धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar Janjati Chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh

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धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh
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नमस्ते विद्यार्थीओ आज हम पढ़ेंगे धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh के बारे में जो की छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी परीक्षाओ में अक्सर पूछ लिया जाता है , लेकिन यह खासकर के CGPSC PRE और CGPSC Mains में आएगा , तो आप इसे बिलकुल ध्यान से पढियेगा और हो सके तो इसका नोट्स भी बना लीजियेगा ।

धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar Janjati Chhattisgarh Dhanwar Tribe Chhattisgarh

धनवार जनजाति की उत्पत्ति 

धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ के कोरबा, बिलासपुर, सरगुजा, रायपुर एवं रायगढ़ जिले में  मुख्यतः निवास करते हैं । 2011 में इनकी जनसंख्या 50995 दर्शित है। पुरुषों की जनसंख्या 25723 तथा स्त्रियों की जनसंख्या 25272 दर्शित है।

धनवार जनजाति की उत्पत्ति के संबंध में कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। दंतकथाओं के अनुसार पुराने जमाने में युद्ध में धनुष-बाणों का उपयोग किया जाता था, जो आदिवासियों द्वारा तैयार किये जाते थे। धनुष के “धनु” एवं बाण के “वार “ शब्द से ही धनवार शब्द का प्रचलन हुआ है और धनुष-बाण बनाने वाले आदिवासी “धनवार” कहलाने लगे।  ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

धनवार जनजाति के लोग सामान्यतः गोंड, कंवर, सौंता जनजातियों के साथ ग्राम में निवास करते हैं। यह जनजाति अलग से पारा, मोहल्ला बनाकर ग्राम में निवास करती है, जिसे धनवार “पारा” कहते हैं। प्रत्येक धनवार पारा में 7-8 घर एक साथ होते हैं। घर की दीवार सामान्यतः मिट्टी के बने होते हैं, जिनकी छत घास-फूस या देशी खपरैल की होती है ।

मकान बनाने के पूर्व एवं मकान बनने के पश्चात् पूजन कार्य ग्राम के पुजारी से कराया जाता है। घर में प्रायः दो कमरे तथा परछी होती है। पशुओं को बाँधने का स्थान कोठा अलग से होता है। घर में देव स्थान एवं अनाज रखने की कोठी की व्यवस्था मुख्य कमरे में की जाती है। कपड़े, रसोई के बर्तन, चारपाई एवं कृषि उपकरण इनकी प्रमुख घरेलू वस्तुएँ हैं। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

धनवार जनजाति के रहन-सहन 

पुरुष तथा महिलाएँ दाँतों की सफाई बबूल, नीम या हरें की दातुन से कर प्रतिदिन स्नान करते हैं। शरीर के मैल निकालने के लिये चिकने पत्थर के टुकड़े का उपयोग करते हैं। काली चिकनी मिट्टी से बाल धोकर बालों में मूंगफली, गुल्ली, नीम आदि का तेल लगाकर कंघी करते हैं। स्त्रियाँ “खोपा” (जूड़ा) बनाती हैं। स्त्रियाँ लुगड़ा, पोलका पहनती हैं। पुरुष पंछा, बंडी तथा कभी-कभी धोती कुर्ता पहनते हैं। स्त्रियाँ हाथ, पैर, चेहरे पर गुदना गोदाती हैं। आभूषण में हाथ में चूड़ियाँ, ऍठी, गले में सुतिया, सुर्य, नाक में फूली, कान में खिनवा या ऐरिंग पहनती हैं। 

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इनका मुख्य भोजन कोदो या चावल का भात, बासी, पेज, मौसमी सब्जियाँ, उड़द, मूंग, कुलथी की दाल है। मांसाहार में अण्डे, मछली, मुर्गी, बकरे, खरगोश का मांस खाते हैं। महुए से निर्मित शराब पीते हैं। पुरुष बीड़ी पीते हैं। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

धनवार जनजाति के व्यवसाय 

धनवार जनजाति के लोग जीविकोपार्जन के लिय प्रमुख रूप से कृषि, कृषि मजदूरी, जंगली उपज संग्रह, बाँस से सूपा, टोकनी निर्माण करते हैं। इनकी मुख्य फसल धान है,कोदो, कुटकी, मक्का, उड़द, कुलथी, अलसी, तिल, अरहर, चना आदि की फसल भी उगाते हैं। जंगल से महुआ, चार, गोंद, तेंदू पत्ता, हर्रा, लाख आदि का संग्रह कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं।

जिनके पास कृषि भूमि नहीं है या कम है, वे अन्य जनजातियों के खेतों में मजदूरी भी करते हैं। जंगल से बाँस लाकर या वन विभाग से खरीदकर सूपा, टोकरी आदि बनाकर बेचते हैं। इनके पूर्वज जंगली पशु-पक्षियों का शिकार भी करते थे, किन्तु वर्तमान में शिकार पर प्रतिबंध होने के कारण वर्तमान पीढ़ी शिकार नहीं करते हैं। वर्षा ऋतु में स्वयं के उपयोग के लिए मछली पकड़ते हैं।

धनवार जनजाति के परम्परा 

धनवार समाज पितृवंशीय, पितृसतात्मक, पितृ निवास स्थानीय परंपरा पर आधारित है। धनवार जनजाति अनेक गोत्रों में विभक्त है। एक गोत्र के लोग अपने को ही पूर्वज की संतान मानते हैं। एक गोत्र के लड़के-लड़कियों का आपस में विवाह नहीं होता। इनके प्रमुख गोत्र कुमरा, मरई, उइके, सोनवानी, उरें आदि हैं। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

धनवार महिलाएँ गर्भावस्था में प्रसव के दिन तक सभी आर्थिक तथा पारिवारिक कार्य करती है। प्रसव घर में ही स्थानीय सुईन दाई कराती है। बच्चे की नाल सुईन दाई काटती है। दाई को प्रसव के बाद अनाज एवं कुछ राशि भेंट की जाती है।

प्रसूता को कुलथी, छिंद की जड़, सरई की छाल, ऐंठीमुड़ी, गोंद, सोंठ का काढ़ा पिलाया जाता है। छठे दिन छठी पूजन किया जाता है, जिसमें बच्चे व प्रसूता को नहलाकर देवी देवता का प्रणाम कराया जाता है। रिश्तेदारों को दाल-चावल, सब्जी खिलाया जाता है। शराब भी पिलाते हैं।

लड़के के पिता शादी का प्रस्ताव लेकर लड़की वालों के यहाँ जाते हैं। दोनों पक्ष के लोग बातचीत कर सगाई तय कर लेते हैं। सगाई रस्म के बाद शराब या गुड़ बाटा जाता है। सगाई के बाद लड़के वाले लड़की के यहाँ तक करना क चावल, दाल, गुड़, तेल, हल्दी, नगद 50 रुपये या 100 रुपये तथा कपड़े चढ़ाने जाते हैं। निर्धारित तिथि को वर तथा वधू को तेल, हल्दी लगाते हैं। वर बारात लेकर वधू के घर जाते हैं। फेरे लगने के बाद बारात दुल्हन को लेकर वापस अपने गाँव आ जाती है। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

गाँव में वर-वधू को ग्राम देवता, कुल देवी-देवता का पूजन करा कर घर लाते हैं। इस जनजाति में उढ़रिया (सहपलायन) एवं “पैठू” को भी सामाजिक में जुर्माना देकर विवाह को मान्यता प्राप्त की जाती है। विधवा या त्यक्ता स्त्रियों को चूड़ी पहना कर पुनर्विवाह किया जाता है।

मृत्यु होने पर मृतक को प्रायः दफनाया जाता है। घर की स्वच्छता कर तीसरे दिन तीज नहावन एवं दसवें दिन दसकरम किया जाता है। इस दिन मुण्डन व स्नान के बाद पूर्वजों की पूजा कर रिश्तेदारों को भोजन कराया जाता है। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

धनवार जनजाति में परम्परागत जाति पंचायत का गठन जाति के सदस्य मिलकर करते हैं। जाति का मुखिया धनिया कहलाता है। इनका प्रमुख कार्य जाति के देवी-देवताओं की पूजा व्यवस्था करना, जाति में विवाह, अनैतिक संबंध, तलाक आदि विवादों का निपटारा करना एवं झगड़े आदि में न्याय करना है।

धनवार जनजाति के देवी-देवता  और त्यौहार 

इस जनजाति में बूढ़ा देव ठाकुर देव, बूढ़ी माई, कुल देवी-देवता, चन्द्र, सूर्य एवं पशु-पक्षी, नदी, पहाड़ आदि की पूजा की जाती है। देवी-देवताओं को बकरा, मुर्गा, मुर्गी की बलि दी जाती है। हरेली, पोला, पितर, नवाखानी, दशहरा, दिवाली, होली इनके प्रमुख त्योहार हैं। भूत-प्रेत, जादू-टोना पर विश्वास करते हैं। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

धनवार जनजाति के युवक-युवतियाँ कर्मा पूजा के अवसर पर कर्मा गीत गा कर नाचते हैं। पुरुष स्त्रियाँ अलग-अलग झुण्ड बनाकर नाचते गाते हैं, जिसे पाली खेलना कहा जाता है। नृत्य के समय ढोल, मांदल, थाली आदि बजाकर नाचते गाते हैं। विवाह में विवाह गीत, गाते व नाचते हैं। होली में रहस, दिवाली में स्त्रियों पड़की नाचती हैं। अन्य लोक गीत में ददरिया, रामसप्ताह आदि मुख्य है।

2011 के जनगणना में धनवार जनजाति की साक्षरता 41.7 प्रतिशत दर्शित है। पुरुषों में साक्षरता 51.2 प्रतिशत व स्त्रियों में 32.0 प्रतिशत है। ( धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar janjati chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh )

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source : Internet

2 thoughts on “धनवार जनजाति छत्तीसगढ़ Dhanwar Janjati Chhattisgarh dhanwar tribe chhattisgarh”

  1. मध्य छग में निवासरत धनवार नाक में नथली,फुली नही पहनते हैं। सामाजिक प्रतिबंध है।

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