ग्रहों की कक्षाएं कैसे निश्चित होती हैं? वह लंबगोलाकार (दीर्घवृत्त) ही क्यों होती हैं?

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गुरुत्वाकर्षण के बल के कारण ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। न्यूटन के गति के तीन सिद्धान्त एवं गुरुत्वाकर्षण के नियम से ग्रहों की कक्षा निश्चित होती है।

गुरुत्वाकर्षण का बल ग्रह को सूर्य की ओर खींचता है। इसलिए ग्रह ऐसी कक्षा में घूमता है। जिससे कि उसका त्वरण (गति बदलने का वेग) उस बल के अनुपात में सूर्य की तरफ हो।

जिन कक्षाओं में ग्रह की सूर्य से दूरी सदैव सीमित रहती है उनका आकार लंबगोलाकार ही होता है। यह सिद्धांत न्यूटन ने गणित द्वारा सतरहवीं सदी केउत्तरार्ध में प्रस्थापित किया।

तत्पूर्व, उसी शतक के प्रारंभ में केप्लर ने ग्रहों के वेधों की छानबीन कर उनकी कक्षा लंबगोलाकार होने का निष्कर्ष निकाला था।

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