रायपुर: तस्करी का हाईवे: अंतर्राज्यीय तस्करों के लिए छग सुरक्षित कॉरिडोर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ अब हीरा, मादक पदार्थों से लेकर पशुओं की तस्करी का मुख्य कारिडोर बन गया है। राज्य के हाइवे तस्करों के लिए सुरक्षित रुट साबित हो रहे हैं। सीएम के नशा के सामानों की तस्करी पर सख्ती से लगाम लगाने के निर्देश के बावजूद न सिर्फ सीमा पर बल्कि राज्य के अंदरुनी इलाकों और शहरों में भी गांजे और अन्य मादक पदार्थों की पहुंच आसान बनी हुई है। बस्तर, महासमुंद और रायपुर, कवर्धा, कोरबा और कोरिया होकर उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों को जोडऩे वाली हाइवे पर सख्ती नहीं होने से तस्करों को मादक पदार्थ लाने-ले जाने में किसी तरह की परेशानी सामने नहीं आ रही है। गांजे की खेप के साथ वन्यजीवों के मांस व मवेशियों की तस्करी की जा रही है। जोखिम कम होने से तस्करों ने रायपुर को तस्करी का हब बना लिया है और यहां से गुजरने वाले हाइवे का उपयोग वे तस्करी से माल को यहां से वहां पहुंचाने में कर रहे हैं।

पिछले दिनों ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश गांजा ले जा रहे चार तस्करों को कांकेर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सभी आरोपी ग्वालियर के निवासी थे। चारों आरोपी अलग-अलग लग्जरी कार से गांजा की तस्करी कर रहे थे। आरोपियों के पास कुल 200 किलो गांजा बरामद किया गया। बरामद मशरुका की कीमत 50 रुपए आंकी गई थी, जिसमें 20 लाख का गांजा व परिवहन में उपयोग 30 लाख रुपए की तीन कार शामिल थी। कांकेर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ओडिशा से स्वीफ्ट डिजायर, मारुति स्वीफ्ट और तवेरा कार से मध्य प्रदेश तक गांजा की तस्करी हो रही है। इसके बाद कांकेर पुलिस ने रायपुर-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर तीन स्थानों आतुरगांव, कुलगांव एवं घड़ी चौक में चेक पोस्ट लगाकर संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की। जांच के दौरान स्वीफ्ट डिजायर क्रमांक एमपी 07 सीडी 7952 से आरोपी संजय जाटव (34 वर्ष) के कब्जे से 66 किलो गांजा जब्त किया गया। इसी तरह तवेरा वाहन क्रमांक एमपी 07 बीए 2212 से आरोपी दीपक शामंतो (39 वर्ष) एवं योगेश अटेरिया (35 वर्ष) के कब्जे से 74 किलो गांजा की जब्ती बनाई गई। वहीं मारुति स्वीफ्ट क्रमांक एमपी 07 सीके 3240 के चालक कपील चकोटिया (24 वर्ष) से 62 किलो गांजा जब्त किया गया।

पूछताछ में इन आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि गांजे को कोरापुट ओडिशा से खरीदकर ग्वालियर (मध्य प्रदेश) बिक्री के लिए ले जा रहे थे। चारों आरोपियों से कांकेर पुलिस ने गांजा और तीनों कार की जब्ती बनाकर कार्रवाई की। आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। बता दें कि छत्तीसगढ़ गांजा तस्करी को लेकर लगातार सुर्खियों में है। इससे पहले महासमुंद और कवर्धा में गांजे की बड़ी खेप पकड़ी जा चुकी है। छत्तीसगढ़ के रास्ते उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को गांजे की खेप पहुंचती है।

ओडिशा के नक्सली क्षेत्रों से आने वाले गांजे की भारी भरकम खेपों को रायपुर लाया जाता है। पुलिस की नजर से बचने शहर के आसपास बाहरी बस्तियों में रखा जाता है। यहां से गांजे को दिल्ली, यूपी, राजस्थान के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों के साथ महाराष्ट्र तक पहुंचाया जाता है। गांजे के तस्कर नशे की खेप को सागर तक पहुंचाने लग्जरी कारों का उपयोग कर रहे हैं। इनके आगे-पीछे भी फॉलो वाहन दौड़ते हैं, जो पुलिस की सक्रियता की सूचनाएं देते हैं। माल शहरी क्षेत्र से बाहर बनाए गए गोदामों में उतार लिया जाता है। यहां गांजे की बड़ी खेप को अलग-अलग हिस्सों में दो- तीन स्थानों पर रखा जाता है, ताकि मुखबिरी की स्थिति में ज्यादा नुकसान न हो।

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