ग्रामीण विकास सम्बन्धी योजनाए | Gramin Vikas Sambandhi Yojnaye

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ग्रामीण विकास सम्बन्धी योजनाए | Gramin Vikas Sambandhi Yojnaye

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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना 

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पहले के रोजगार कार्यक्रमों से हटकर है। क्योंकि यह मात्र एक योजना या कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक अधिनियम है, जिसमें रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है।

अधिनियम तिथि : राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 25 अगस्त, 2005 को पारित हुआ।

क्रियान्वयन विभाग : ग्रामीण विकास मंत्रालय

उद्देश्य : गरीबी रेखा से नीचे रह रहे अर्द्ध या अकुशल ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ाने के उद्देश्य के साथ शुरू किया गया।

काम का अधिकार : ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों की रोजगार की कानूनी गारंटी देता है।

पंचायत की भूमिका: नियोजन और कार्यान्वयन में पंचायतों की प्रमुख भूमिका होगी। कार्य की सिफारिश ग्राम सभा करेगी। कम से कम 50% कार्य ग्राम पंचायतों द्वारा कराया जाएगा।

पहला चरण : 2 फरवरी, 2006 से आन्ध्र प्रदेश के अनन्तपुर जिले से शुभारंभ देश के कुल 200 जिले शामिल, छत्तीसगढ़ के 11 जिले शामिल

दूसरा चरण : 1 अप्रैल 2007 से, देश में 130 नये जिले शामिल छत्तीसगढ़ के 4 जिले शामिल

तीसरा चरण : 1 अप्रैल, 2008 से देश के सभी जिलों में आरंभ समस्त जिले में योजना लागू।

नाम परिवर्तन : 2 अक्टूबर, 2009 से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम (नरेगा) का नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम (मनरेगा) कर दिया गया है।

इस योजना के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:-

काम की गारंटी : एक वित्तीय वर्ष में इच्छुक ग्रामीण परिवार के एकाधिक अकुशल वयस्क को कुल 100 दिनों की रोजगार की कानूनी गारंटी देता है। छत्तीसगढ़ में 2013-14 से मनरेगा के तहत 150 दिन का रोजगार प्रदान किया जा रहा है। इस अतिरिक्त व्यय का वहन राज्य सरकार करती है।

अतिरिक्त रोजगार :

  • वन अधिकार पट्टाधारकों को भारत सरकार ने 150 दिन रोजगार का प्रावधान किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत् आवास निर्माण के लिये मनरेगा के अंतर्गत सामान्य क्षेत्रों में 90 दिन और पहाड़ी क्षेत्रों में 95 दिन का अतिरिक्त लाभ मिलता है।
  • मनरेगा के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ में सूखा-प्रभावित क्षेत्रों में एक परिवार 200 दिनों का रोजगार प्राप्त कर सकता है।

काम का स्वरूप : योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है कि स्थायी संपत्ति का सृजन करना और ग्रामीण परिवारों के आजीविका साधन आधार को मजबूत बनाना। इसके कामों में ठेकेदारों द्वारा कार्य निष्पादन की अनुमति नहीं है. मशीन का प्रयोग सामान्यत: प्रतिबंधित, विशेष परिस्थितियों में ही अनुमति

समय सीमा : आवेदन प्राप्ति के 15 दिन के अंदर रोजगार दिलाया जाएगा।

बेरोजगारी भत्ता : 15 दिन में रोजगार नहीं दिलाने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।

बेरोजगारी भत्ता दर : प्रथम 30 दिन के लिये न्यूनतम मजदूरी का एक चौथाई 30 दिनों बाद न्यूनतम मजदूरी का आधा प्रतिदिन

कार्य का क्षेत्र : निवास के 5 किलोमीटर के दायरे में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। ज्यादा देरी होने पर अतिरिक्त मजदूरी दी जाएगी।

महिला प्राथमिकता : कम से कम एक तिहाई महिलाओं को रोजगार देने का प्रावधान

मातृत्व भत्ता : महिला श्रमिक जिन्होंने विगत 12 माह में 50 दिन मजदूरी कर ली है, उनको मातृत्व अवकाश भत्ता के रूप में 1 माह की मजदूरी देने का प्रावधान किया गया है।

मजदूरी दर : वर्तमान में 204 रूपये प्रति दिन

मजदूरी भुगतान : बैंक या डाकघर बचत खाते के माध्यम से किया जाता है। IAP जिलों (बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा तथा सुकमा) में आवश्यकतानुसार नगद मजदूरी की अनुमति दी गयी है। जिनका आधार कार्ड है उन्हें DBT द्वारा भुगतान की व्यवस्था

व्यय अनुपात : PFMS/e- FMS प्रणाली- भुगतान में विलंब को कम करने हेतु : मजदूरी तथा सामग्री में 60 : 40 व्यय का अनुपात रखा गया है।

शिकायत निवारण 

  • ग्रामीण रोजगार गारंटी शिकायत निवारण नियम 2012 जिला स्तर पर टोल फ्री हेल्प लाईन नम्बर एवं पारदर्शिता हेतु ई-मस्टररोल का प्रयोग किया जा रहा है।
  • शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु WWW.MGNREGA.CG.GOV. IN वेबसाईट की व्यवस्था भी की गई है।

सामाजिक अंकेक्षण 

  • मनरेगा के अंतर्गत किए गए कार्यों का अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण 6 माह में अर्थात् वर्ष में 2 बार अनिवार्य रूप से कराया जाना निर्धारित किया गया है।
  • भारत सरकार के निर्देशानुसार पारदर्शिता हेतु राज्य में स्वतंत्र ‘सामाजिक अंकक्षेण ईकाई का गठन किया गया है।

लोकपाल :

  • राज्य में 17 लोकपाल की नियुक्ति एवं 17 प्रादेशिक क्षेत्र स्थापित
  • राज्य स्तर पर त्रि-स्तरीय ‘अपीलीय प्राधिकरण’ का गठन

पंजीकरण : ग्रामीण स्थानीय ग्रामीण पंचायत में खुद को पंजीकृत करा सकेंगे।

जॉब कार्ड : जॉब कार्ड एक कानूनी दस्तावेज है जो अधिनियम के तहत् व्यक्ति को रोजगार मांगने का हक देता है। पंजीकृत ग्रामीण परिवारों को जॉब कार्ड ग्राम पंचायतें जारी करेंगी।

मनरेगा के तहत कार्य : प्राकृतिक संसाधन से संबंधित लोक निर्माण, दुर्बल वर्ग के लिये आस्तियाँ का निर्माण,NRLM स्वयं सहायता समूहों के लिए सामान्य अधोसंरचना, ग्रामीण अधोसंरचना

राज्य की उपलब्धि :

  • वित्तीय वर्ष 2021-22 में सितम्बर माह तक कुल 737.82 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया और 2270.06 करोड़ रूपये व्यय किये गये।
  • छत्तीसगढ़ के बजट 2022-23 में मनरेगा हेतु 1702 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

मनरेगा से संबंधित संस्थाएं, एप आदि-

राज्य रोजगार गारंटी परिषद्

  • अधिनियम की धारा 12 (1) के तहत राज्य में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद् का गठन किया गया है।
  • परिषद् के नामांकित सदस्यों में कम से कम एक तिहाई महिला

राज्य रोजगार गारंटी सशक्त समिति

सचिव स्तरीय समिति : मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के सचिव स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

प्रशासनिक अमला –

राज्य स्तर पर : आयुक्त एवं अपर आयुक्त की नियुक्ति
जिला स्तर पर : जिला कार्यक्रम समन्वयक- कलेक्टर अति. जिला कार्य. सम.- मुख्य कार्यपालन अधि., जिला पंचायत
विकासखण्ड स्तर : मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत
ग्राम पंचायत स्तर : ग्राम रोजगार सहायकों की नियुक्ति

BFT प्रणाली

  • BFT ( Barefoot Technician) प्रणाली के अंतर्गत बेयरफुट तकनीशियन को 90 दिवस का प्रशिक्षण देकर काम लिया जा रहा है।

जनमनरेगा ऐप

  • भारत सरकार द्वारा मनरेगा की मूलभूत जानकारी एवं इसके अंतर्गत निर्मित परिसंपत्तियों की जानकारी geo-tagging के माध्यम से फोटो प्राप्त कर उपलब्ध करायी जाती है।

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की विशेषताएं

प्रश्न : रोजगार के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
उतर : ग्रामीण परिवारों के वे सभी वयस्क सदस्य जिनके पास जॉब कार्ड है, वे आवेदन कर सकते हैं। यद्यपि वह व्यक्ति जो पहले से ही कहीं कार्य कर रहा है, वह भी इस अधिनियम के अंतर्गत अकुशल मजदूर के रूप में रोजगार की माँग कर सकता है। कार्यक्रम में कम से कम एक-तिहाई लाभभोगी महिलाएँ होंगी।

प्रश्न :क्या काम के लिए व्यक्तिगत आवेदन जमा किया जा सकता है ?
उतर : हाँ, रोजगार प्राप्तकर्ता का पंजीकरण परिवार-वार किया जाएगा। पंजीकृत परिवार वर्ष में 100 दिन काम पाने के हकदार होंगे। साथ ही, परिवार के व्यक्तिगत सदस्य भी काम पाने के लिए आवेदन कर सकता है।

प्रश्न : कोई कार्य के लिए कैसे आवेदन कर सकता है ?
उतर : पंजीकृत व्यस्क, जिसके पास जॉब कार्ड है, सादे कागज पर आवेदन कर कार्य की माँग कर सकता है। आवेदन ग्राम पंचायत या खण्ड स्तरीय कार्यक्रम अधिकारी को संबोधित कर लिखा गया हो।

प्रश्न :एक व्यक्ति वर्ष में कितने दिन का रोजगार पा सकता है ?
उतर : एक वित्तीय वर्ष में एक परिवार को 100 दिनों तक रोजगार मिल सकेगा और इसे परिवार के वयस्क सदस्यों के बीच विभाजित किया जाएगा। कार्य की अवधि लगातार 14 दिन होगी लेकिन वह सप्ताह में 6 दिन से अधिक नहीं होगी।

प्रश्न :व्यक्ति को रोजगार की प्राप्ति कब होगी ?
उतर : आवेदन करने के 15 दिनों के भीतर या कार्य की मांग के दिन से रोजगार दिया जाएगा।

प्रश्न : रोजगार का आवंटन कौन करता है ?
उतर : प्राधिकृत ग्राम पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी।

प्रश्न : कोई व्यक्ति कैसे जान सकेगा कि रोजगार दिया गया है ?
उतर : आवेदन जमा करने के 15 दिनों के भीतर आवेदक को कार्य ‘कब और कहाँ की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, ग्राम पंचायत के सूचना बोर्ड तथा खंड स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय में सूचना पट पर प्रकाशित की जाएगी जिसमें दिनांक, समय, स्थान की सूचना दी जाएगी।

प्रश्न : यदि आवेदक कार्य पर रिपोर्ट नहीं करता तो क्या होगा? क्या वह कार्य हेतु पुनः आवेदन दे सकता है?
उतर : कोई व्यक्ति सूचित किये गये समय से 15 दिनों के भीतर कार्य पर उपस्थित नहीं होता तो वह बेरोजगारी भत्ते का पात्र नहीं रहेगा। परन्तु कार्य हेतु पुन: आवेदन दे सकेगा.

प्रश्न : उसका / उसकी मजदूरी क्या होगी ?
उतर : राज्य में कृषि मजदूरों हेतु लागू न्यूनतम मजदूरी मिलेगी।

प्रश्न :मजदूरी का भुगतान कब किया जाएगा ?
उतर : मजदूरी भुगतान प्रति सप्ताह या अन्य मामलों में काम के पूरा होने के 15 दिनों के भीतर इस मजदूरी का आंशिक भाग नगद रूप में प्रति दिन दिया जाएगा। .

प्रश्न : श्रमिकों को कार्यस्थल पर कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएगी ?
उतर : श्रमिकों को स्वच्छ पेयजल, बच्चों के लिए शेड, विश्राम के लिए समय, प्राथमिक उपचार बॉक्स के साथ कार्य के दौरान घटित किसी आकस्मिक घटना का सामना करने के लिए अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रश्न : काम कहाँ दिये जाएंगे ?
उतर :आवेदक के निवास से पाँच किमी के भीतर काम उपलब्ध कराये जाएँगे। निवास स्थान से 5 किमी क्षेत्र की परिधि के बाहर काम प्रदान करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को परिवहन व आजीविका मद में 10% अतिरिक्त मजदूरी प्रदान की जाएगी।

प्रश्न : कामगारों के लिए क्या प्रावधान है ?

  • 1.दुर्घटना की स्थिति में कोई कामगार कार्यस्थल पर कार्य के दौरान घायल होता है तो वह निःशुल्क चिकित्सा सुविधा पाने का हकदार होगा।
    2.घायल मजदूर के अस्पताल में भर्ती करवाने पर राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, दवा, तथा घायल व्यक्ति की प्रतिदिन कुल मजदूरी राशि का 50% पाने का भी हकदार होगा.
    3.कार्यस्थल पर दुर्घटना के कारण पंजीकृत मजदूर की स्थायी विकलांगता या मृत्यु हो जाने की स्थिति में – मृत्यु या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित राशि या 25000 रूपये पीड़ित व्यक्ति के परिवार को दी जाएगी।

प्रश्न : यदि आवेदनकर्ता को रोजगार नहीं प्रदान किया जाए तो क्या होगा ?

  • 1.यदि योग्य आवेदक को माँग पर 15 दिनों के भीतर कार्य न मिल पाया तो बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
    2.भत्ते की दर- पहले 30 दिनों के लिए बेरोजगारी भत्ते की दर मजदूरी दर का 25% होगा और बाद में 50% होगी।

प्रश्न : किस प्रकार का काम दिया जाएगा ?

  • स्थायी संपत्ति योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है कि स्थायी संपत्ति का सृजन करना और ग्रामीणों के आजीविका आधार को मजबूत बनाना। इसके कामों में ठेकेदारों द्वारा कार्य निष्पादन की अनुमति नहीं है.

नरेगा अधिनियम के तहत शामिल क्रियाकलाप

  1. जल संरक्षण और जल संग्रहण
  2. सूखा बचाव, वन रोपण और वृक्षारोपण
  3. सिंचाई नहरों के साथ सूक्ष्म एवं लघु सिंचाई कार्य।
  4. अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय की भूमि या भूमि सुधार के लाभभोगी की भूमि या आवास योजना के लाभभोगी परिवार के सदस्यों की भूमि के लिए सिंचाई व्यवस्था।
  5. परंपरागत जल स्रोतों का पुनरूद्धार।
  6. भूमि विकास
  7. बाढ़ नियंत्रण तथा सुरक्षा एवं प्रभावित क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था बारहमासी सड़क की सुविधा सड़क निर्माण में जहाँ कहीं भी आवश्यक हो वहाँ पर पुलिया का निर्माण करना।
  8. राज्य सरकार से परामर्श के बाद केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य कोई कार्य।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की प्रगति

क्र मदवर्ष 2021-22 अप्रैल से सितम्बर 
1पंजीकृत परिवारों की संख्या लाख40.60
2रोजगार उपलब्ध कराये गये परिवारों की संख्या22.46
3उपलब्ध राशि करोड़2679.20
4व्यय राशि करोड़ (प्रतिशत)2270.06 , 80%
5लाख मानव दिवस सृजित737.82
6महिलाओं का प्रतिशत50%
7स्वीकृत कार्यो की संख्या (स्पील ओवर सहित)3.48
8100 दिवस रोजगार प्राप्त परिवारों की संख्या लाख में32,405

सुराजी गांव योजना

सुराजी गांव योजना के अंतर्गत ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को परंपरागत घटकों को संरक्षित तथा पुनर्जीवित करते हुए गांवों को राज्य की अर्थव्यवस्था के केंद्र में लाना है। साथ ही पर्यावरण में सुधार करते हुए किसानों तथा ग्रामीणों की व्यक्तिगत आय में वृद्धि करना है।

प्रारंभ– 1 जनवरी 2019 से
नारा-नरवा, गरवा, घुरवा, बारी एला बचाना हे संगवारी

नरवा

उद्देश्य-

  • नरवा संरक्षण के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देना, •
  • जल स्त्रोतों का संरक्षण एवं उनका पुनर्जीवन
  • सतही जल का संरक्षण
  • भूगर्भीय जल में वृद्धि

कार्य-

  • 2000 से अधिक जलाशयों के वैज्ञानिक ढंग से विकास का लक्ष्य
  • प्रत्येक क्षेत्र/विकास खंड में नालों का चिन्हांकन

गरूवा

उद्देश्य-प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौठान का निर्माण कर पशु संवर्धन का कार्य क्योंकि गावों में पशु पालक उन्नत नस्ल के पशुओं का उचित प्रबंधन ठीक से नहीं कर पाते हैं साथ ही अनुत्पादक/अल्प उत्पादक व कृषि कार्य हेतु अनुपयुक्त पशुओं का रख-रखाव व पालन-पोषण भी नहीं कर पाते हैं।

प्रावधान-

  • राज्य के सभी ग्राम पंचायतों में गौठानों के विकास का लक्ष्य,
  • गौठानों में गोबर और मिट्टी का उपयोग जैविक खाद के लिए
  • मूर्तियाँ, दिये और हस्तकला के अन्य उत्पाद भी इन गौठानों में बन रहे हैं।
  • ये हस्तशिल्प प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों/महानगरों में बेचे जा रहे हैं।

उल्लेखनीय– जैविक खेती तथा पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई गोधन न्याय योजना का संचालन इन्हीं गौठानों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत 2 रू. किलो की दर से गोबर खरीदी कर स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जैविक खाद बनाया जा रहा है।

घुरूवा

उद्देश्य-

  • कृषि तथा जैविक अपशिष्टों से जैविक खाद का निर्माण करना
  • किसानों को जैविक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है,
  • रासायनिक खाद के उपयोग को प्रचलन से बाहर करना
  • जैविक खाद से भूमि की उर्वरता बढ़ाना
  • कृषि उत्पादकता तथा कृषि आय में वृद्धि करना

प्रावधान-गोधन कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों से 2 रू. किलो की दर से गोबर खरीदी कर स्व सहायता समूहों के माध्यम से जैविक खाद बनाया जा रहा है।

बारी

उद्देश्य-

  • घरेलू बाड़ियों में सब्जियों तथा फल-फूल के उत्पादन को बढ़ावा देना
  • गांवों में पोषक आहारों की उपलब्धता बढ़ाना।
  • व्यावसायिक स्तर पर भी सब्जी तथा फल-फूल का उत्पादन करना,
  • ग्रामीणों की आय बढ़ाना

प्रावधान-

  • फल तथा सब्जी उत्पादन के लिए बीजों का वितरण।
  • 4500 गांवों में 1 लाख 45 हजार बाड़ियों का उन्नयन।

स्वर्ण जयन्ती स्वरोजगार योजना

स्वर्ण जयन्ती स्वरोजगार योजना (SGSY) ग्रामीण गरीबों स्वरोजगार के लिए चल रहा एक प्रमुख कार्यक्रम है। एक निश्चित समय सीमा के अंदर आय में पर्याप्त वृद्धि सुनिश्चित गरीबी रेखा नीचे सहायता प्राप्त परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर उद्देश्य अप्रैल, 1999 को प्रारम्भ चल निम्नांकित योजनाओं का विलय किया गया है-

  1. समन्वित ग्राम विकास कार्यक्रम (IRDP)
  2. स्वरोजगार के लिए ग्रामीण युवाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम
  3. ग्रामीण क्षेत्र महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम (DWCRA)
  4. ग्रामीण दस्तकारों उन्नत औजारों
  5. गंगा कल्याण योजना (GKY) तथा
  6. दस लाख कुओं की योजना (MWS)

आरंभ : 1 अप्रैल 1999 प्रारंभ,

उद्देश्य : प्रत्येक परिवार गरीबी रेखा ऊपर उठाना स्वसहायता समूह गठन, प्रशिक्षण, ऋण, अनुदान देते हुए स्वरोजगार प्रति स्वरोजगारी 2000 रूपए प्रति सुनिश्चित करवाना एवं उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है ।

व्यय अनुपात : केन्द्र और राज्य सरकार का क्रमश:75:25

स्वरुप : इस योजना के दो प्रमुख घातक है- Activity-clusters एवं Group-Approach

पात्रता : 10 से 20 व्यक्तियों का समूह, सिंचाई कार्य हेतु एवं विकलांगों के लिए 5 व्यक्तियों का समूह, समूह गठन हेतु बी. पी. एल. परिवार के 80% एवं ए. पी.एल. परिवार के 20% हो सकते हैं।

मुख्य लक्षित वर्ग :मुख्य लक्ष्य- न्यूनतम 50% अनु. जाति/जनजाति, 40% महिला तथा 3% विकलांग

मिलने वाला लाभ : यह एक ऋण एवं सब्सिडी योजना है, ऋण मुख्य है तथा सब्सिडी कार्योत्तर दी जाएगी. इस योजना में सहायता प्राप्त व्यक्ति ‘स्वरोजगारी’ कहे जाते हैं, लाभार्थी नहीं.

सब्सिडी दर :

  • सामान्यतः परियोजना का 30%, अधिकतम 15000 रू.
  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिये 50%, अधिकतम 20000 रु
  • समूह के लिये कुल परियोजना लागत का 50%, अधिकतम 250000 रू.
  • सिंचाई परियोजना के लिये अनुदान की कोई सीमा नहीं है।
  • एक लाख रूपए तक ऋण लेने वाले परिवारों को ब्याज सब्सिडी भी देय।

प्रशिक्षण : चयनित स्वरोजगारी/समूह को मूलभूत एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा।

समापन / पुनर्गठन : स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना का पुर्नगठन कर इसे समाप्त करते हुए दिनांक 01.04.2013 से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सम्पूर्ण प्रदेश में लागू किया गया है।

 इंदिरा आवास योजना

यह योजना, ग्रामीण भूमिहीन गारन्टी कार्यक्रम की एक उप योजना के रूप में 1985-86 में शुरू हुई थी, जो जवाहर रोजगार योजना की एक उप योजना के रूप में जारी रही। 1 जनवरी, 1996 से यह एक स्वतंत्र योजना के रूप में चल रही है। इसका उद्देश्य गरीब, अनुसूचित जाति/जनजाति तथा मुक्त बंधुआ मजदूरों को निःशुल्क आवास उपलब्ध कराना है. इस केन्द्र प्रायोजित योजना का संचालन भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है।

उद्देश्य: ( ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले आवासहीन परिवारों को पक्का तथा शौचालय युक्त उपलब्ध कराना है।)

प्रावधान : नवीन आवास हेतु ₹70,000 एवं पर्वतीय क्षेत्रों के लिये ₹75,000 राशि का प्रावधान था।

पात्रता : गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले आवासहीन परिवार, मुक्त बंधुआ मजदूर, अनुसूचित जाति/जनजाति के परिवार अत्याचार से पीड़ित, प्राकृतिक आपदा से बेघर हुये गरीब 3% विकलांगों हेतु आरक्षित तथा कम से कम 60% लोग अनुसूचित जाति/जनजाति समुदायों के हों।

चयन प्रक्रिया : ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित BPL सूची के द्वारा। BPL सेन्सस – 2002 के आधार पर तैयार की गई पात्र परिवारों को प्रतीक्षा सूची में से वरीयता

अन्य विवरण :

  • मकान को परिवार की महिला सदस्य के नाम आवंटित किया जाना चाहिए। वैकल्पिक रूप से पति-पत्नि के संयुक्त नाम से
  • योजना को लागू करने का काम पंचायती राज संस्थाओं का है, लेकिन लोगों को अपने मकान का डिजाइन पसन्द करने की आजादी है। पर न्यूनतम 20 वर्गमीटर प्लिन्थ क्षेत्र आवश्यक है।
  • आई. ए. वाय. हेतु प्राप्त राशि का 20% कच्चे आवासों के उन्नयन हेतु उपयोग किया जा सकता है।

केन्द्र, राज्य अंश :

  • प्रारंभ में केन्द्र और राज्य का अंश क्रमश: 75 25 था।
  • 2015-16 से केन्द्र और राज्य का अंश क्रमश: 60:40 हो गया।

मनरेगा : वर्ष 2015-16 में इंदिरा आवास निर्माण हेतु मनरेगा से कन्वर्जेन्स अनिवार्य है। इसके तहत हितग्राही को मनरेगा से 90-95 दिनों की मजदूरी की राशि प्राप्त होगी।

समापन / पुनर्गठन : इंदिरा आवास योजना के स्थान पर दिनांक 01.04.2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) संचालित की जा रही है।

 प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)

इंदिरा आवास योजना के स्थान पर दिनांक 01.04.2016 से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) संचालित की जा रही है। आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2022 तक सभी को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

दिस, 2021 में इस योजना को 3 वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया।

आरंभ : 01 अप्रैल 2016

उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आवासहीन परिवारों को पक्का आवास, रसोई तथा शौचालय युक्त आवास सुविधा उपलब्ध कराना

प्रावधान :

  • रू. 1.20 लाख प्रति आवास सामान्य जिलों के लिए एवं, रू.1.30 लाख प्रति आवास,  IAP जिलों के लिए सहायता राशि, यह 3 किश्तों में हितग्राही के खाते में जमा किया जावेगा
    प्रथम किश्त में 40%,
    दूसरी किश्त में 40%
    तीसरी किश्त में 20%
  • शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 अलग से देय।
  • अगर हितग्राही चाहे तो ₹70,000 तक का ऋण ले सकेगा।

मनरेगा से अभिसरण : इसके तहत आवास हितग्राही को मनरेगा से सामान्य जिलों में 90 दिन तथा IAP जिलों में 95 दिनों की मजदूरी प्राप्त होगी।

अभिसरण :
अभिसरण के साथ हितग्राही को कुल राशि निम्नानुसार मिलेगी-
-रू.1.48 लाख सामान्य जिले के लिए
-रू.1.58 लाख IAP जिलों के लिए
-राज्य शासन ने निर्णय लिया है, कि अगले 5 वर्षों में आवासहीन परिवार + शून्य कमरे वाले परिवार + एक कमरे वाले कच्ची छत/ दीवार वाले पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जायेगा।

आवास : न्यूनतम 25 वर्ग मीटर में आवास का निर्माण किया जाना है। जिसमें कम से कम एक कमरा पक्की छत, सीमेंट कांक्रीट स्लैब से निर्माण किया जाना है। आवास के साथ रसोई एवं शौचालय का निर्माण भी आवश्यक है।

चयन प्रक्रिया : वर्ष 2020-21 में SECC डाटा 2011 में दिए गए आकड़ों के आधार पर ग्राम सभा द्वारा हितग्राहियों का चयन किया जाता है।

केन्द्र, राज्य अंश : केन्द्र और राज्य का अंश क्रमशः
-मैदानी क्षेत्रों के लिए 60 : 40 है, एवं – उत्तर-पूर्वी राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 90 : 10 है।
-राजमिस्त्री प्रशिक्षण: कुशल प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों से आवास निर्माण कराने हेतु ग्रामीण

उपलब्धि :

  • राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। : छत्तीसगढ़ राज्य में वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2020-21 के बीच 8,21,325 आवास पूर्ण किये जा चुके हैं।
  • पी.एम. आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत वर्ष 2020-21 में आवास निर्माण का लक्ष्य 157,815 रखा गया था, जिसमें 1,57,006 आवासों की स्वीकृति पूर्ण कर ली गयी है।
  • पी.एम. आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत प्रथम चरण के भारत सरकार के परफॉर्मेंस इंडेक्स रैंकिग अनुसार छत्तीसगढ़ का स्थान 95.1% के साथ ‘प्रथम’ है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

गांव की सामाजिक एवं आर्थिक उन्नति की कल्पना अच्छी सड़कों के बिना संभव नहीं है। सड़कों द्वारा गाँवों को जोड़ने का उद्देश्य न केवल देश के ग्रामीण विकास में सहायक है, बल्कि इसे गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम में एक प्रभावी घटक के रूप में स्वीकार किया गया है. गाँवों को अच्छे बारहमासी सड़कों से जोड़ने हेतु 25 दिसम्बर, 2000 से यह योजना प्रारम्भ की गई.

आरंभ : 25 दिसम्बर, 2000

उद्देश्य:

  1. सामान्य क्षेत्रों में 500 से अधिक आबादी वाले गाँवों को अच्छे बारहमासी सड़कों से जोड़ना.
  2. आदिवासी क्षेत्र एवं IAP जिलों में 250 या अधिक आबादी की बसाहटों को अच्छी बारहमासी सड़कों से जोड़ना।
  3. ग्रामीण विकास विभाग भारत सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित विकासखण्डों का चयन करते हुए इनमें 100 से 249 जनसंख्या वाली बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने की स्वीकृति है।

प्राथमिकता

प्रथम : सभी 1000 या उससे अधिक आबादी की बसाहटों (आदिवासी तथा पहाड़ी क्षेत्र की स्थिति में 500 या उससे अधिक आबादी की बसाहटों) को बारामासी मार्ग से जोड़ने का कार्य

दूसरी : सभी 500 या उससे अधिक आबादी की बसाहटें (आदिवासी, पहाड़ी एवं IAP क्षेत्रों में 250 या उससे अधिक आबादी की बसाहटें) को बारामासी मार्ग से जोड़ने हेतु नई सड़क निर्माण

तीसरी : सभी मुख्य मार्गों (Through Routes) का उन्नयन

चौथी : सभी संपर्क मार्ग (Link Routes) का उन्नयन

सड़क की चौड़ाई : छत्तीसगढ़ राज्य में 5.50 मीटर चौड़ाई की सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है।

अपील अधिकारी : मुख्य कार्यपालन अधिकारी

छत्तीसगढ़ में योजना की प्रगति

  • छत्तीसगढ़ राज्य में यह कार्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को सौंपा गया है।
  • छत्तीसगढ़ राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत अभी तक (सितम्बर2021 तक) 8539 सड़कें, लम्बाई 42,524 कि.मी. एवं 375 वृहत पुल की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसमें 38,038 कि.मी. लम्बाई की 7,631 सड़कों का निर्माण किया जा चुका है।

बजट में प्रावधान

  • छत्तीसगढ़ राज्य के बजट 2022-23 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हेतु 1675 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है।
  • वित्तीय वर्ष 2022-23 में 900 किमी. सड़क एवं 24 पुलों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 47 स्टील पुलों का निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गांवों की सामाजिक और आर्थिक उन्नति के उद्देश्य से बिना जुड़ी बसाहटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए 23 अप्रैल 2011 से मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना शुरू की गयी है। जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मापदंडों में नहीं आते ऐसी बसाहटों को इस योजना में जोड़ा जाएगा।

आरंभ : 23 अप्रैल 2011

वित्त व्यवस्था : राज्य पोषित योजना,80% नाबार्ड से ऋण तथा 20% राज्य का अंश

उद्देश्य : प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मापदण्डों में नहीं आने वाली समस्त बसाहटें जहां की आबादी सामान्य क्षेत्रों में 500 से कम है तथा आदिवासी क्षेत्रों में 250 से कम है अथवा जहां दोहरे सड़क सम्पर्क की जरूरत है, को अच्छे बारहमासी डामरीकृत सड़क के माध्यम से मुख्य सड़क से जोड़ते हुए सड़क संपर्क उपलब्ध कराया जाना है।

योजना की प्रगति : इस योजना अंतर्गत अद्यतन 1771 सड़कें, लंबाई 5361.90 कि. मी. की स्वीकृति जारी की गई है। माह सितम्बर 2021 तक 1591 सड़कों में 4580.94 कि.मी. लंबाई पूर्ण किया गया है।

अन्य प्रावधान:

  • सड़कों पर ग्रामीण जरूरतों का ध्यान, हर एक-डेढ़ किलोमीटर में यात्री प्रतीक्षालय, शौचालय, पेयजल की सुविधा भी।
  • ट्रैक्टर खड़े करने हेतु ले-बाई भी बनाने की व्यवस्था ।
  • राजनांदगांव जिले से राज्यव्यापी शुरूआत।
  • इस योजना के तहत बिना जुड़ी बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
  • छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण को इसकी जिम्मेदारी सौपी गई है.

मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना

शहरों में गौरव पथ योजना के तर्ज पर गावों में सीमेंट कांक्रीट सड़क एवं नाली के निर्माण के लिए वर्ष 2012-13 से मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना लागू की गई है।

आरंभ : 9 अप्रैल, 2012 से लागू

वित्त व्यवस्था : 80% नाबार्ड से ऋण तथा 20% राज्य का अंश, राज्य पोषित योजना

उद्देश्य : ऐसे ग्राम जहां पर कीचड़ एवं धूल मिट्टी की समस्या है, में पक्की सीमेण्ट क्रांकीट सड़क एवं नाली का निर्माण करना।

प्रावधान : योजनान्तर्गत कम से कम 200 मीटर एवं अधिकतम 500 मीटर लम्बाई की 6 मीटर चौड़ाई की सड़क जिसमें 4 मीटर चौड़ाई का क्रांकीट मार्ग तथा सड़क के दोनों तरफ 0.5 मीटर का खरंजा एवं 0.5 मीटर चौड़ाई की V आकार की नाली बनायी जाती है।

अनिवार्य शर्त :

  • मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना अंतर्गत कम से कम एक तरफ नाली निर्माण आवश्यक है।
  • यदि अपरिहार्य कारणों से एक तरफ भी नाली निर्माण हेतु पर्याप्त स्थल उपलब्ध न हो, ऐसी स्थिति में गौरवपथ का निर्माण प्रारंभ नहीं कर कार्य निरस्तीकरण हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश है।

योजना की प्रगति :  इस योजना अंतर्गत अब तक 7070 सड़कें, लंबाई 2032.58 कि. मी. की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। अद्यतन कुल 7061 गौरव पथ, लंबाई 2089 कि.मी. पूर्ण किये गए जिनमें रू. 1034.83 करोड़ व्यय किया गया है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन

ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सामाजिक और वास्तविक रूप से सुदृढ़ क्षेत्र बनाने के महात्वाकांक्षी उपाय के रूप में केन्द्रीय मंत्रि-मंडल ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन का अनुमोदन किया। मिशन की परिकल्पना अनिवार्य रूप से शहरी मानी जाने वाली सुविधाओं से समझौता किये बिना समता और समावेशन पर जोर देते हुए ग्रामीण जन-जीवन के मूल स्वरूप को बनाये रखते हुए गांवों के क्लस्टर को रूर्बन गांव के रूप में विकसित करना है।

आरंभ: 21 फरवरी 2016 से

विभाग: ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार

उद्देश्य: आर्थिक कार्यकलापों के अवसर उपलब्ध कराना, कौशल एवं स्थानीय उद्यमशीलता को विकसित करना भौतिक अवसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराकर रूर्बन क्लस्टर का सृजन करना क्षेत्र कासमग्र विकास

लक्ष्य :

  • 5 वर्षों में 300 ग्रामीण विकास क्लस्टर का सृजन
  • उक्त लक्ष्य में छत्तीसगढ़ राज्य में 3 चरणों में कुल 19 क्लस्टर का चयन किया गया है, जिसमें 12 जनजातीय और 7 गैर-जनजातीय क्लस्टर शामिल है।

क्लस्टर :रूर्बन मिशन में दो प्रकार के क्लस्टर लिये जायेंगे :

  1. गैर जनजाति क्लस्टर
  2. जनजाति क्लस्टर |

घटक : निम्नांकित 14 घटकों के कार्यकलाप/सुविधाओं का सृजन किये जाने की परिकल्पना की गई है

  1. आर्थिक कार्यकलापों से सम्बद्ध कौशल विकास प्रशिक्षण
  2. कृषि प्रसंस्करण, कृषि सेवा, भण्डारण और वेयरहाउसिंग
  3. साजों सामानों से पूरी तरह लैस मोबाईल हेल्थ यूनिट
  4. विद्यालय/ उच्चतर शिक्षा सुविधाओं का उन्नयन
  5. स्वच्छता
  6. पाईप के जरिये जल आपूर्ति का प्रावधान
  7. ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन
  8. ग्रामीण गलियां तथा नालियां
  9. स्ट्रीट लाईट
  10. गावों के बीच सड़क सम्पर्क
  11. सार्वजनिक परिवहन
  12. एल. पी. जी. गैस कनेक्शन
  13. डिजिटल साक्षरता
  14. ई-ग्राम कनेक्टिविटी के लिए सिटिजन सर्विस सेंटर।

इस प्रकार के क्लस्टर तैयार करते समय कृषि और इससे जुड़े कार्य-कलापों से संबंधित घटकों पर विशेष जोर दिया जाना अपेक्षित है।

उपलब्धियां :

  • भारत सरकार द्वारा देश के 75 शीर्ष रूर्बन क्लस्टर में छत्तीसगढ़ राज्य के 13 क्लस्टरों को शामिल किया गया है
  • भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है।
  • योजनांतर्गत आवश्यक पूरक वित्त पोषण (CGF) मद में राज्य को कुल राशि रूपये 285 करोड़ प्राप्त हुए हैं, जबकि कुल स्वीकृत CGF राशि रू. 375 करोड़ है, जिसके विरूद्ध राशि रूपये 235 करोड़ (62.66%) का व्यय किया जा चुका है एवं विभिन्न विभागीय योजनाओं (अभिसरन मद) से लक्षित राशि रू. 1,066. 34 करोड़ के विरूद्ध राशि रूपये 712.57 करोड़ (66.82% ) का व्यय किया जा चुका है।
  • MIS प्रगति-मिशन अंतर्गत Geo-tagging का पायलट करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है तथा अभी तक कुल 5,089 (91%) कार्यो की Geo-tagging पूर्ण कर ली गई है।

आम आदमी बीमा योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन खेतिहरों को निःशुल्क बीमा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आम आदमी बीमा योजना का शुभारम्भ 2 अक्टूबर, 2007 को शिमला से किया था। केन्द्र प्रायोजित इस योजना का संचालन राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों की सरकारों व भारतीय जीवन बीमा निगम के सहयोग से किया जा रहा है।

आरंभ : 2 अक्टूबर, 2007 से भारत सरकार द्वारा योजना आरंभ

छत्तीसगढ़ में : 01 फरवरी 2009 से यह छत्तीसगढ़ में लागू की गई है।

बीमा कंपनी : भारतीय जीवन बीमा निगम

पात्रता :

  • सदस्य को परिवार का मुखिया या ग्रामीण भूमिहीन परिवार का कमाऊ सदस्य होना चाहिये.
  • सदस्य/ आवेदक की आयु 18 से 59 वर्ष के बीच होना चाहिये.
  • आयु प्रमाण के लिए मान्य है- राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र,विद्यालय प्रमाणपत्र, मतदाता सूची, पहचान पत्र.
  • सदस्य BPL चिह्नाकित परिवार का सदस्य होना चाहिए।

प्रीमियम:
(अ) प्रीमियम प्रतिवर्ष ₹200 है, जिसमें भारत सरकार ₹100 तथा राज्य शासन ₹100 देगी।
(ब) हितग्राही द्वारा कोई भुगतान नहीं किया जाना है।

लाभ : बीमा अवधि समाप्त होने से पूर्व सदस्य की सामान्य मृत्यु होने पर ₹30,000 का बीमा धन नामांकित व्यक्ति को देय होगा।

दुर्घटना बीमा लाभ– दुर्घटना से मृत्यु होने पर अथवा दुर्घटना के कारण आंशिक / पूर्ण स्थाई अपंगता होने पर निम्न लाभ देय होंगे :
अ) दुर्घटना में मृत्यु होने पर – ₹75,000/
ब) दुर्घटना में स्थायी पूर्ण विकलांगता पर ₹75,000
स) दुर्घटना में एक आंख हाथ पांव अक्षम होने पर ₹37,500

शिक्षावृत्ति : योजना के अंतर्गत एएबीवाय के सदस्यों के बच्चों को – छात्रवृत्ति लाभ उपलब्ध करवाया जाता है. इसमें 9 वीं से 12वीं स्तर में पढ़ रहे अधिकतम दो बच्चों को प्रतिमाह ₹100 की दर से छात्रवृत्ति दी जायेगी, जो प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 1 जनवरी के बीच अर्द्धवार्षिक रूप से देय है.

उपलब्धियां : योजनान्तर्गत 3,61,073 भूमिहिन परिवारों का बीमा किया गया है।

 अटल खेतिहर मजदूर बीमा योजना

प्रदेश में 2.5 एकड़ या उससे कम कृषि भूमि धारक ग्रामीण खेतिहर मजदूरों के लिये राज्य शासन द्वारा 25 दिसम्बर 2013 को अटल खेतिहर मजदूर बीमा योजना लागू की गयी।

आरंभ : 25 दिसम्बर 2013

बीमा कंपनी:भारतीय जीवन बीमा निगम

पात्रता:

  • सदस्य की आयु 18 से 59 वर्ष के बीच होना चाहिये.
  • खेतिहर मजदूर जो 2.5 एकड़ या उससे कम कृषि भूमि धारण करते हैं तथा दूसरों की कृषि भूमि में मजदूरी करते हैं।
  • केन्द्र या राज्य सरकार द्वारा संचालित अन्य बीमा योजना के हितग्राही इस योजना के पात्र नहीं होगें।
  • बी.पी.एल. श्रेणी तथा उसके आस-पास के खेतिहर परिवार

प्रीमियम : प्रीमियम प्रतिवर्ष ₹200 है, जिसमें-

  • भारत सरकार ₹100 तथा
  • राज्य शासन ₹100 देगी।

लाभ : बीमा अवधि समाप्त होने से पूर्व सदस्य की-

  • सामान्य मृत्यु होने पर ₹30,000 नामांकित व्यक्ति को देय होगा।
  • दुर्घटना बीमा लाभ- दुर्घटना से मृत्यु होने पर अथवा दुर्घटना के कारण आंशिक / पूर्ण स्थाई अपंगता होने पर निम्न लाभ देय होंगे :
    अ) दुर्घटना में मृत्यु होने पर – ₹75,000
    (ब) दुर्घटना में स्थायी पूर्ण विकलांगता पर- ₹75,000
    (स) दुर्घटना में एक आंख/ हाथ/पांव अक्षम होने पर- ₹37,500

शिक्षावृत्ति: योजना के अंतर्गत आम आदमी बीमा योजना (AABY) के सदस्यों के बच्चों को छात्रवृत्ति लाभ उपलब्ध करवाया जाता है. इसमें 9 वीं से 12वीं स्तर में पढ़ रहे अधिकतम दो बच्चों को प्रतिमाह ₹100 की दर से छात्रवृत्ति दी जायेगी, जो प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 1 जनवरी के बीच अर्द्धवार्षिक रूप से देय है.

उपलब्धियां : योजनान्तर्गत 13.54 लाख हितग्राहियों की बीमा हेतु 2,69,26,922 रूपये का भुगतान भारतीय जीवन बीमा निगम को किया गया।

 स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण)

पूर्व संचालित निर्मल भारत अभियान के स्थान पर 02 अक्टूबर 2014 से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की शुरूआत की गई है, जिसका उद्देश्य देश की सभी ग्राम पंचायतों को 02 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्त करना था।

आरंभ : 2 अक्टूबर 2014

उद्देश्य :

  • खुले में शौच मुक्त समुदायों का सृजन करना, •
  • समुदाय संचालित स्वच्छता प्रविधि द्वारा लोगों के में व्यवहार परिवर्तन पर जोर।
  • छात्रों के बीच स्वास्थ्य शिक्षा और साफ, सफाई की आदतों को बढ़ावा देना है।
  • सुरक्षित और स्थायी स्वच्छता के लिए किफायती उपयुक्त तकनीक को बढ़ावा देना तथा
  • ठोस एवं तरल अपशिष्ट का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

लक्ष्य :

  • देश की सभी ग्राम पंचायतों को 02 अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्त करना,
  • फेस-1 (2014-19 ) – 4 जनवरी 2018 को छत्तीसगढ़ राज्य ने खुले में शौच मुक्त की स्थिति प्राप्त की राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप 2 अक्टूबर 2019 संपूर्ण राष्ट्र के खुले में शौच मुक्त होने के लक्ष्य की प्राप्ति की घोषणा की गयी।
  • फेस-II (2020-25) – 1 अप्रैल 2020 को स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के फेस-II की शुरूआत हुई जिसका क्रियान्वयन 31 मार्च 2025 तक किया जाना है।

नोडल विभाग : देश में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय तथा राज्य में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

पात्र : समस्त बी.पी.एल., अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा ए.पी.एल. श्रेणी में लघु/सीमान्त कृषक, भूमिहीन, विकलांग, महिला या विकलांग मुखिया परिवार

प्रावधान : रू. 12,000 व्यक्तिगत शौचालय हेतु (रू.10,000 शौचालय निर्माण हेतु एवं रू. 2,000 पानी की व्यवस्था तथा हाथ धोने का प्लेटफार्म हेतु) प्रावधानित है।

उपलब्धि : आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार 04 जनवरी 2018 को प्रदेश ने शौचालय निर्माण के लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया है।

अन्य घटक

सामुदायिक स्वच्छता परिसर ( Community Sanitary Complex )

  • प्रत्येक ग्राम पंचायत को खुले में शौच से मुक्त करने हेतु सामुदायिक स्वच्छता परिसर निर्माण हेतु अधिकतम रूपये 2 लाख का प्रावधान है। जिसमें से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का हिस्सा 70% एवं 15वें वित्त आयोग की राशि 30% होगी।
  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के वित्तीय प्रावधानों में शौचालयों के रखरखाव हेतु केन्द्र एवं राज्य के मध्य 60:40 की राशि का प्रावधान किया गया है, जिसके रखरखाव की जिम्मेदारी का निर्वहन ग्राम पंचायतों के द्वारा किया जाना है।

फीकल वेस्ट मैनेजमेंट

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की मार्गदर्शिका अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सुरक्षित लीचपिट शौचालयों के निर्माण को प्राथमिकता दी गयी हैं।

गोबरधन

  • ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जैविक अपशिष्टों को बायोगैस में परिवर्तित कर ऊर्जा उत्पादन एवं अपशिष्टों के समुचित निपटान हेतु योजना संचालित किया जाना है
  • बायोगैस संयंत्रों की मॉडलों की स्थापना हेतु प्रति जिला अधिकतम 50 लाख रूपये के बजट का प्रावधान है।

ठोस एवं तरल अपशिष्ट (कचरा) प्रबंधन-

योजनांतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन हेतु निम्नानुसार प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रावधान हैं

1. 150 घर परिवार तक के लिये रू- 7 लाख तक
2. 300 घर परिवार तक के लिये-रू. 12 लाख तक
3. 500 घर परिवार तक के लिये-रू. 15 लाख तक
4.500 घर परिवार से अधिक के लिये-रू. 20 लाख तक

इसमें निर्मल ग्राम पुरस्कार के लिये प्रस्तावित एवं निर्मल ग्राम पुरस्कार प्राप्त पंचायतों को प्राथमिकता दी जावेगी।

क्रियान्वयन हेतु संस्थागत ढांचा

राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)-

  • यह सोसायटी के रूप में पंजीकृत है, जिसका प्रमुख कार्य सरकार से प्राप्त दिशा निर्देशों का समस्त जिलों में अनुपालन कराना है।

प्रमुख समितियां

1. शासी निकाय
2. शीर्ष समिति
3. कार्यकारिणी समिति
4. राज्य योजना स्वीकृति समिति

जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)

  • जिलों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गतिविधियों के क्रियांवयन हेतु जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत 2 समितियां गठित है-
    1. जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) शासी निकाय
    2.प्रबंधन समिति

खण्ड प्रबंधन कार्यक्रम ईकाई

  • अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की अध्यक्षता में खण्ड कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई का गठन किया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत इसके सचिव होंगे।

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति

  • ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया है इस समिति के अध्यक्ष ग्राम पंचायत के सरपंच तथा सचिव ग्राम पंचायत सचिव होंगे।
  • समिति के अन्य सदस्यों के तौर पर शासकीय विभागों के प्रतिनिधियों, जैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, मितानीन, शिक्षक आदि को सम्मिलित किया गया है।

उपलब्धियाँ

  • वित्तिय वर्ष 2021-22 में उपलब्ध राशि 290.78 करोड़ के विरूद्ध 50.10 करोड़ की राशि का व्यय हुआ।
  • वित्तीय वर्ष 2021-22 में 6031 सामुदायिक शौचालयों के लक्ष्य के विरूद्ध 2775 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण हुआ।
  • छत्तीसगढ़ राज्य के बजट 2022-23 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) हेतु 500 करोड़ रूपये का प्रावधान है।

 सांसद आदर्श ग्राम योजना

  • 11 अक्टूबर, 2014 से पूरे देश में सांसद आदर्श ग्राम योजना लागू की गई। प्रथम चरण के दौरान छत्तीसगढ़ के ।। लोकसभा तथा 5 राज्यसभा सांसदों द्वारा 16 ग्रामों का चयन किया गया।
  • इसके बाद कुल 8 चरणों में 105 ग्रामों का चयन किया गया, जिनमें से 58 ग्रामों की जानकारी VDP पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है।
  • योजना अन्तर्गत सभी ग्रामों के लिए ग्राम विकास योजना (VDP) तैयार सभी चयनित पंचायतों में लोक सेवा केन्द्र का संचालन, शत-प्रतिशत टीकाकरण, तथा संस्थागत प्रसव हो रहा है।
  • सभी चयनित ग्राम पंचायतों ने विभिन्न प्रकार की सेवाओं पर कर के माध्यम से स्वयं के आय का साधन तैयार किया है।
  • स्वच्छता को केन्द्र में रखते हुए सभी चयनित ग्रामों में मनरेगा, पंद्रहवां वित्त एवं मूलभूत योजना के अभिसरण द्वारा प्रत्येक घर से कचरा उठाने एवं बेहतर निपटारा के लिए ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन परियोजना तैयार कर क्रियान्वयन किया जा रहा है।
  • सभी चयनित ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन में शामिल किया गया है।
  • कौशल विकास एवं रोजगार हेतु चयनित ग्राम पंचायतों को दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना, रोशनी परियोजना एवं मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत शामिल करते हुए युवक/युवतियों को रोजगार एवं स्वरोजगार हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। सभी पंचायतों में शत-प्रतिशत टीकाकरण तथा संस्थागत प्रसव हो रहा है। संपूर्ण चयनित ग्राम पंचायत ODF (खुले में शौच से मुक्त) हो चुकी है। सभी चयनित ग्राम पंचायातों को सघन विकास ग्राम के रूप में राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन में शामिल किया गया है।

 विधायक आदर्श ग्राम योजना

माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 29 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तर्ज पर विधायकों से भी एक-एक ग्राम पंचायत को विकसित करने का सुझाव दिया गया। जिसके तारतम्य में 01 अप्रैल 2015 से छत्तीसगढ़ राज्य में माननीय मुख्यमंत्री जी के पहल पर विधायक आदर्श ग्राम योजना प्रारंभ की गई है।

  • योजनांतर्गत प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त 90 विधायकों द्वारा एक-एक ग्राम का चयन किया गया है। ग्राम के विकास के लिये समस्त चयनित ग्रामों की ग्राम विकास योजना तैयार कर ली गई है।
  • इसके बाद कुल 3 चरणों में (90+ 81 + 68 ) = 239 ग्रामों का चयन किया गया है।
  • समस्त विधायक आदर्श ग्राम में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति में काफी सुधार हुआ है।
  • सम्पूर्ण टीकाकरण एवं संस्थागत प्रसव पर विशेष बल दिया जा रहा है।
  • कठिन क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु सोलर वाटर एटीएम एवं नल कूप की स्थापना की गई है।
  • वंचित परिवारों की आजीविका संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना

आयु सीमा : 15 वर्ष से 35 वर्ष आयु समूह

लक्षित समूह : गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के युवा

प्रावधान : इन युवाओं को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित कर उनमें से कम से कम 70% युवाओं को राज्य में और राज्य के बाहर रोजगार से जोड़ना इस योजना का लक्ष्य है।

संलग्नता : तीन साल की यह योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत चल रही है।

उपलब्धि :आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार वर्तमान में योजनांतर्गत कुल 97 परियोजनाएं लागत राशि 798 करोड़ रूपये एवं 74,976 युवाओं को प्रशिक्षण हेतु स्वीकृत है।

विविध योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • अन्त्योदय कार्यक्रम का उद्देश्य गरीबों में अति गरीब परिवार की सहायता करना था।
  • BPL के हितग्राहियों को समुचित प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से भारत सरकार की सहायता से इस राज्य के 27 जिलों में R-SETI की स्थापना की गई है।

सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 (SECC-2011)

ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी रेखा के नीच जीवन यापन करने वाले परिवारों की पहचान के लिए पिछला सर्वेक्षण 2002 में कराया गया था।

भारत सरकार के निर्देशन में 09 वर्ष पश्चात् सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर पुनः जरूरतमंद परिवारों के पहचान के लिए देश में 2011 में सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 का कार्य कराया गया है, जो वर्ष 2015 में पूर्ण हुआ। सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 निम्नांकित उद्देश्यों के लिए सम्पन्न करायी। गयी है

1. देश में परिवारों को उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर उन्हें रैंक प्रदान कर राज्य के गरीब जरूरतमंद परिवारों की पहचान की जा सके।

2. परिवारों को उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति के आधार पर अत्यधिक वंचित एवं गरीब परिवारों की पहचान के आधार पर सरकारी योजनाओं को सही लाभार्थी तक पहुंचाने में सहायता प्राप्त होगी। इससे सभी पात्र लाभार्थियों तथा सरकारी योजना का लाभ पहुंचना सुनिश्चित होगा।

3. देश में जनसंख्या के जातिवार ब्यौरों की प्रारंभिक जानकारी उपलब्ध हो सके।

सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना-2011 का कार्य, ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में किये गये है। सर्वेक्षण में जाति एवं धर्म का भी सर्वेक्षण किया गया है। जाति एवं धर्म का उपयोग केवल भारत के महापंजीयक द्वारा सांख्यिकीय कार्यों के लिए किया जाना है। जाति एवं धर्म की जानकारी अन्य जानकारियों की तरह सार्वजनिक नहीं किए जाना है।

सामाजिक आर्थिक एवं जाती जनगरना, 2011 डीके कार्य छत्तीसगढ़ राज्य में 2011 के जनगरना के अनुसार पूर्व के 18 जिलों के आधार पर कराया गया है ।

भारत सरकार द्वारा जारी सामाजिक आर्थिक एवं जाती जनगरना 2011 के अकणो के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्ये में ग्रामीण क्षेत्रो में कुल 45,40,999 परिवार निवासरत है ।

पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग की योजनाए 

सामाजिक सहायता कार्यक्रम

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना

राज्य शासन द्वारा संचालित योजना

क्रियान्वयन ईकाई : शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत

उद्देश्य : निःशक्त व्यक्तियों को आर्थिक सहायता देकर सम्मानपूर्वक जीवन-यापन करने हेतु सहयोग देना।

पात्रता :

  • छत्तीसगढ़ का गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाला मूल निवासी परिवार का व्यक्ति जो निम्न में से किसी एक श्रेणी का हो
  • 06 से 17 वर्ष आयुवर्ग के अध्ययनरत निःशक्त बच्चे (जिसमें 6-14 आयु वर्ग के निःशक्त बच्चे जो अध्ययनरत नहीं है, उन्हें पात्रता नहीं होगी)
  • 18 वर्ष या अधिक आयु के सामान्य निःशक्त व्यक्ति। बौने व्यक्ति ।

मिलने वाले लाभ : ₹350 प्रतिमाह

 मुख्यमंत्री पेंशन योजना

उद्देश्य : सामाजिक, आर्थिक एवं जाति जनगणना 2011 की सर्वे सूची के आधार पर सूचीबद्ध वरिष्ठ नागरिकों एवं विधवा परित्यक्त महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सम्मानपूर्वक जीवन जीने हेतु सहयोग देना

पात्रता

  • 60 वर्ष या अधिक उम्र के वृद्ध
  • 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की विधवा या परित्यक्त महिलाएं
  • छत्तीसगढ़ का मूल निवासी हो

मिलने वाले लाभ : ₹350 प्रतिमाह

सुखद सहारा योजना

क्रियान्वयन ईकाई : शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय तथा ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत

उद्देश्य : : विधवा/परित्यक्त महिला हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन करने हेतु सहयोग देना।

पात्रता : 18 से 39 वर्ष आयु की निराश्रित विधवा या परित्यक्ता महिलायें

मिलने वाले लाभ :  ₹350 प्रतिमाह

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना

निर्धनता रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 15 अगस्त, 1995 को शुरू किए गए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के एक घटक के रूप में संचालित राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का विस्तार करते हुए यह योजना अब निर्धनता रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वृद्धजनों के लिए लागू की गई हैं.

राज्य में आरंभ : 1 अक्टूबर 1995 से संचालित

नाम परिवर्तन : 19 नवम्बर, 2007 से राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया गया है।

क्रियान्वयन ईकाई : शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय तथा गावों में ग्राम पंचायत ।

उद्देश्य : निराश्रित वृद्धजनों को आर्थिक सहायता प्रदान कर सम्मापूर्वक जीवन-यापन करने हेतु सहयोग करना।

पात्रता : BPL के 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वृद्धजन ।

मिलने वाले लाभ :
₹350 प्रतिमाह-60 से 79 वर्ष आयुवर्ग के वृद्धजनों को
₹650 प्रतिमाह 80 वर्ष से अधिक उम्र वाले वृद्धों को

राज्य का हिस्सा : उक्त पेंशन राशियों में राशि ₹150 राज्यांश सम्मिलित है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना

योजना प्रारंभ : फरवरी 2009 से प्रारंभ।

उद्देश्य : गरीबी रेखा के नीचे की विधवा महिला हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर सम्मानपूर्वक जीवन-यापन करने हेतु सहयोग देना।

सहायता राशि : ₹350 प्रतिमाह ।

पात्रता : 40 से 79 आयु की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले विधवा महिलायें।

राज्य का हिस्सा : उक्त पेंशन राशियों में राशि ₹50 राज्यांश सम्मिलित है।

अटल पेंशन योजना

  • यह योजना सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिमाह कम अंशदान पर पेंशन का लाभ देने हेतु प्रस्तावित की गई है
  • वे व्यक्ति जो निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, निश्चित पेंशन प्राप्त करने के लिए 1000 से ₹5000 व्यय कर इस योजना को चुन सकते हैं
  • अंशदायी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी या नामित व्यक्ति पेंशन एवं संचित राशि का दावा कर सकता है, किन्तु यह योजना केवल निम्न आय वर्ग समूह के लिए है जो करदाताओं की श्रेणी में नहीं हैं।
  • यह योजना समाज के लोगों जैसे- सुरक्षा, गार्डवाहन चालक या घरेलू कार्य में सहायता देने वालों के लिए लागू की गई हैं।

पेंशन योजना

नियमन यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है जो पेंशन निधि नियामक एवं विकास अधिकरण (DFRDA) द्वारा नियमित की जाती है, जिसे सेवानिवृत्ति के पश्चात् की आवश्यकताओं के उद्देश्य से लागू किया गया है।

इस योजना की धारा 80CCD के अंतर्गत 1.5 लाख रु. तक जैसा धारा 80C में प्रावधानित है, का कर लाभ प्राप्त होता है।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा और सुरक्षा बीमा योजना

संचालन : भारत सरकार द्वारा समर्थित एवं तैयार की गई जीवन बीमा योजना

लाभार्थी : 18से 15 वर्ष की आयु के कोई भी व्यक्ति

प्रावधान :

  • इसमें न्यनूतम वार्षिक किस्त 330 रूपये है जिसमें मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को 2 लाख रूपये की राशि प्राप्त होती है।
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना एक वर्ष की नवीकरणीय योजना है जो दुर्घटना से हुई मृत्यु सह-विकलांगता के लिए प्रस्तावित की गई है, जिसमें 12 रूपये के वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रूपये की राशि प्राप्त होती है।
  • बीमित व्यक्ति को आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रूपये प्राप्त होगा।

सुकन्या समृद्धि योजना

यह योजना शासन की बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ आंदोलन का एक भाग हैं।

लागू तिथि : 12 जनवरी 2015

लाभ : इस योजना में निवेश करने पर 9.1 प्रतिशत की वार्षिक दर से लाभ प्राप्त होता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 हेतु यह दर 7.6 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

विशेष : इस योजना में प्रस्तावित ब्याज दर परिवर्तित की जा सकती है और प्रतिवर्ष संयोजित की जाएगी।

राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना

योजनान्तर्गत गरीबी रेखा से नीचे के परिवार के 18 वर्ष से अधिक एवं 60 वर्ष से कम आयु के मुख्य कमाऊ सदस्य की मृत्यु होने पर 20,000 रू. दिये जाते हैं। भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत राशि उपलब्ध कराई जाती है।

 निःशक्तजनों के लिए योजनाएं

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय निःशक्तजन पेंशन योजना

योजना प्रारंभ : फरवरी 2009 से प्रारंभ।

उद्देश्य : BPL परिवार के गंभीर व बहुविकलांगों को आर्थिक सहायता

पात्रता : गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के 18 से 79 वर्ष आयुवर्ग के गंभीर एवं बहुविकलांग व्यक्ति।

लाभ : ₹500 प्रतिमाह

राज्य का हिस्सा : उक्त पेंशन राशियों में राशि ₹200 राज्यांश सम्मिलित है।

कृत्रिम अंग / सहायक उपकरण प्रदाय योजना

क्रियान्वयन : पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा

पात्रता :
1. छत्तीसगढ़ का निवासी हो।
2. किसी भी प्रकार की निःशक्तता 40% या उससे अधिक हो।

मिलने वाले लाभ :

  • निःशक्त जनों को कैलीपर्स, ट्रायसिकल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, श्वेत छड़ी व ब्रेल किट आदि उपलब्ध कराये जाते हैं।
  • ₹5000 मासिक आय सीमा तक के लागों को निःशुल्क ₹5001-8000 मासिक आय – 50% छूट पर
  • उपकरण के लिए अधिकतम सहायता राशि ₹6900 तक दी जाएगी

 निःशक्तजन छात्रवृत्ति योजना

क्रियान्वयन : पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा

उद्देश्य : निःशक्त बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करना।

पात्रता:

1. छत्तीसगढ़ का निवासी हो।
2. निःशक्तता 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो।
3. शाला/महाविद्यालय/तकनीकी शाला का नियमित छात्र हो।
4. छात्रवृत्ति हेतु अभिभावकों की आय सीमा ₹8000 प्रतिमाह

मिलने वाले लाभ : इस योजनांतर्गत प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक एवं महाविद्यालयीन अध्ययनरत् निःशक्त विद्यार्थियों को पात्रता एवं कक्षा अनुसार ₹150 से 190 प्रतिमाह छात्रवृत्ति विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाती है तथा दृष्टि बाधित छात्रों को ₹100/ वाचक भत्ता प्रतिमाह प्रदान किया जाता है।

सामर्थ्य विकास योजना

सामर्थ्य विकास योजना अन्तर्गत प्रदेश के निःशक्त हितग्राहियों को उपयुक्त, टिकाऊ, वैज्ञानिक रूप से तैयार आधुनिक एवं मानकीकृत सहायक यंत्र एवं उपकरण शिविर आयोजित कर प्रदाय किये जाते हैं।

योजना का उद्देश्य निःशक्तजनों का प्रमाणीकरण करना, गतिशीलता बढ़ाना एवं उनका आर्थिक, सामाजिक, व्यावसायिक पुनर्वास करना है। अधिकतम राशि ₹6900 तक की राशि के उपकरण प्रदाय किये जाने का प्रावधान है।

 निःशक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना

क्रियान्वयन : पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा

उद्देश्य : गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार के निःशक्त व्यक्तियों के सामाजिक पुनर्वास एवं स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से विवाह हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करना।

पात्रता :
1.छत्तीसगढ़ का निवासी हो।
2. निःशक्तता 40 प्रतिशत या उससे अधिक।
3. 18 से 45 वर्ष की आयु की महिलाओं एवं 21 से 45 वर्ष आयु के निःशक्त पुरूष (जो आयकर दाता की श्रेणी में नहीं आता)

लाभ : एक व्यक्ति के निःशक्त होने पर राशि ₹50,000 तथा दोनों के निःशक्त होने पर राशि ₹1,00,000 की सहायता राशि दी जाती है।

दीनदयाल निःशक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम

निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 के प्रावधानों के क्रियान्वयन के तहत राज्य में सर्वेक्षण एवं जनगणना में प्राप्त निःशक्तजनों की संख्या में से 40 प्रतिशत से ऊपर निशक्तता वाले निःशक्तजनों को प्रमाणित करने हेतु दीनदयाल निःशक्तजन पुनर्वास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।

क्षितिज अपार संभावनाएं

प्रदेश में निःशक्तजन व्यक्तियों के कल्याण के लिए क्षितिज अपार संभावनाएं नाम से 3 एकीकृत योजना प्रारंभ की गई है

निःशक्तजन शिक्षा प्रोत्सहन योजना

निःशक्त व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 में तहत 18 वर्ष तक की आयु के निःशक्त बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान किये जाने का प्रावधान है। सामान्यतः आर्थिक अभाव एवं निःशक्तता के कारण मेधावी निःशक्त बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हो जाते हैं, जिन्हें संबल प्रदान करने के लिए माध्यमिक/उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले निःशक्त विद्यार्थियों तक तकनीकी तथा उच्च शिक्षा में अध्ययनरत् नियमित निःशक्त छात्रों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

लाभ :

  • जिले में माध्यमिक परीक्षा (दसवीं) से सर्वाधिक अंक पाने वाले निःशक्त छात्र तथा छात्रा को राशि ₹2,000 एकमुश्त ।
  • जिले में उच्चतर माध्यमिक परीक्षा (बारहवीं) में सर्वाधिक अंक पाने वाले निःशक्त छात्र तथा छात्रा को राशि ₹5,000 एकमुश्त
  • आई.टी.आई. /पोलिटेक्निक / स्नातक एवं स्नातकोत्तर (कला, वाणिज्य एवं विज्ञान) पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को राशि ₹6,000 प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि
  • चिकित्सा/तकनीकी/व्यावसायिक शिक्षा में स्नातक एवं स्नाताकोत्तर अध्ययनरत विद्यार्थियों को राशि ₹12,000 प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि
  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में उच्च शिक्षा हेतु 74 विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि स्वीकृत किया गया है।

निःशक्तजन सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना

 

वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरण प्रदाय योजना

60 वर्ष से अधिक आयु के गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले वृद्ध/निराश्रित वृद्ध/वृद्धाश्रम में निवासरत वरिष्ठ नागरिकों को वृद्धावस्था में होने वाली समस्या के निराकरण हेतु उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण, चिकित्सीय देखभाल की सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वरिष्ठ नागरिक सहायक उपकरण प्रदाय योजना वर्ष 2016 से प्रारंभ की गयी है।

वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा दिए गए परामर्श अनुसार अधिकतम ₹6900 तक के डायबिटिक शू, नी-स्पिलिन्ट, स्पिलिन्ट्स (विभिन्न प्रकार के), ब्रेसेस, कॉलर, वाकर, बैसाखी, छड़ी, व्हील चेयर, चश्मा, श्रवण यंत्र, डेन्चर एवं अन्य उपकरण चिकित्सक के परामर्श अनुसार एक या एक से अधिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे।

तीरथ बरत योजना

आरंभ : 4 दिसम्बर, 2012

पुराना नाम : मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना

उद्देश्य : जीवनकाल में एक बार तीर्थ यात्रा कराना

पात्र :

1. छत्तीसगढ़ का स्थानीय निवासी हो
2. 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का हो या
3. निःशक्तजन हो

 

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आजीविका

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