हॉकिंग विकिरण क्या है?

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सन् 1974 में हॉकिंग ने आईन्स्टाईन के साधारण सापेक्षतावाद का उपयोग कर लघु कृष्ण विवरों का अध्ययन किया। कणों और क्षेत्रों पर लागू क्वांटम सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने तीव्र गुरुत्वीय क्षेत्रों का अध्ययन किया।

इस अध्ययन के फलस्वरूप उन्होंने दावा किया कि कृष्ण विवर स्थिर नहीं रह सकते और उसमें से पदार्थ एवं विकिरण बाहर निकलते जायेंगे। इसे हॉकिंग विकिरण कहा जाता है।

बाहर निकलते कणों का वेग एक समान नहीं होगा, और सबसे तेज कणों का वेग प्रकाश के वेग के करीब होगा। सैद्धान्तिक रूप से इसमें से प्रकाश भी बाहर आ सकता है।

सूर्य के समान द्रव्यमान वाले कृष्ण विवरों से हॉकिंग विकिरण की मात्रा नगण्य होगी और इन्हें कृष्ण विवर ही कहा जायेगा। किंतु अगर हम सूर्य से बहुत कम द्रव्यमान वाले कृष्ण विवरों को देखें तो इनमें से निकलने वाले विकिरणों की मात्रा अधिक होगी।

वे चमकीले होंगे और अल्प समय में ही वाष्पित हो सकेंगे। 1012 कि. ग्रा. द्रव्यमान वाले कृष्ण विवर को वाष्पिभूत होने में एक अरब वर्ष लगेंगे।

हॉकिंग ने तर्क लगाया कि अगर ऐसे कृष्ण विवर ब्रह्मांड के आरंभ में निर्मित हुए हों तो वे इस समय वाष्पिभूत हो रहे होंगे और उनमें से गामा विकिरण निकल रहे होंगे। यद्यपि गामा विस्फोट देखे गये हैं, उनके गुणधर्म हॉकिंग विकिरणों से मेल नहीं खाते।

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