ब्रह्मांडीय किरणें क्या होती

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ब्रह्मांडीय किरणें अधिक ऊर्जा वाले कणों का प्रवाह होती हैं जो कि बाहर से हमारे वायुमंडल में प्रवेश करती हैं। इनमें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्युट्रिनो, परमाणु नाभिक एवं गामा किरणें होती हैं।

इन बाहर से आती किरणों को प्राथमिक किरणें कहा जाता है। प्राथमिक किरणें वायुमंडल के अणुओं से टकराकर द्वितीयक किरणें पैदा करती हैं जो कि बौछार के रूप में पृथ्वी की सतह तक आती हैं।

प्राथमिक किरणों को ऊंचाई तक पहुंचाये गये गुब्बारों या रॉकेटों में रखे विशेष उपकरणों द्वारा देखा जाता है। वहीं, द्वितीयक किरणों को बौछार के रूप में जमीन पर रखे संसूचकों की श्रृंखला द्वारा देखा जाता है।

यद्यपि, सूर्य जैसा शांत तारा मध्यम ऊर्जा की किरणें उत्सर्जित करता है। अधिक सक्रिय तारों में से, जैसे कि स्पंदक या सुपरनोवा से ब्रह्मांडीय किरणें निकलती हैं, ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है।

सुपरनोवा किसी तारे के जीवन में एक ही बार होने वाली घटना है और इसमें से बहुत ज्यादा मात्रा में अत्यधिक ऊर्जा वाली किरणों का उत्सर्जन होता है। इसके विपरीत, स्पंदक लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं और लंबे समय तक ये किरणें उत्सर्जित कर सकते हैं।

किंतु ये दोनों ही स्त्रोत, अत्यधिक ऊर्जा वाली किरणों का उत्सर्जन नहीं कर सकते। ये आकाशगंगा के बाहर से आने का अंदेशाहै। कुछ आकाशगंगाएं और क्वेसार (प्रश्न 105 देखिये) विशेष रूप से सक्रिय होते हैं। ये इन किरणों के स्त्रोत हो सकते हैं। अभी तक ये किरणें एक गुत्थी बनी हुई हैं।

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