आकाश में टूटते तारे दिखाई देते हैं, यह क्या मामला है?

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सौर परिवार में ग्रह, उपग्रह, न्यूनग्रह इत्यादि के अलावा कई छोटे-बड़े टुकड़े भी घूमते रहते हैं। इन्हें उल्का (मीटिओर) व उल्कापिंड (मिटिओराईट) कहा जाता है।

ऐसा कोई छोटा टुकड़ा एक मीटर से कम व्यास वाला गोला अगर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की चपेट में आ जाए तो वह पृथ्वी की ओर उड़ान भरता है।

रास्ते में पृथ्वी के वायुमंडल की हवा से घर्षण होने के कारण वह तप्त हो कर चमकता है। ऐसी स्थिती में तारा टूटने का एहसास होता है।

अधिकांश समय, उसके टुकड़े होकर वे रास्ते में ही नष्ट हो जाते हैं (जल कर या वाष्पित होकर)। कभी-कभार इनमें से कुछ पृथ्वी की सतह तक पहुँचते हैं और वैज्ञानिकों के शोध का साधन बनते हैं (प्रश्न 56 देखिए)।

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