बिलासपुर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला- निलंबन अविध के संपूर्ण लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता

बिलासपुर। हाई कोर्ट अपने महत्वपूर्ण फैसला में कहा है कि याचिकाकर्ता को आरोप पत्र दीर्घ शास्ति के लिए दी गई थी,जांच के बाद विभाग ने लघु शास्ति से दांडित किया है। लिहाजा निलंबन अवधि का संपूर्ण लाभ से याचिकाकर्ता को वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस पी सैम कोशी ने याचिकाकर्ता को निलंबन अवधि का संपूर्ण लाभ देने का निर्देश राज्य शासन को दिया है।

कुंजलाल सिन्हा ने वकील अजय श्रीवास्तव के जरिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि वर्तमान में जेल शिक्षक के रूप में गरियाबंद जिला जेल में पदस्थ है। जब वह सारंगढ़ जेल में पदस्थ थे तब उनके ऊपर लगे आरोप के तहत सिविल सेवा वर्गीकरण नियम के नियम 14 के तहत दीर्घ शास्ति अधिरोपित करने हेतु विभागीय जांच का आदेश जारी किया गया था। जांच के बाद आरोप को सही पाते हुए 18 जून 2013 को उसे निलंबित कर दिया। तीन साल बाद पांच मई 2016 को राज्य शासन ने निलंबन समाप्त हुए बहाली आदेश जारी कर दिया।

विभागीय जांच के बाद एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने एवं निलंबन अवधि में जीवन निर्वहन भत्ता के अतिरिक्त वेतन भत्ते या अन्य लाभ ना देनेकका निर्देश राज्य शासन ने दिया था। याचिकाकर्ता ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने की सजा लघु शास्ति के श्रेणी में आता है। पूर्व में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया था कि यदि विभागीय जांच के पश्चात लघु शास्ति अधिरोपित होती है तो ऐसी अवस्था में निलंबन औचित्यहीन माना जाएगा।

वहीं कर्मचारी निलंबन अवधि का संपूर्ण वेतन एवं अन्य लाभ प्राप्त करने का अधिकारी होगा। मामले की सुनवाई जस्टिस पी सैम कोशी के सिंगल बेंच में हुई। प्रकरण की सुनवाई के बाद जस्टिस कोशी ने याचिकाकर्ता जेल शिक्षक को राहत देते हुए निलंबन अवधि का संपूर्ण लाभ प्रदान करने राज्य शासन को निर्देश जारी किया है। इसके लिए जस्टिस कोशी ने राज्य शासन को 60 दिनों की मोहलत दी है।

 

 

 

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