सूर्य के केंद्र में हाइड्रोजन समाप्त होने पर सूर्य का क्या होगा? क्या उसका चमकना खत्म हो जायेगा?

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सूर्य के केंद्र में हाइड्रोजन का हीलियम में रूपांतरण होने से ऊर्जा निर्मित हो रही है। यह ऊर्जा स्त्रोत सूर्य के अंदर बहुत अधिक दबाव पैदा करते हैं जिससे उसका अपने गुरुत्वीय बलों से संतुलन बना रहता है।

जाहिर है कि केंद्र में हाइड्रोजन समाप्त होने से सूर्य में अंदरूनी परिवर्तन होंगे। सर्वप्रथम ऊर्जा निर्माण बंद होने के कारण वहां का तापमान और उसके साथ गैस का दबाव कम होगा।

यह गुरुत्वीय दबावों से संतुलन नहीं बना पायेगा और सूर्य का अंतर्भाग सिकुड़ने लगेगा। इसके कारण केंद्र का तापमान बढ़ने लगेगा और जब यह दस गुना अधिक यानी कि लगभग एक करोड़ तक बढ़ेगा तब केंद्र में नई परमाणु प्रतिक्रियाएं आरंभ होंगी। हीलियम का कार्बन में रूपांतरण होने लगेगा।

इस प्रक्रिया से अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलेगी और सूर्य पहले से अधिक चमकीला दिखेगा। साथ-साथ गैस का दबाव भी बढ़ेगा और अंतर्भाग का आकुंचन बंद होकर बाहरी परतों का विस्तार आरंभ हो जायेगा।

इस स्थिति में सूर्य एक लाल दानव तारा होगा। दानव! क्योंकि उसका आकार 100 से 200 गुना अधिक होगा। जैसे-जैसे आकार बढ़ेगा, इसकी सतह ठंडी होती जायेगी और इसका रंग पीले से लाल हो जायेगा (प्रश्न 91 देखिये)। इस स्थिति में सूर्य, पृथ्वी एवं मंगल सहित अंदरूनी ग्रहों को निगल जायेगा।

यह दानव स्थिति आज से 6 से 7 करोड़ वर्षों बाद आरंभ होगी और केवल चंद लाख वर्षों तक रहेगी। इसके बाद सूर्य के केंद्र में कोई ईंधन नहीं बचेगा और वह गुरुत्वाकर्षण की बदौलत सिकुड़ते हुए अंततः एक श्वेत बौने के रूप में बस जायेगा। तब इसकी त्रिज्या आज के अनुपात में 1% ही होगी और यह बहुत फीका हो जायेगा।

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