मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh

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नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा ।

मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh Mavasi Tribe Chhattisgarh

मवासी जनजाति का परिचय 

मवासी जनजाति मध्य प्रदेश की एक अनुसूचित जनजाति है, जो कोरकू जनजाति से पृथक हुई है। 2011 की जनगणना में इनकी जनसंख्या मध्य प्रदेश में 109180 दर्शाई गई है। मध्य प्रदेश में मवासी जनजाति का लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या छिन्दवाड़ा जिले में निवासरत हैं। छिन्दवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विकासखण्ड पहाड़ी क्षेत्र के साथ ही कई परिवार बिछुआ विकासखंड के मैदानी भाग में भी निवास करते हैं।

छत्तीसगढ़ में इनकी जनसंख्या जनगणना 2011 में 203 दर्शित है, जिनमें पुरुष 114 तथा स्त्रियाँ 89 है। राज्य विभाजन में मध्य प्रदेश से इस जनजाति के कर्मचारियों के कुछ परिवार छत्तीसगढ़ आये हैं तथा कुछ परिवार छत्तीसगढ़ स्थित केन्द्र शासन के कार्यालयों में पदस्थ प्रतीत होते हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

मवासी जनजाति कोलोरियन समूह की जाति मानी गई है। यह जनजाति कोरकू जनजाति की एक शाखा जो मराठा काल में कालीभीत और रेतघाट जिसे मवास कहा जाता था। प्राचीन काल में निवास करती थी। अतः इनके पड़ोसी इन्हें मवास क्षेत्र से आये होने के कारण मवासी कहने लगे। धीरे-धीरे कोरकू के स्थान पर “मवासी” कहलाने लगे।

मवासी जनजाति के घर और महत्वपूर्ण वस्तुए 

मवासी जनजाति के घर गोंड आदि जनजाति के साथ गाँव में होते हैं। इनके घर मिट्टी की दीवाल मिट्टी की होती है। छत पर देशी कवेलू होते हैं। दरवाजे लकड़ी के होते हैं। घर के चारों तरफ निस्तार के लिये परछी होती हैं। मकान का फर्श मिट्टी का होता है, जिसे गोबर से लीपा जाता है। दीवालों पर चूना या छुई मिट्टी से पुताई करते हैं। इनके मकानों में प्रायः दो-तीन कमरे होते हैं। घर के पीछे परछी में रसोई घर होता है।

इनके घरेलू वस्तुओं में मिट्टी का चूल्हा, भोजन बनाने की हंडी, तवा, बेलन, गंजी, चौकी, थाली, लोटा, गिलास, परात आदि होते हैं मूसल, चक्की, सूपा, टोकना, मसाला या मिर्ची पीसने के लिये सिलबट्टा घर में पाया जाता है। कृषि कार्य के लिये हल, बक्खर, गैती, फावड़ा, खुरपी, कुल्हाड़ी आदि होता हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

इनके प्रमुख वाद्य यंत्रों में ढोल, मंजीरा, झांझा, नगाड़ा, तंबूरा, डफली, टिमकी व खंजरी आदि हैं, जिसका उपयोग त्योहार तथा पूजा के अवसरों पर आयोजित नृत्य और लोकगीतों के साथ होता है।

इनका मुख्य भोजन ज्वार या मक्का की रोटी, कोदो, कुटकी का भात व दलिया तथा उद्द, अरहर, सेम आदि की दाल, मौसमी सब्जी आदि हैं। मांसाहार में मुर्गी, मछली, बकरा आदि खाते हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

मवासी जनजाति का रहन-सहन 

प्रतिदिन सुबह उठकर हर्रा, करंज, नीम आदि की दातुन से दाँतों की सफाई तथा स्नान करते हैं। स्त्रियाँ सिर के बाल धोने के लिये चिकनी काली मिट्टी का उपयोग करती हैं। पुरुष गाँव के नाई से दाढ़ी, मूंछ व सिर के बाल कटवाते हैं और बालों में गुल्ली या सरसों का तेल लगाते हैं महिलायें लम्बे केश रखती हैं। बालों में तेल लगाकर कंधी से बाल संवारती हैं।

महिलाएँ हाथ, पैर, चेहरे पर गुदना गोदाती हैं। महिलाओं के आभूषणों में पैरों में तोड़ी, पैरपट्टी, हाथों में कंगन, बोहटा, गले में हंसली, चन्द्रहार (पुराने सिक्कों से बना) नाक में लौंग, कानों में टाप्स तथा पैरों की अंगुलियों में बिछिया पहनती हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

इनके आभूषण गिलट या नकली चाँदी के होते हैं। वस्त्र विन्यास में पुरुष कुर्ता, धोती व बंडी तथा स्त्रियाँ पोलका, लुगड़ा (साड़ी) ‘पहनती हैं। मवासी जनजाति के लोग शादी-विवाह, सामाजिक धार्मिक कार्यों में महुआ की स्वनिर्मित शराब पीते हैं।

मवासी जनजाति का व्यवसाय 

मवासी जनजाति के लोग मुख्य रूप से कृषि, कृषि मजदूरी, वनों से लघु, यनोपज का संग्रहण, शिकार आदि का कार्य करते हैं। कृषि में प्रमुख फसल कोदो, फुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, अरहर, उड़द तथा जगनी है। लघु वनोपज में महुआ, आंवला, अचार, गुल्ली, महुल पत्ता, गोंद, लाख तथा शहद एकत्र करते हैं, जिसे स्थानीय बाजार में बेचते हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

शिकार में खरगोश, तीतर, बटेर, कबूतर आदि का शिकार करते थे। आजकल प्रतिबंध के कारण शिकार नहीं करते। वर्षाकाल में मछली पकड़कर तथा कंदमूल एकत्र कर इसे खाकर जीवनयापन करते हैं।

मवासी जनजाति अनेक बहिर्विवाही गोत्रों में विभक्त हैं। लोवो, दरसिया, शील, अरकम, चीकू, झोपा, सुकम आदि इनके प्रमुख गोत्र हैं। इनके गोत्र के अलग-अलग टोटम होते हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

मवासी जनजाति के परम्पराए 

गर्भवती महिला का प्रसव पास-पड़ोस बुजुर्ग महिलाएँ व गर्भवती महिला का प्रसव पास-पड़ोस की महिलाएँ व दाई की मदद से घर में कराया जाता है। बच्चे के जन्म के बाद दाई नाल काटती है। गर्भवती महिला को सरेह, पीपल, अजवाईन, हल्दी, गुड़ आदि से बना “हारिरा” बनाकर पिलाया जाता है। कोदो, कुटकी व अरहर की दाल खाने को दी जाती है। प्रसव के छठे दिन छट्ठी में बच्चे व प्रसूता को नहलाया जाता है, सूरज देव का प्रणाम कराते हैं।

इस जनजाति के लड़के की उम्र 16 से 20 वर्ष तथा लड़कियों की उम्र 14 से 16 वर्ष में विवाह कर दिया जाता है। विवाह का प्रस्ताव वर पक्ष की ओर से होता है। विवाह तय होने के बाद फलदान (साई) की जाती है। शादी में वर पक्ष द्वारा “खर्ची” के रूप में वधू पक्ष को अनाज और पैसा दिया जाता है। शादी के समय कुल देवता की पूजा अर्जना की जाती है। शादी की रस्में जाति के भुमका द्वारा सम्पन्न कराई जाती हैं। बारात लगने व मंडा गाढ़ने के बाद वर वधू की भांवर होती है।

इस जनजाति बहु पत्नी प्रथा, देवर भाभी विवाह घर जमाई (लमसेना) रखना भी पाया जाता है। सह पलायन और घुसपैठ प्रथा भी समाज में रोटी देने के बाद विवाह के रूप में स्वीकार किया जाता है। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

मृत्योपरान्त मृतक के शव को दफनाया जाता है, किन्तु अब कुछ लोग अग्नि संस्कार करने लगे हैं। अस्थियाँ नर्मदा या स्थानीय नदी में विसर्जित की जाती है। तीसरे दिन कुटकी का भात व मुर्गी के चूजे से मृत आत्मा की पूजा, जाति के “ ‘घुमका ” द्वारा की जाती है। मृतक को पूर्वजों में मिलाया जाता है, इस रस्म को तीसरा कहा जाता. है, रिश्तेदारों को मृत्युभोज देते हैं।

मवासी जनजाति को जाति पंचायत में मुखिया का पद सर्वोच्च होता है। यह पंचायत जातिगत विवादों का निपटारा, समाज में सामूहिक रूप से देवी पूजा, जाति के बाहर होने वाले विवाह की रोकथाम, समाज के दोषी व्यक्ति को दण्ड देती है। दण्ड के रूप में नगद राशि तथा समाज को भोज देना पड़ता है। पंचायत का फैसला न मानने वालों का जाति से बहिष्कार कर दिया जाता है। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

मवासी जनजाति के देवी-देवता और त्यौहार 

मवासी जनजाति के मुख्य देव पचमढ़ी के महादेव हैं। इसके अतिरिक्त नदी, पर्वत, वृक्ष, सूर्य, चन्द्रमा, अग्नि, पवन, तथा राम, कृष्ण, हनुमान, गणेश, काली, दुर्गा आदि देवी-देवता के साथ ही मुठवा, हरदूल लाला, भैंसासुर, दुल्हा देव, भीमसेन, जोगनी, ग्रामदेवी की पूजा भूमका के द्वारा सम्पन्न की जाती है। इस पूजा में बलि तथा शराब चढ़ायी जाती है।

इनके मुख्य त्योहार अखाड़ी, जिवती (हरियाली अमावस्या) नाग पंचमी, पोला, तीजा, पीतरपक्ष, होली, दिवाली, भुजलिया, राखी होते हैं। ये लोग जादू-टोना पर विश्वास करते हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

मवासी जनजाति के लोग अन्य जातियों के लोगों के साथ मिलकर त्योहारों में शैला नृत्य एवं रहस नाचते हैं। शादी विवाह में पुरुष-स्त्री मिलकर नाचते हैं। स्त्रियाँ विशेष रूप से पड़की नाच नाचती हैं।

इनके द्वारा विशेष अवसरों पर पड़की गीत, फाग गीत, भजन आदि गाया जाता है। इनके घरों की दीवालों, दरवाजों में चित्रकला, काष्ठकला जिसमें शेर, मोर, फूल, बेल-बूटा तथा विभिन्न प्रकार की आकृति बनी पायी जाती हैं। ( मवासी जनजाति छत्तीसगढ़ Mavasi Janjati Chhattisgarh mavasi tribe chhattisgarh )

2011 की जनगणना में मवासी जनजाति की साक्षरता 50.6 प्रतिशत दर्शित है। पुरुषों में साक्षरता 62.5 प्रतिशत तथा स्त्रियों में साक्षरता 34.3 प्रतिशत थी।

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source : Internet

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Rajveer Singh
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