पृथ्वी के वायुमंडल में कितने विकिरण समा सकेंगे? बाहर से आते विकिरण और वायुमंडल की अनुक्रिया से अंततः क्या परिणाम निकलता है ?

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बाहर से आती विकिरणें वायुमंडल में अलग-अलग मात्रा में अवशोषित होती हैं। विद्युत चुंबकीय वर्णक्रम में रेडियो तरंगे (प्रश्न 1 देखिये) सबसे कम प्रभावित होती हैं।

दृश्य प्रकाश भी अधिकतर मात्रा में पृथ्वी की सतह तक पहुंच पाता है। इस कारण खगोलशास्त्री अपनी दृश्य प्रकाश एवं रेडियो (और कुछ हद तक अवरक्त किरणों की) दूरबीने धरती पर स्थापित कर सकते हैं।

अन्य विकिरण जैसे की गामा, एक्स-रे अतिनील इत्यादि वायुमंडल के विभिन्न ऊंचाइयों तक आते-आते अवशोषित हो जाती है। कौन सी विकिरणें कितनी ऊँचाई तक पहुच यह चित्र-2 में दर्शाया गया है। इन विकिरणों का करने के लिये हमें अपनी दूरबीने उन ऊँचाइयों तक या उपग्रहों की मदद से से जाना आवश्यक होता है।

चित्र- 2. विभिन्न प्रकार की विकिरणों के लिये इस्तेमाल में लाई जाने वाली दूरबीने वायुमंडल के विभिन्न स्तरों पर रखना आवश्यक होता है, यह चित्र में दर्शाया गया है।

आवेशित कणों द्वारा गामा किरणों का शोषण होने से नाभिकीय प्रक्रिया होती है। अन्य कम ऊर्जा वाली विकिरणों से केवल विद्युत-चुंबकीय प्रक्रिया ही संभव है। इस तरह वायुमंडल बाहर से आती हानिकारक विकिरणों से हमारी रक्षा करता है।

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