at 12 o’clock in the night at 12 o’clock in Raigad district’s place called Tailanga, about 15 km from Orissa, in the village “Ghira” densely forested inaccessible mountainous area. )
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  • इनके पिता बुढ़की कवर और माता सुमित्रा थे। इनका वास्तविक नाम रामेश्वर था, लेकिन गाँव के नाम से इनका नाम गाहिरा गुरु होगया। His father was Budhi Kavar and mother was Sumitra. His real name was Rameshwar, but from the name of the village his name was Gahira Guru.
    ( संत गहिरा गुरु Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh )
  • छत्तीसगढ़ शासन ने संत गाहिरा गुरु के सम्मान में अंबिकापुर सरगुजा विश्वविद्यालय अब संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के नाम से कर दिया है। इसकी घोषणा ३ सितंबर को मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने राजीव गांधी पीजी कॉलेज में आयोजित मेडिकल कॉलेज व उज्वला योजना के शुभारंभ अवसर पर की। In the honor of Sant Gahira Guru, Chhattisgarh Government has renamed Ambikapur Surguja University as Sant Gahira Guru University. This was announced on 3rd September by Chief Minister Dr. Raman Singh at the launch of Medical College and Ujwala Yojana organized at Rajiv Gandhi PG College.

समाज सुधार :-

  • वनवासी समाज के बीच गांव-गांव घूमकर ग्रामवासियों के जीवन स्तर रहन-सहन, आचरण एवं व्यवहार में सुधार लाने के लिए गहिरा गुरु ने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। Gahira Guru dedicated his entire life to improve the standard of living, conduct and behavior of the villagers by roaming from village to village among the forest dwellers.
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  • उन्होंने वनवासी समाज को बलि प्रथा का त्याग कर वैदिक पद्धति से पूजा करना सिखाया। जिनके कारण वनाञ्चलों में रहने वाले वनवासी समाज के लोगों के बीच संस्कृति और सभ्यता का अवरुद्ध प्रवाह पुन प्रारम्भ हुआ। He taught the forest dwellers to abandon the sacrificial system and worship according to the Vedic method. Due to which the blocked flow of culture and civilization started again among the people of the forest dwelling society living in the forests.
    ( संत गहिरा गुरु Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh )
  • श्री गहिरा गुरु ने उरांव जाति के लोगों को समझाया कि वे पिछडे, दलित या जनजाति नहीं बल्कि महाबली भीम की संतान घटोत्कच के वंशज है। जिससे उनमें आत्म सम्मान और स्वाभिमान जागृत हुआ। Shri Gahira Guru explained to the people of Oraon caste that they are not backward, dalit or tribe but descendants of Ghatotkacha, the son of Mahabali Bhima. Due to which self-respect and self-respect was awakened in them.
  • उराव जाति के लोगों का ही ईसाई मिशनरियों ने सर्वाधिक मतांतरण किया था। गहिरा गुरु के प्रयासों से लोग अपनी मूल संस्कृति की ओर वापस लौटने लगे। The Christian missionaries had converted the people of the Urao caste the most. With the efforts of a profound master, people started returning to their original culture.
    ( संत गहिरा गुरु Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh )
  • श्री गहिरा गुरु ने केसला बनेकेला झगरपुर के साथ रायगढ़, कुसमी, सामरवार, श्रीकोट, कैलाश गुफा, जपुर सरगुजा अम्बिकापुर आदि वनवासी क्षेत्रों का भ्रमण कर समाज में सनातन धर्म एवं समाज के प्रति आस्था और कर्तव्य का जागरण किया। Shri Gahira Guru, along with Kesla Banekela Jhagarpur, visited the forest dwelling areas of Raigad, Kusmi, Samarwar, Shrikot, Kailash Gufa, Japur, Sarguja, Ambikapur etc. and awakened the faith and duty towards Sanatan Dharma and society in the society.

सनातन धर्म संत समाज :-

राष्ट्रीय स्वयंसेवक से संबंध :-

  • श्री गहिरा गुरु का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रथम परिचय अधिकापुर के प्रचारक श्री भीमसेन चोपड़ा के द्वारा हुआ। आगे चलकर श्री भीमसेन चोपड़ा भी गहिरा गुरु की कृपा से अध्यात्म मार्ग पर चल पड़े। गहिरा गुरुजी ने रायपुर, कापू, मुंडेकेला, सीतापुर प्रतागढ़ कोतवा आदि स्थानों पर अपने अनेक शिष्य बनाए। उनके शिष्यों की संख्या दो लाख से भी ज्यादा पहुंच गई।Shri Gahira Guru was first introduced to the Rashtriya Swayamsevak Sangh through Shri Bhimsen Chopra, the pracharak of Adhikapur. Later on, Shri Bhimsen Chopra also started on the spiritual path by the grace of a deep guru. Deep Guruji made many disciples at places like Raipur, Kapu, Mundekela, Sitapur, Pratagarh, Kotwa etc. The number of his disciples reached more than two lakhs.
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  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक पपू श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर “श्री गुरुजी’ से उनका प्रथम परिचय जशपुर में कल्याण आश्रम के नये भवन के लोकार्पण के अवसर पर हुआ। His first acquaintance with Papu Shri Madhavrao Sadashivrao Golwalkar “Shri Guruji”, the second Sarsanghchalak of Rashtriya Swayamsevak Sangh, took place on the occasion of the inauguration of the new building of Kalyan Ashram in Jashpur.( संत गहिरा गुरु Sant Gahira Guru Raigarh Chhattisgarh )
  • इसके बाद श्री गहिरा गुरु का संघ से निकट का सम्बंध बन गया। श्री गुरुजी ने अपना सम्पूर्ण जीवन भक्ति मार्ग पर चलते हुए निष्काम कर्मयोगी की तरह व्यतीत किया। २९ नवम्बर १९९६ को देवोस्थान एकादशी के दिन रामेश्वर गहिरा गुरु की मृत्यु हो गई। After this Sri Gahira Guru became closely related to the Sangh. Shri Guruji spent his entire life walking on the path of devotion as a selfless Karmayogi. Rameshwar Gahira Guru died on the day of Devosthan Ekadashi on 29 November 1996.

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