खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh

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खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh
खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh

नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh  के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा ।

खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya Janjati Chhattisgarh khadiya Tribe Chhattisgarh

खड़िया जनजाति की उत्पत्ति  

खड़िया जनजाति मुख्यतः बिहार और उड़ीसा में निवासरत जनजाति है। छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इनकी अल्प जनसंख्या निवासरत है। छत्तीसगढ़ में इनकी जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना में 49032 दर्शित है। इनमें पुरुष 23975 तथा स्त्रियाँ 25057 थी। खड़िया जनजाति मुख्यतः जरापुर, रायगढ़, रायपुर, महासमुंद जिले में निवासरत है ।

इनकी उत्पत्ति के संबंध में कोई ऐतिहासिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है। दन्तकथाओं के अनुसार खड़िया के पूर्वज और छोटा नागपुर के “नागवंशी” मुण्डा राजाओं के पूर्वज प्रारंभ में सगे भाई थे। ( खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh )

एक बार दोनों भाई यात्रा में निकले और छोटा नागपुर क्षेत्र पहुंचे तो लोगों ने छोटे भाई को अपना राजा चुना। बड़े भाई को अपना हिस्सा तय करने के लिये कहा गया। इसके सामने चाँदी और मिट्टी से भरी दो टोकरी ढँककर रखा गया और उनमें से एक चुनने को कहा गया। बड़े भाई ने मिट्टी की टोकरी चुन लिया। इस पर उसने इसे अपना भाग्य मानकर खेत जोतने और बहंगी ढोने का कार्य अपनाया।

नागवंशी मुण्डा रानियों में खड़िया लोगों के सामने पर्दा करने का रिवाज है। रिजले ने भी इन्हें मुण्डा जनजाति का एक समूह माना है जो विकास की गति में पीछे रह गये। अर्थात् कोरियन समूह की एक जनजाति है। ( खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh )

खड़िया जनजाति का रहन-सहन 

खड़िया जनजाति के लोग गाँव में अन्य जनजातियों जैसे कॉध, उरांव, मुण्डा, राठिया, नगेसिया, गोंड, आदि के साथ निवास करते हैं। इनके घर मिट्टी के होते हैं, जिस पर घासफूस या देशी खपरैल का छप्पर होता है। घर सामान्यतः दो कमरे का होता है। फर्श मिट्टी का होता है, जिसे गोबर, मिट्टी से महिलाएँ लीपती हैं।(खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh )

घरेलू वस्तुओं में धन रखने की कोठी चार ओने बिछाने के कपड़े, मिट्टी, एत्युमिनियम तथा पीतल के बर्तन, धान कूटने का मूसल, अनाज पीसने की चक्की, कृषि उपकरण. कुल्हाड़ी, कांवर, बाँस की टोकरी, झउंआ, सूपा, मछली पकड़ने का चोरिया, टूटी, पेलना आदि होता है यस्य विन्यास में पुरुष घुटने तक पंछा तथा बंडी, महिलाएँ सुगड़ा पहनती हैं। कुछ महिलाएँ लुगड़ा के साथ पोलका पहनने लगी हैं।

महिलाएँ हाथ, चेहरा, पैर पर गुदना गुदाती हैं। महिलाएँ हाथ में काँच की चूड़ियाँ तथा ऍठी गले में सुरदा, रुपिया माला, काँच के मनकों की माला, नाक में फूली, कान में खिनवा पहनती है। अधिकांश गहने गिलट, नकली चाँदी या चाँदी की होती है। ( खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh)

इनका मुख्य भोजन चावत, कोदो, गोंदली को पेज, भात, बासी, उड़द, मूंग, अरहर, कुलधी की दाल, मौसमी सब्जी, जंगली कंदमूल, भाजी आदि हैं। मांसाहार में मछली, बकरा, मुर्गा, हिरण, खरगोश, सुअर, विभिन्न प्रकार के पक्षी, केकड़ा आदि खाते हैं। महुआ से निर्मित शराब व चावल से निर्मित ” हड़िया “ पीते हैं। पुरुष धूम्रपान के रूप में बीड़ी पीते हैं।

खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh
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खड़िया जनजाति के कृषि और व्यवसाय 

खड़िया जनजाति का आजीविका का मुख्य स्त्रोत वनोपज संकलन, शिकार, आदिम कृषि, कृषि मजदूरी है। इनकी उपजाति पहाड़ी खड़िया मुख्यतः वनोपज संग्रह, शिकार, पर निर्भर होते हैं। अन्य उपजातियाँ दूध खड़िया, मुण्डा खड़िया आदि स्थाई कृषि व मजदूरी को आजीविका के प्रमुख साधन के रूप में स्वीकार कर चुके हैं।

इनके मुख्य कृषि उपज में धान, कोदो, गोंदलो, उड़द, मूंग, अरहर, कुलथी आदि हैं। वर्षा ऋतु में मछली भी पकड़ते हैं। हिल मारिया पक्षियों, खरगोश, गोह आदि का शिकार करते हैं। (खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh)

खड़िया जनजाति का रिति-रिवाज 

खड़िया पितृवंशीय, पितृसत्तात्मक, पितृ निवास स्थानीय जनजाति है। अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न उपजातियाँ पाई जाती है। इनके प्रमुख उपजाति हिल खड़िया, ढेलकी खड़िया, दूध खड़िया, मुण्डा खड़िया, बेरगा खड़िया, दूरेगा खड़िया आदि है। छत्तीसगढ़ में मुख्यतः मुण्डा खड़िया व दूध खड़िया पाये जाते हैं। उपजातियाँ बहिर्विवाही गोत्रों में विभक्त है। इनके प्रमुख गोत्र दुंग दुग, कीरो, केरकेटा, कांकुल, बार बारला, बरोआ, देमका, बितुम, धान, हाथी, कासी, बागे, नाग, सौर, सुरनिया, लेतेइन, टोपो, सोरंग, कुल्लू, इन्दुअर आदि है। गोत्रों के जीव-जन्तु, वृक्ष-लता, पर आधारित टोटम पाये जाते हैं।

इस जनजाति की गर्भवती महिलाएँ प्रसव के पूर्व तक आर्थिक एवं पारिवारिक समस्त कार्य करती हैं। प्रसव स्थानीय दाई या परिवार के बुजुर्ग महिलाएँ कराती है। छठे दिन छठी मनाते हैं। विवाह उम्र लड़कों के लिये 14-18 वर्ष लड़कियों के लिये 13 से 16 वर्ष मानते हैं। विवाह प्रस्ताव वर पक्ष की ओर से होता है। वर पक्ष वध पक्ष को “सूक” के रूप में चावल, दाल, तेल, हल्दी तथा नगद रुपये देते हैं। विवाह रस्म जाति के बुजुगों के देख-रेख में संपन्न होता है।

“उदुरिया” (सहपलायन), दुकू ( घुसपैठ ) प्रथा भी प्रचलित है। इसे सामाजिक पंचायत कुछ जुर्माना लेकर मान्यता प्रदान की जाती है। विनिमय विवाह, सेवा विवाह, विधवा त्यक्ता विधुर विवाह पाया जाता है। (खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh)

मृत्यु होने पर मृतक को दफनाते हैं। तीसरे दिन घर की साफ-सफाई मुण्डन व स्नान करते हैं। दसवें दिन दशकरम करते हैं। मृत्यु भोज दिया जाता है। पितृ पक्ष में पूर्वजों की पूजा करते हैं, पानी देते हैं।

खड़िया जनजाति का पंचायत 

खड़िया जनता में परम्परागत जाति पंचायत पायी जाती है। पंचायत का प्रमुख ” परधान” कहलाता है। नेगी और चपरासी (कोटवार) सहयोगी पदाधिकारी होते हैं। इस पंचायत में अनैतिक संबंध, विवाह, तलाक, वधू-मूल्य (सूक) संबंधी विवादों, सम्पत्ति का बटवारा आदि का निपटारा किया जाता है।

दोषी व्यक्ति से जुर्मना या सामाजिक भोज लेते हैं। ग्राम स्तरीय जाति पंचायत से बड़ी परठा पंचायत होती है, जिसमें कई गाँव के “परधान” नेगी आदि सदस्य होते हैं। इसका प्रमुख परहाराजा कहलाता है। ग्राम स्तरीय पंचायत ग्राम के अनसुलझे विवादों का निपटारा किया जाता है।

खड़िया जनजाति के देवी-देवता 

इनके प्रमुख देवी-देवता धरम देवता, ग्राम देवता, धरतीमाई हैं। इसके अतिरिक्त पेड़, नदी-पहाड़, बाघ, नाग, आदि को भी देवी-देवता मानते हैं। इनके प्रमुख त्योहार सरहुल, नवाखानी, देवधान, दशहरा आदि हैं देवी-देवता की पूजा में मुर्गा, बकरा की बलि दी और शराब चढ़ाई जाती है।

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इनके ग्राम देवी-देवता का पुजारी और मंत्र-तंत्र जादू का जानकार व्यक्ति “पाहन” कहलाता है। खड़िया जनजाति के प्रमुख लोक नृत्य सरहुल नृत्य, करमा नृत्य, फगुआ नृत्य, विवाह नृत्य आदि हैं। प्रमुख लोक गीतों में विवाह गीत, सरहुल गीत, करमा गीत, फाग गीत, भजन आदि हैं। 

2011 की जनगणना अनुसार छत्तीसगढ़ के खड़िया जनजाति में साक्षरता 56.2 प्रतिशत दर्शित है। पुरुषों में साक्षरता 66.8 प्रतिशत तथा स्त्रियों 46.3 प्रतिशत पायी गई थी। (खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ Khadiya janjati chhattisgarh khadiya tribe chhattisgarh)

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source : Internet

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Rajveer Singh
Rajveer Singh

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