आकाशगंगा में स्थित तारों की गिनती कैसे होती है ?

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आकाशगंगा का द्रव्यमान उसके बाहरी तारे और मेघ किस गति से उसके चक्कर काट रहे हैं, इससे नापा जाता है। इसमें न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के नियमों का उपयोग होता है।

अगर हम मानें की औसत रूप से एक तारे का द्रव्यमान सूर्य के जितना होगा तो हम आकाशगंगा के द्रव्यमान से उसमें मौजूद तारों की गिनती कर सकते हैं। यह संख्या करीब डेढ़ सौ अरब आंकी गई है।

अगर हम एक-दो-तीन ऐसे तारों की गिनती करने बैठ जाएं तो हम एक मिनिट में सौ मतलब एक साल में 5 करोड़ तारे ही गिन पाएंगे।

इस गति से डेढ़ सौ अरब तारे गिनने में हमें 3000 साल लग जाएंगे। अब यह काम संगणक (कंप्यूटर) करता है।

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